
नई दिल्ली/रायपुर। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अपनी 33वीं वार्षिक रिपोर्ट ‘Energy Statistics India 2026’ सार्वजनिक कर दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में कोयला, लिग्नाइट, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के भंडार, उत्पादन और खपत का पूरा ब्योरा दिया गया है।
रिन्यूएबल एनर्जी में 10.93% की वार्षिक वृद्धि (Renewable Growth)
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 31 मार्च 2025 तक 47,04,043 मेगावाट के विशाल स्तर पर पहुंच गई है।
- सोलर का दबदबा: रिन्यूएबल सेक्टर में 71% हिस्सेदारी सौर ऊर्जा (Solar Energy) की है।
- क्षमता में उछाल: साल 2016 में स्थापित क्षमता 90,134 MW थी, जो 10.93% की सालाना वृद्धि (CAGR) के साथ अब 2,29,346 MW हो गई है।
- प्रमुख राज्य: देश की 70% अक्षय ऊर्जा क्षमता राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे 6 राज्यों में सिमटी है।
बढ़ती मांग और बिजली उत्पादन (Electricity Generation)
आर्थिक प्रगति के साथ भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) में 2.95% की वृद्धि दर्ज की गई है।
| विवरण (Category) | 2016 के आंकड़े | 2025 के आंकड़े | बदलाव (Status) |
|---|---|---|---|
| स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता | 90,134 MW | 2,29,346 MW | ↑ 154% वृद्धि |
| प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत | 15,296 MJ | 18,096 MJ | ↑ 18% वृद्धि |
| T&D नुकसान (Losses) | 22% | 17% | ↓ सुधार (5% कमी) |
| ऊर्जा क्षेत्र में निवेश (Credit) | ₹1,688 Cr (2021) | ₹10,325 Cr | ↑ 6 गुना वृद्धि |
रिपोर्ट के अन्य खास पहलू:
- बिजली उत्पादन: अक्षय स्रोतों से बिजली उत्पादन 2016 के 1,89,314 GWh से बढ़कर अब 4,16,823 GWh हो गया है।
- प्रति व्यक्ति खपत: भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत (Per Capita Consumption) बढ़कर 18,096 मेगाजूल हो गई है।
- T&D नुकसान में कमी: बिजली वितरण के दौरान होने वाला तकनीकी घाटा 22% से घटकर 17% रह गया है, जो बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर का संकेत है।
- नए फीचर्स: इस बार रिपोर्ट में विमानन और समुद्री ईंधन (Aviation & Marine Fuel) की खपत और ऊर्जा क्षेत्र में ऋण प्रवाह (Credit Flow) के नए आंकड़े भी जोड़े गए हैं।
निवेश में 6 गुना की भारी बढ़ोतरी (Investment)
रिपोर्ट बताती है कि ऊर्जा क्षेत्र में ऋण का प्रवाह साल 2021 के ₹1,688 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹10,325 करोड़ हो गया है। यह निवेश मुख्य रूप से ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को आधुनिक बनाने के लिए किया गया है।
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- Lignite & Natural Gas: रिपोर्ट में केवल कोयला ही नहीं, बल्कि लिग्नाइट और नेचुरल गैस के उत्पादन के आंकड़े भी शामिल हैं।
- Sankey Diagrams: रिपोर्ट में डेटा को समझाने के लिए आधुनिक ‘Sankey Diagrams’ और ‘Energy Balance Tables’ का उपयोग किया गया है।
- Specific Sectoral Data: इस बार की रिपोर्ट में विमानन (Aviation) और समुद्री ईंधन (Marine Fuel) की खपत का डेटा पहली बार अलग से दिया गया है।
- CAGR: रिन्यूएबल एनर्जी की वृद्धि दर (Compound Annual Growth Rate) 10.93% रही है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
रिन्यूएबल एनर्जी में 71% हिस्सेदारी सिर्फ सोलर की (Renewable Growth)
रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों (Key Statistics) के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक भारत की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 47,04,043 मेगावाट तक पहुंच गई है।
- सोलर पावर का दबदबा: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अकेले सौर ऊर्जा (Solar Energy) की हिस्सेदारी लगभग 71% है।
- प्रमुख राज्य: भारत की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का 70% हिस्सा राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में केंद्रित (Concentrated) है।
- बड़ी छलांग: रिन्यूएबल एनर्जी की स्थापित क्षमता 2016 में 90,134 मेगावाट थी, जो 2025 में बढ़कर 2,29,346 मेगावाट हो गई है।
बढ़ती मांग और प्रति व्यक्ति खपत (Energy Consumption)
आर्थिक विकास के साथ-साथ देश में बिजली और ऊर्जा की मांग (Energy Demand) भी बढ़ी है। रिपोर्ट बताती है कि भारत की कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (TPES) में 2.95% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
- प्रति व्यक्ति खपत: भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत (Per Capita Consumption) 2016 के 15,296 मेगाजूल से बढ़कर 2025 में 18,096 मेगाजूल हो गई है।
- कोयले का महत्व: अक्षय ऊर्जा के बढ़ते कदमों के बावजूद कोयला (Coal) अभी भी भारत का मुख्य ऊर्जा स्रोत बना हुआ है।
- घाटे में कमी: बिजली वितरण और ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान (T&D Losses) को 22% से घटाकर 17% करने में सफलता मिली है।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की बाढ़ (Investment Surge)
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ऊर्जा क्षेत्र में ऋण प्रवाह (Credit Flow) में छह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। साल 2021 में यह आंकड़ा ₹1,688 करोड़ था, जो 2025 तक बढ़कर ₹10,325 करोड़ तक पहुंच गया है। यह स्पष्ट रूप से ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में बढ़ते वैश्विक निवेश का संकेत है।
Energy Statistics India 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Ans: ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) नुकसान में सुधार हुआ है। यह 2016 के 22% से घटकर अब 17% पर आ गया है।
Ans: भारत की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता साल 2016 में 90,134 मेगावाट थी, जो 2025 तक बढ़कर 2,29,346 मेगावाट हो गई है। इसकी वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 10.93% रही है।
Ans: भारत की 70% से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता मुख्य रूप से 6 राज्यों में केंद्रित है: राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश।
Ans: भारत की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा का दबदबा है, जो कुल क्षमता का लगभग 71% हिस्सा कवर करती है।
Ans: रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत बढ़कर 18,096 मेगाजूल हो गई है, जो 2016 में 15,296 मेगाजूल थी।
Ans: हाँ, अक्षय ऊर्जा में रिकॉर्ड बढ़त के बावजूद कोयला (Coal) अभी भी भारत का प्राथमिक और सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत बना हुआ है।







