
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी ‘औद्योगिक संबंध नियम 2026’ का प्रारूप केवल पुराने नियमों का नवीनीकरण नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक विवादों के समाधान और श्रमिक संघों के कामकाज में बड़े बुनियादी बदलाव लाने वाला है।
मुख्य हाईलाइट्स
- डिजिटल इंडिया का प्रभाव: अब श्रमिक संघों (यूनियनों) का पंजीकरण और विवादों की सूचना पूरी तरह ऑनलाइन होगी।
- शिकायत निवारण में महिलाओं को प्राथमिकता: 20 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में बनने वाली समिति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य।
- समय सीमा तय: विवादों के समाधान और छंटनी जैसी प्रक्रियाओं के लिए सख्त समय सीमा निर्धारित।
- एकल खिड़की समाधान: ट्रिब्यूनल और सुलह अधिकारियों की भूमिका को और अधिक स्पष्ट किया गया है।
नया क्या है?
1. श्रमिक संघों (Trade Unions) का हाईटेक पंजीकरण:
अब तक यूनियनों के पंजीकरण की प्रक्रिया कागजी थी। नए नियमों के अनुसार, ‘प्ररूप-दो’ में इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवेदन करना होगा। यदि आवेदन में कोई कमी है, तो रजिस्ट्रार उसे डिजिटल माध्यम से ही सूचित करेगा।
2. कार्य समिति (Works Committee) का नया स्वरूप:
100 या अधिक कामगारों वाले संस्थानों में नियोक्ता और कामगारों के प्रतिनिधियों की संख्या बराबर होगी। खास बात यह है कि कामगारों के प्रतिनिधियों का चयन उनके बीच से ही गुप्त मतदान द्वारा किया जाएगा।
3. हड़ताल और तालाबंदी के लिए कड़े नियम:
नए प्रारूप के तहत, किसी भी संस्थान में हड़ताल पर जाने से पहले कम से कम 14 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होगा। यह सूचना ‘प्ररूप-चार’ में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से या पंजीकृत डाक से सुलह अधिकारी को देनी होगी।
4. छंटनी और बंदी (Retrenchment and Closure) पर मुआवजा:
यदि कोई संस्थान बंद होता है या छंटनी की जाती है, तो नियोक्ता को सरकार को सूचित करने के साथ-साथ कामगारों को मिलने वाले मुआवजे का पूरा विवरण ‘प्ररूप-बीस’ में देना होगा। मुआवजे की राशि सीधे कामगार के बैंक खाते में जमा करनी होगी।
महत्वपूर्ण बिंदु: एक नजर में
- विवाद समाधान: अब सुलह अधिकारी (Conciliation Officer) को विवाद की सूचना मिलने के बाद निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
- हस्ताक्षर की शक्ति: सभी आवेदन और नोटिस अब डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के माध्यम से मान्य होंगे।
- रिकॉर्ड का रख-रखाव: प्रतिष्ठानों को अब अपने सभी रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में सुरक्षित रखने होंगे, ताकि निरीक्षण के समय आसानी हो।
नए नियमों की प्रमुख विशेषताएं और बदलाव
- डिजिटल और ऑनलाइन प्रक्रिया: अब सभी सूचनाएं, आवेदन और शुल्क भुगतान ‘इलेक्ट्रॉनिक रूप’ (ई-मेल या पोर्टल के माध्यम से) किए जा सकेंगे.
- पुराने नियमों का अंत: यह नया नियम छत्तीसगढ़ औद्योगिक विवाद नियम 1957, व्यावसायिक संघ विनियम 1961 और औद्योगिक नियोजन नियम 1963 का स्थान लेगा.
- द्वि-पक्षीय मंच का गठन: औद्योगिक संस्थानों में ‘कार्य समिति’ (Works Committee) बनाई जाएगी, जिसमें अधिकतम 20 सदस्य होंगे और कामगारों के प्रतिनिधियों की संख्या नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों से कम नहीं होगी.
- शिकायत निवारण समिति: 20 या अधिक कामगारों वाले संस्थानों में 10 सदस्यीय ‘शिकायत निवारण समिति’ बनाना अनिवार्य होगा. इसमें महिला कामगारों को उनकी संख्या के अनुपात में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.
- पंजीकरण प्रक्रिया: व्यावसायिक संघों (Trade Unions) का पंजीकरण अब ‘प्ररूप-दो’ में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से होगा.
- विवादों के लिए समय सीमा: यदि शिकायत निवारण समिति 30 दिनों में समाधान नहीं करती है, तो कर्मचारी 60 दिनों के भीतर सुलह अधिकारी के पास आवेदन कर सकेगा.
हाइलाइट्स
- सुझाव आमंत्रित: आपत्तियां और सुझाव राजपत्र में प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर अवर सचिव, श्रम विभाग को भेजे जा सकते हैं.
- हस्ताक्षर की शक्ति: समझौते के ज्ञापनों पर नियोक्ता और व्यावसायिक संघ के अधिकृत पदाधिकारियों (अध्यक्ष, सचिव आदि) के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है.
- ऑनलाइन पंजीकरण: संघों के पंजीकरण की सूचना और प्रमाण पत्र अब इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी किए जा सकेंगे.
- महिलाओं की भागीदारी: कार्य समिति और शिकायत समिति, दोनों में महिला कामगारों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है
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