शासकीय आदेश व अधिसूचना

Chhattisgarh कांकेर में JSW Ispat की खदान के लिए रास्ता साफ! सरकार ने 1.40 हेक्टेयर भूमि ‘संरक्षित वन’ घोषित कर शुरू की प्रक्रिया

नवा रायपुर/कांकेर (चतुरपोस्ट डेस्क)। छत्तीसगढ़ सरकार (Forest and Climate Change Department) ने उत्तर कांकेर जिले में एक बड़ा रणनीतिक और प्रशासनिक निर्णय (Administrative Decision) लिया है।

नवा रायपुर अटल नगर से जारी अधिसूचना (Chhattisgarh Gazette) के अनुसार, दुर्गुकोन्दल तहसील के ग्राम राउरवाही की 1.400 हेक्टेयर सरकारी जमीन को अब ‘संरक्षित वन’ (Protected Forest) घोषित कर दिया गया है।

यह पूरा विधिक कदम (Legal Procedure) वास्तव में एक बड़ी निजी औद्योगिक कंपनी JSW Ispat Special Products Limited को उसकी खदान (Mine) के संचालन के लिए भूमि आवंटित करने की तैयारी का मुख्य हिस्सा है।

कंपनी की तरफ से इस क्षेत्र में भूमिगत बिजली लाइन बिछाने (Laying underground electricity line) और खदान तक जाने वाले पहुंच मार्ग के चौड़ीकरण (Widening of approach road leading to mine) के प्रस्ताव के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।

वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम 1980 के तहत भेजा गया था प्रस्ताव

chaturpost.com को मिले आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, भानुप्रतापपुर वनमंडल (Bhanupratappur Forest Division) के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र के लिए JSW Ispat कंपनी की तरफ से रकबा 1.396 हेक्टेयर (राउंड फिगर में 1.40 हेक्टेयर) भूमि का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

यह प्रस्ताव वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 [Forest (Conservation and Augmentation) Act, 1980] के कड़े प्रावधानों के तहत तैयार कर शासन को भेजा गया था।

चूंकि राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में यह भूमि चरागाह या सार्वजनिक उपयोग की थी, इसलिए इसे सीधे किसी निजी कंपनी को औद्योगिक उपयोग के लिए हस्तांतरित करना कानूनी रूप से संभव नहीं था।

यही कारण है कि विधिक कूटनीति (Legal Strategy) के तहत पहले इस जमीन का मालिकाना हक वन विभाग को सौंपा गया, और अब इसे भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act, 1927) की धारा 29 के तहत आरक्षित किया गया है।

जमीन का पूरा प्रोफाइल: नए राजपत्र के अनुसार मुख्य प्रशासनिक तथ्य

वन विभाग के विशेष सचिव (Special Secretary) प्रणय मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना संख्या /GENCOR/2453/2025-FOREST के तहत इस पूरी भूमि का विवरण जारी किया गया है।

इस पूरे प्रोजेक्ट और भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति को दर्शाने वाली विशेष रंगीन तालिका का वर्डप्रेस HTML कोड नीचे दिया गया है, इसे आप सीधे अपने पोर्टल पर पेस्ट कर सकते हैं:

                                                                                                                                
प्रशासनिक एवं विधिक बिंदु (Parameters)राजपत्र के अनुसार आधिकारिक विवरण (Official Data)
प्रभावित जिला और तहसीलउत्तर बस्तर कांकेर, तहसील- दुर्गुकोन्दल
वन मण्डल और परिक्षेत्रपूर्व भानुप्रतापपुर, वन परिक्षेत्र- दुर्गुकोन्दल
ग्राम एवं पटवारी हल्का नंबरग्राम- राउरवाही, पटवारी हल्का नंबर 07
खसरा नंबर और कुल रकबाखसरा नंबर- 66/2, क्षेत्रफल- 1.400 हेक्टेयर
प्रस्तावित औद्योगिक उपयोग (Industrial Purpose)JSW Ispat की माइंस हेतु अंडरग्राउंड बिजली लाइन व एप्रोच रोड चौड़ीकरण

बदल गई जमीन की मद: पहले घासथी, अब हुई वन विभागकी संपत्ति

इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया में जमीन के मालिकाना हक का री-क्लासिфикация (Re-classification of Land) सबसे महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट (Turning Point) रहा है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस भूमि हस्तांतरण की वास्तविक विधिक स्थिति (Legal Status) को इन दो मुख्य चरणों के कोड बॉक्स से अपने वर्डप्रेस पर हूबहू सजा सकते हैं:

  ➔ पूर्व राजस्व स्थिति: घास मद (Past Revenue Status)
 

इस अधिसूचना के जारी होने से पहले यह पूरी 1.400 हेक्टेयर जमीन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में “घास” (Grass Land) मद के अंतर्गत दर्ज थी, जो स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक या चरागाह भूमि की श्रेणी में आती थी.

