
बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में करंट की चपेट में आने से लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत के मामले में Wildlife Activist (वन्यजीव प्रेमी) नितिन सिंघवी की सक्रियता के बाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले में Suo Moto PIL (स्वत: संज्ञान जनहित याचिका) के तहत सुनवाई की ।
नितिन सिंघवी ने पेश किए ठोस सबूत
याचिका में Intervener (हस्तक्षेपकर्ता) के रूप में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने विभिन्न समाचार पत्रों की कतरनें (Newspaper Clippings) अदालत के समक्ष प्रस्तुत कीं । उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के जंगलों में हालात कितने भयावह हैं:
- रायगढ़ व सूरजपुर: यहाँ करंट लगने से दो हाथी शावकों और एक अन्य हाथी की दर्दनाक मौत हुई।
- कोरबा का सकोदा जंगल: यहाँ 11 केवी हाई वोल्टेज तार की चपेट में आने से मादा भालू और दो शावकों ने दम तोड़ दिया।
- अवैध शिकार: मैनपाट और सारंगढ़ में शिकारियों द्वारा बिछाए गए तारों की चपेट में आने से वन्यजीवों के साथ-साथ इंसानों की भी जान गई है।
- घायल चीतल: सिंघवी ने कोर्ट का ध्यान करंट से घायल हुए एक चीतल की ओर भी आकर्षित किया।
ACS को शपथ पत्र देने का आदेश
नितिन सिंघवी द्वारा प्रस्तुत इन Evidences (साक्ष्यों) को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के Additional Chief Secretary (ACS) को Personal Affidavit (व्यक्तिगत शपथ पत्र) दाखिल करने का निर्देश दिया है ।
अदालत ने सरकार से पूछा है कि ये घटनाएं किन Circumstances (परिस्थितियों) में हुईं और जिम्मेदार अधिकारियों ने इन्हें रोकने के लिए क्या Steps (कदम) उठाए हैं?
अतिक्रमण पर भी नजर (Focus on Encroachment)
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी Notice (नोटिस) किया कि जंगलों में Encroachment (अतिक्रमण) की गतिविधियां तेजी से फैल रही हैं । कोर्ट का मानना है कि अतिक्रमण की वजह से हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।
अगली सुनवाई की तारीख
इस मामले की अगली सुनवाई अब 5 मई 2026 को होगी, जहाँ सरकार को नितिन सिंघवी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपना जवाब पेश करना होगा ।







