
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट (VLCTPP) में मंगलवार दोपहर भीषण बॉयलर ब्लास्ट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 4 मजदूरों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि अपुष्ट खबरों के अनुसार मृतकों का आंकड़ा 10 तक पहुंच गया है। घटना में 30 से 40 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
दोपहर 2 बजे हुआ धमाका, मची चीख-पुकार
जानकारी के मुताबिक, प्लांट में रोजाना की तरह काम चल रहा था कि तभी दोपहर करीब 2 बजे अचानक बॉयलर की ट्यूब फटने से जोरदार धमाका हुआ। ब्लास्ट इतना भीषण था कि वहां काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए।
- राहत कार्य: सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
- अस्पताल में भर्ती: 18 गंभीर घायलों को रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया है, वहीं 11 घायलों का इलाज खरसिया के पद्मावती अस्पताल में चल रहा है।
- पुष्टि: सक्ती एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने 4 मौतों की पुष्टि की है, जबकि जिंदल अस्पताल से 5-6 और श्रमिकों की मौत की खबर आ रही है।
परिजनों का आक्रोश और प्लांट में तनाव
हादसे के बाद प्लांट के बाहर अफरा-तफरी का माहौल है। गुस्साए परिजनों ने गेट पर जमकर हंगामा किया और घायलों से मिलने देने की मांग की। मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और भारी पुलिस बल वहां तैनात है।
कांग्रेस ने घेरा: ‘यह हादसा नहीं, आपराधिक लापरवाही है’
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए प्लांट प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे प्रबंधन की ‘आपराधिक लापरवाही’ करार देते हुए कहा कि मुनाफे की दौड़ में मजदूरों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
- मुआवजा: मृतक श्रमिकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की सहायता मिले।
- इलाज: घायलों को 20-20 लाख रुपये की मदद और मुफ्त उच्च स्तरीय उपचार दिया जाए।
- कार्रवाई: दोषी अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हो और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की जाए।
- अल्टीमेटम: अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों में मांगें पूरी नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
विवादों से घिरा रहा है यह प्लांट
बता दें कि यह पावर प्लांट शुरुआत से ही विवादों में रहा है। साल 2009 में एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के रूप में इसकी शुरुआत हुई थी। तब जन सुनवाई और पर्यावरण मंजूरी को लेकर ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बाद में साल 2022-23 में दिवालिया प्रक्रिया के तहत वेदांता लिमिटेड ने इसका अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ तापीय विद्युत संयंत्र (1200 मेगावाट) कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों और नियमित ऑडिट की भारी अनदेखी की जा रही है, जिसका खामियाजा आज निर्दोष मजदूरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।







