कर्मचारी हलचल

Labour Law Reforms: ठेका कर्मियों की बल्‍ले-बल्‍ले: आज से लागू हुआ नया नियम, सैलरी के सिस्‍टम से लेकर बदल गया यह सब..

न्‍यूज डेस्‍क(chaturpost.com) देश के सरकारी विभागों, मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले लाखों आउटसोर्स (Outsourced) और ठेका कर्मचारियों (Contractual Workers) के हित में घोषित किया गया ऐतिहासिक नियम अब जमीन पर पूरी तरह लागू (Implemented & Live) हो चुका है। सरकार ने श्रम कानूनों (Labour Laws) के अनुपालन को सीधे सरकारी ठेकों और टेंडर प्रक्रिया (Procurement-linked compliance) से जोड़ते हुए इसे अनिवार्य कर दिया है।

ऑल इंडिया रेडियो (AIR / NewsOnAir) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार का यह नया फ्रेमवर्क अब एक्शन मोड में आ चुका है। इस नए नीतिगत बदलाव के लागू होने के बाद अब कोई भी ठेकेदार या निजी एजेंसी कर्मचारियों के वेतन में देरी या उनके सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के हक का पैसा नहीं मार पाएगी।

अब जमीन पर उतरा सरकार का मास्टर प्लान (New Framework Live)

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने साफ कर दिया है कि इन नए सुधारों (Reforms) को अब पूरी सख्ती के साथ लागू कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर वेतन (Timely payment of wages) दिलाना और सामाजिक सुरक्षा योगदान (Social security contributions) जैसे ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) की अनिवार्य कटौती को समय पर जमा कराना है।

इस नए नियम के प्रभावी होने के बाद यदि कोई ठेकेदार या कंपनी नियमों का उल्लंघन (Violation of labour laws) करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तत्काल और बेहद सख्त प्रवर्तन तंत्र (Stronger enforcement mechanisms) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अब ठेकेदारों के साथ-साथ मुख्य नियोक्ता (Principal employers), यानी वह सरकारी विभाग भी पूरी तरह जवाबदेह बन चुके हैं जहां वे कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

वेतन रोकने वाली डिफॉल्टर कंपनियां अब सीधे होंगी ब्लैकलिस्ट!

सरकार ने इस लागू हो चुके नए फ्रेमवर्क (New framework) में कड़े दंडात्मक प्रावधान (Stricter penalties) जोड़े हैं। नए लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई कंपनी या एजेंसी तय समय सीमा के भीतर वेतन का भुगतान नहीं करती या सोशल सिक्योरिटी फंड में हेराफेरी करती है, तो उसे भविष्य के सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से तुरंत प्रतिबंधित (Debarment) कर दिया जाएगा।

इतना ही नहीं, बार-बार नियमों को तोड़ने वाली डिफ़ॉल्टर कंपनियों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट (Blacklisting) करने का नियम आज से प्रभावी हो गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रम नियमों का पालन न करने वाली कंपनियां अब किसी भी सरकारी टेंडर या बोली (Bidding) प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र (Eligible) नहीं मानी जाएंगी।

DDOs को मिले निर्देश, हर महीने करना होगा सत्यापन

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की खरीद नीति प्रभाग (Procurement Policy Division) द्वारा सभी केंद्रीय मंत्रालयों, स्वायत्त निकायों (Autonomous bodies) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को जो निर्देश जारी किए गए थे, उन्हें अब अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है।

इन निर्देशों के तहत, अब सभी विभागों के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (Drawing and Disbursing Officers – DDOs) को हर महीने (Monthly verification) यह अनिवार्य रूप से सत्यापित करना शुरू करना होगा कि ठेकेदार ने सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर सैलरी बांटी है या नहीं।

श्रम संहिता (Labour Codes) के तहत तय हुई समय सीमा

यह नया निर्देश व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020′ (OSH Code) की धारा 55(3) और मजदूरी संहिता, 2019′ (Code on Wages) की धारा 17(1) के तहत पूरी तरह कानूनी रूप से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत मुख्य नियोक्ता यानी सरकारी विभाग की यह कानूनी जिम्मेदारी तय कर दी गई है कि वह ठेकेदार से समय पर भुगतान कराए।

विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए वेतन भुगतान की जो सख्त समय सीमा (Timelines for payment) तय की गई है, वह अब इस प्रकार लागू है:

कैश पेमेंट पर पूरी तरह रोक, सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर

पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए इस नियम के तहत अब यह अनिवार्य हो चुका है कि कर्मचारियों के वेतन का भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक मोड (Electronic mode) के माध्यम से ही किया जाएगा। नकद (Cash) भुगतान को पूरी तरह से गैर-कानूनी और अमान्य घोषित कर दिया गया है।

इसके साथ ही, ठेकेदारों को सैलरी ट्रांसफर करने के तुरंत बाद मुख्य नियोक्ता (सरकारी विभाग) को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सूचित करना होगा। सभी नए सरकारी अनुबंधों (Contracts) में देरी से वेतन भुगतान के लिए भारी जुर्माना लगाने वाले ‘पेनल्टी क्लॉज’ (Penalty clauses) को लागू कर दिया गया है।

GeM पोर्टल पर फंड होगा ब्लॉक, बजट की कमी का बहाना खत्म

अक्सर यह देखा जाता है कि सरकारी विभाग ‘बजट की कमी’ का बहाना बनाकर ठेकेदारों का बिल रोक देते हैं, जिससे कर्मचारियों की सैलरी अटक जाती है। इस समस्या के स्थायी समाधान (Permanent solution) के लिए जो व्यवस्था बनाई गई थी, वह अब लाइव है।

लागू हुआ नया वित्तीय नियम: अब कोई भी मंत्रालय या विभाग जनशक्ति (Manpower) का ठेका देने से पहले यह सुनिश्चित कर रहा है कि उनके पास पर्याप्त फंड उपलब्ध (Fund availability) है। सरकारी खरीद पोर्टल GeM (Government e-Marketplace) या अन्य प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाली संस्थाएं अनुबंध की अवधि या वित्तीय वर्ष के अंत तक आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन के लिए फंड को पहले ही ब्लॉक (Block or earmark funds) कर रही हैं, ताकि सैलरी में एक दिन की भी देरी न हो।

बिल पास करने का चक्र भी हुआ तेज (Reimbursement Cycle)

सरकार ने ठेकेदारों के लिए भी रीइम्बर्समेंट साइकिल (Reimbursement cycle) को तेज कर दिया है ताकि उनके पास वर्किंग कैपिटल की कमी न हो।

  • ठेकेदारों को कर्मचारियों का वेतन भुगतान करने के बाद हर महीने की 10 तारीख तक अपने बिल संबंधित विभाग में जमा करने होंगे।
  • सरकारी विभागों के DDOs को निर्देशित किया गया है कि वे हर हाल में उसी महीने की 15 तारीख तक इन बिलों को पास (Clearance) कर दें।

कर्मचारियों के हित में सरकार खुद देगी सीधे सैलरी!

केंद्र सरकार का यह ऐतिहासिक श्रम कानून सुधार (Labour Law Reforms) जो अब पूरी तरह लागू हो चुका है, देश के असंगठित और आउटसोर्स क्षेत्र में काम करने वाले लाखों युवाओं के आर्थिक और सामाजिक जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक सुरक्षा कवच बनेगा। इससे न केवल उनके अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि सरकारी कार्यों में भी पारदर्शिता बढ़ेगी।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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