
रायपुर/कवर्धा: छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं (Consumers) की जेब पर अब विभाग के ही लोग डाका डाल रहे हैं। प्रदेश में ऑफलाइन बिजली बिल भुगतान (Offline Payment) के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ताजा मामला कवर्धा क्षेत्र के रवेलीडीह का है, जहां एक कर्मचारी ने उपभोक्ताओं से पैसे तो लिए, लेकिन उन्हें कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय खुद की जेब में भर लिया।
कैसे हुआ 20 लाख का गबन? (The Modus Operandi)
कवर्धा के रवेलीडीह में तैनात एक कर्मचारी ने उपभोक्ताओं को बिल भुगतान की रसीद तो थमा दी, लेकिन असली खेल (Scam) इसके बाद शुरू हुआ। कर्मचारी ने करीब 20 लाख रुपये सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपने निजी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर ली। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज करा दी है।
- कर्मचारियों ने फर्जी ‘कैश रेमिटेंस एडवाइस’ (CRA) बनाकर पैसे दबाए।
- रसीद देने के बाद भी पैसा कंपनी के मुख्य खाते (Main Account) तक नहीं पहुंचा।
- जांच में पहले 19 लाख और फिर अतिरिक्त राशि का हेरफेर मिला।
पहले भी हो चुका है करोड़ों का गोलमाल (Past Incidents)
यह कोई पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में ऐसा घोटाला (Fraud) हुआ हो। इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में करोड़ों रुपये की हेराफेरी (Embezzlement) के मामले सामने आ चुके हैं:
- शिवरीनारायण व मस्तूरी: 6 करोड़ रुपये की हेराफेरी।
- अंबिकापुर: 3.6 करोड़ रुपये की गड़बड़ी।
- बिलासपुर: 2 करोड़ रुपये का गोलमाल।
- राजनांदगांव: 1.5 करोड़ रुपये की राशि दबाई गई।
- आरंग और पलारी: पे-पॉइंट सेंटरों के जरिए बिल की राशि का गबन।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति? (Accountability Issues)
हैरानी की बात यह है कि जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं, विभाग (Department) दोषी अधिकारियों को सस्पेंड (Suspend) कर देता है, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर बहाल हो जाते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गबन की गई करोड़ों की राशि की वसूली (Recovery) आज तक नहीं हो पाई है। विभागीय मॉनिटरिंग (Monitoring) की कमी के कारण भ्रष्ट कर्मचारी लगातार इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
सस्पेंशन का ड्रामा और फिर बहाली: वसूली कब? (Action vs Reality)
इस पूरे प्रकरण (Scenario) में सबसे चौंकाने वाली बात विभाग की कार्यप्रणाली है। जब भी कोई घोटाला सामने आता है, विभाग ‘दिखावे’ के लिए अधिकारियों को सस्पेंड (Suspend) कर देता है। लेकिन कुछ ही महीनों बाद, वही अधिकारी फिर से बहाल होकर मलाईदार पदों पर बैठ जाते हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि गबन की गई करोड़ों की राशि की Recovery (वसूली) क्यों नहीं की जा रही? बिलासपुर के एक मामले में तो सस्पेंडेड जेई (JE) को उसी जगह फिर से पोस्टिंग दे दी गई, जहां उन्होंने गड़बड़ी की थी। क्या यह सिस्टम की मिलीभगत (Collusion) की ओर इशारा नहीं करता?
बकाये का बोझ और भ्रष्टाचार का खेल
एक तरफ प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं पर 1700 करोड़ और सरकारी विभागों पर 2200 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है, वहीं दूसरी ओर जो लोग ईमानदारी से बिल जमा कर रहे हैं, उनका पैसा बिचौलिये और कर्मचारी मिलकर डकार रहे हैं। ऑनलाइन सिस्टम (Online System) होने के बावजूद करोड़ों रुपये की हेराफेरी होना इंटरनल ऑडिट (Internal Audit) टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
✅ बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव (Safety Tips)
यदि आप भी बिजली बिल घोटाले से बचना चाहते हैं, तो इन बातों का पालन (Follow) करें:
- डिजिटल भुगतान: हमेशा CSPDCL के आधिकारिक ऐप (App) या वेबसाइट से ऑनलाइन बिल भरें।
- रसीद का सत्यापन: यदि ऑफलाइन बिल भर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि रसीद पर सही तारीख और मोहर लगी हो।
- SMS अलर्ट: बिल भुगतान के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले कन्फर्मेशन मैसेज की जांच करें।
- बकाया राशि चेक करें: हर महीने अपने अगले बिल में ‘Arrears’ (बकाया) कॉलम जरूर देखें कि पिछला भुगतान जुड़ा है या नहीं।






