
Amit Jogi बिलासपुर/नई दिल्ली। साल 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के 17 साल पुराने फैसले को पलटते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई (CBI) की अपील स्वीकार करते हुए अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने उन पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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बता दें कि 31 मई 2007 को रायपुर की ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अपने हालिया आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:
“एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना कानूनी रूप से गलत और असंगत है।”
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अमित जोगी, आज सुनवाई
हाईकोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद अमित जोगी ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। अमित जोगी ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
जोगी की दलीलें:
- सुनवाई का मौका नहीं: अमित जोगी का दावा है कि 23 साल पुराने इस मामले में उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
- दस्तावेजों का अंबार: उन्होंने याचिका में कहा कि सीबीआई द्वारा दाखिल 11,000 पन्नों के दस्तावेज पढ़ने के लिए उन्हें मात्र 24 घंटे का समय दिया गया।
- जल्दबाजी का आरोप: जोगी के अनुसार, हाईकोर्ट ने 25 मार्च को सीबीआई की अपील स्वीकार की और 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई कर दी, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सोमवार (6 अप्रैल) को सुनवाई करेगा। अब सबकी नजरें देश की सबसे बड़ी अदालत पर टिकी हैं कि क्या अमित जोगी को वहां से कोई राहत मिलती है या नहीं।







