
बिजली कंपनी पदोन्नति में आरक्षण विवाद रायपुर । छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में इस समय स्थिति किसी ‘ग्रिड फेलियर’ जैसी हो गई है। पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) के मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले ने कंपनी के भीतर एक ऐसा ‘शॉर्ट सर्किट’ पैदा कर दिया है, जिसकी चिंगारी अब आंदोलन की आग बन चुकी है।
एक तरफ डिमोशन (Demotion) की लटकती तलवार है, तो दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग के इंजीनियरों के सामूहिक इस्तीफे (Mass Resignation) की गूंज। इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई के बीच बिजली कंपनी का मैनेजमेंट बुरी तरह फंस गया है।
विवाद का ‘वोल्टेज’ क्यों बढ़ा? (The Core Conflict)
बिलासपुर हाईकोर्ट ने साल 2024 में पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि:
- 2004 की ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List) के आधार पर वरिष्ठता तय की जाए।
- आरक्षण का लाभ लेकर प्रमोट हुए अधिकारियों को पद से नीचे (Demote) किया जाए।
- इस आदेश के परिणामस्वरूप (Consequently), सैकड़ों अधिकारियों की कुर्सी छिनने का खतरा पैदा हो गया है।
सर्वहित संघ: “हक और नियम की बहाली” (Sarvahit Sangh’s Stand)
सर्वहित संघ, जो सामान्य और पिछड़ा वर्ग के हितों की पैरवी कर रहा है, इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रहा है।
- तर्क (Logic): संघ का कहना है कि पदोन्नति केवल योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर होनी चाहिए।
- दबाव (Pressure): संघ ने मैनेजमेंट को अल्टीमेटम दिया है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ, तो वे Contempt of Court (न्यायालय की अवमानना) की कार्रवाई करेंगे।
आरक्षित वर्ग का ‘हाई-वोल्टेज’ आंदोलन (Reserved Category Protest)
दूसरी ओर, आरक्षित वर्ग के अधिकारी और कर्मचारी इस आदेश को अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन मान रहे हैं। उन्होंने मैनेजमेंट को सीधी चेतावनी दी है:
- 20 अप्रैल: एक दिन का सामूहिक अवकाश (Mass Leave)।
- 27 अप्रैल: अनिश्चितकालीन हड़ताल और काम बंद।
- इस्तीफे की धमकी: “अपमानित होकर नौकरी करने से बेहतर है घर बैठना”—इस नारे के साथ कई इंजीनियरों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है।
मैनेजमेंट की सख्ती: ‘लोड’ बढ़ने पर कार्रवाई की तैयारी
आंदोलन की घोषणा ने कंपनी प्रबंधन की नींद उड़ा दी है। प्रबंधन ने ‘डैमेज कंट्रोल’ करने के बजाय सख्ती का रास्ता चुना है:
- सूची तलब: सभी कार्यालयों से हड़ताल पर जाने वालों के नाम मांगे गए हैं।
- कड़ी कार्रवाई: आंदोलन में शामिल होने पर Break in Service (सेवा में व्यवधान) और वेतन कटौती की चेतावनी दी गई है।
- मेंटेनेंस का डर: वास्तव में (In fact), यदि कर्मचारी हड़ताल पर गए तो छत्तीसगढ़ में बिजली सप्लाई का मेंटेनेंस संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
ग्राउंड रिपोर्ट: क्या होगा आगे? (What’s Next?)
बिजली कंपनी के गलियारों में अब केवल एक ही चर्चा है—कि क्या 27 अप्रैल से पहले सरकार कोई बीच का रास्ता निकालेगी?
- डिमोशन की तलवार: यदि आदेश लागू हुआ, तो कई बड़े पदों पर बैठे अधिकारी रातों-रात जूनियर हो जाएंगे।
- सर्वहित संघ की सक्रियता: संघ किसी भी कीमत पर आदेश को लागू कराने पर अड़ा है।
- ब्लैकआउट का खतरा: कर्मचारियों की सामूहिक छुट्टी से प्रदेश में बिजली संकट गहरा सकता है।






