
न्यूज डेस्क। भारतीय ऊर्जा क्षेत्र (Power Sector) में इन दिनों भारी निवेश और बदलाव का दौर चल रहा है। चाहे वह ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स हों या थर्मल पावर का विस्तार, दिग्गज कंपनियां आक्रामक रूप से काम कर रही हैं। आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको ऊर्जा जगत की उन 18 महत्वपूर्ण खबरों के बारे में बताएंगे, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था (Economic Growth) को प्रभावित कर रही हैं।
सरकारी कंपनियों का जलवा: NHPC और ONGC की साझेदारी
हाल ही में NHPC Limited और ONGC Green Limited (OGL) ने एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत भर में पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (Pumped Storage Projects) और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजनाओं को विकसित करना है।
- NHPC की क्षमता: कंपनी के पास वर्तमान में 7,900 MW से अधिक की संभावित PSP क्षमता सर्वे और जांच के दौर में है।
- मुख्य उद्देश्य: इसका लक्ष्य ऊर्जा भंडारण क्षमता (Energy Storage Capacity) को बढ़ाना और ग्रिड में लचीलापन (Grid Flexibility) लाना है।
प्रमुख कंपनियों के बड़े सौदे और फैसले
ऊर्जा क्षेत्र में विलय और अधिग्रहण (Mergers and Acquisitions) का दौर भी तेजी से चल रहा है:
- L&T का बड़ा एग्जिट: Larsen & Toubro (L&T) ने नभा पावर (Nabha Power) को Torrent Power को बेच दिया है। यह सौदा 3,632.35 करोड़ रुपये में पूरा हुआ है।
- Kalpataru का कदम: KPIL ने Kohima-Mariani Transmission (KMTL) में अपनी शेष 26% हिस्सेदारी बेचकर इस ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट से पूरी तरह एग्जिट कर लिया है।
- Vikram Solar को राहत: NCLAT ने विक्रम सोलर के खिलाफ चल रही दिवाला प्रक्रिया (Insolvency Proceedings) पर रोक लगा दी है। कंपनी ने 91.98 लाख रुपये का दावा निपटाने पर सहमति जताई है।
Adani Power और तमिलनाडु की नई ऊर्जा रणनीति
ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में असम और तमिलनाडु से जुड़ी बड़ी खबरें सामने आई हैं:
1. Adani Power का असम में विस्तार: असम में धूबरी जिले में Adani Power के 3,200 MW के अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल कोल-आधारित थर्मल पावर प्रोजेक्ट को EAC से पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए समूह लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है।
2. तमिलनाडु का ‘व्हाइट पेपर‘ और राहत: तमिलनाडु सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए इस साल 3.57% वार्षिक बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी न करने का फैसला किया है। साथ ही, राज्य ने 49,532 करोड़ रुपये के सुधार कार्यक्रम और 231 नए सबस्टेशन बनाने की घोषणा की है।
सौर ऊर्जा (Solar Energy) में तकनीकी उन्नति
सौर ऊर्जा क्षेत्र में कंपनियां उत्पादन क्षमता (Manufacturing Capacity) बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं:
- Jupiter International: कंपनी ने हिमाचल प्रदेश के बद्दी में 1.25 GW की नई TOPCon सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की है। अब उनकी कुल क्षमता 3.25 GW हो गई है।
- SWELECT Energy: ग्रिडनेक्स सोलर में 49% हिस्सेदारी खरीदने की योजना है, जो PM KUSUM-C योजना के तहत 80 MW के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।
- Roofsol Energy: कंपनी ने अपने कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सोलर पोर्टफोलियो के विस्तार के लिए 260 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है।
ट्रांसमिशन और ऑपरेशनल बदलाव
ग्रिड सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए POWERGRID और CTUIL ने कड़े कदम उठाए हैं:
- POWERGRID का बड़ा निवेश: तमिलनाडु में Udumalpet–Madurai 400 kV लाइन को ‘क्वाड डबल-सर्किट’ में बदलने के लिए 772.65 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
- CTUIL का SOP: ट्रांसमिशन सर्विस एग्रीमेंट्स के तहत Force Majeure और ‘Change in Law’ के दावों को प्रोसेस करने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रक्रिया जारी की गई है।
- HERC का रुख: हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने जिंदल स्टेनलेस को 100 MW राउंड-द-क्लॉक नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ओपन एक्सेस देने का निर्देश दिया है।
वैश्विक और रणनीतिक विस्तार
भारतीय कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना दबदबा बना रही हैं:
- NTPC का Mauritius कनेक्शन: NTPC ने मॉरीशस में फ्लोटिंग सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी सब्सिडियरी कंपनी बनाई है।
- Transrail का अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर: Transrail Lighting ने मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में 459 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर हासिल किए हैं।
- Vedanta के कॉन्ट्रैक्ट: Bluspring Enterprises की इकाई STEAG Energy को वेदांता ग्रुप से 1,626 करोड़ रुपये का पांच साल का O&M कॉन्ट्रैक्ट मिला है।
ओडिशा का विजन 2030
ओडिशा सरकार ने 2030 तक 11 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 16 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिन पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसमें ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया जैसे भविष्य के ईंधन पर भी जोर दिया गया है।
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निष्कर्ष: कुल मिलाकर, भारत का ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। निजी और सार्वजनिक कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल और सरकार की नीतियां (Policy Framework) आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगी।