  ➔ वर्तमान कानूनी स्थिति: नामांतरण (Current Legal Status)
 

प्राइवेट माइनिंग कॉरिडोर के प्रस्ताव को विधिक रूप देने के लिए इस जमीन को अब “छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग के पक्ष में नामांतरित एवं हस्तांतरित” (Transferred and Mutated) कर दिया गया है, जिससे इस पर राजस्व विभाग का नियंत्रण समाप्त हो गया है.

जमीन की मद में हुआ यह फेरबदल सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि अब इस क्षेत्र को वनखण्ड राउरवाही‘ (Forest Block Raurwahi) के रूप में प्रबंधित किया जाएगा, जिससे कंपनी को लीज या डायवर्शन (Forest Diversion) की अनुमति मिलना बेहद आसान हो जाएगा।

ग्लोबल जीपीएस कोऑर्डिनेट्स से लॉक की गई बुनियादी सीमाएं

बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) और माइनिंग कंपनी के सुचारू संचालन के लिए इस आवंटित किए जाने वाले क्षेत्र की सीमाओं को राजपत्र में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।

डिजिटल मैपिंग (Digital Mapping) के लिहाज से इस भू-भाग की भौगोलिक अवस्थिति (Geographical Location) इस प्रकार निर्धारित है:

  • सटीक जीपीएस लोकेशन: यह नया वनखण्ड ग्लोब पर उत्तर अक्षांश N 20°18′ 09.11041″ से N 20°18′ 15.10878″ और पूर्वी देशांश E 80°59′ 10.00474″ से E 80°59′ 15.49584″ के बीच स्थित है।
  • आरक्षित वन से दूरी: यह पूरा खसरा नंबर पहले से मौजूद रिजर्व फॉरेस्ट यानी निकटतम वन कक्ष क्रमांक आर.एफ. 617 (RF 617) से लगभग 05 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।
  • चारों दिशाओं की सीमाएं (Boundaries): इस क्षेत्र की भौतिक घेराबंदी के लिए कृत्रिम सीमा रेखा (Artificial Boundary Line) खींचकर बाकायदा सर्वे मुनारे (Survey Pillars) स्थापित किए गए हैं, जिसका रेडी-टू-यूज़ कोड नीचे दिया गया है:
 
       
  • उत्तर (North): कृत्रिम सीमा रेखा के सर्वे मुनारा क्रमांक 01 से 02 तक का पूरा कॉरिडोर.
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  • पूर्व (East): कृत्रिम सीमा रेखा के सर्वे मुनारा क्रमांक 02 से 03 तक की निर्धारित सरहद.
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  • दक्षिण (South): कृत्रिम सीमा रेखा के सर्वे मुनारा क्रमांक 03 से 04 तक की सीमा पट्टी.
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  • पश्चिम (West): कृत्रिम सीमा रेखा के सर्वे मुनारा क्रमांक 04 से पुनः 01 तक का पूरा क्षेत्र.
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स्थानीय समुदायों और पारंपरिक अधिकारों पर क्या होगा इसका असर?

जब भी कोई सार्वजनिक या घास मद की जमीन किसी निजी माइनिंग प्रोजेक्ट (Mining Project) या इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वन विभाग को ट्रांसफर की जाती है, तो स्थानीय ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों (Community Rights) पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

हालांकि, किसी भी संभावित कानूनी विवाद या जन-आक्रोश से बचने के लिए राज्य सरकार ने अधिसूचना में एक सुरक्षात्मक क्लॉज (Protective Clause) भी शामिल किया है:

  • अधिकारों के संरक्षण का विधिक दावा: राजपत्र में स्पष्ट तौर पर यह शर्त (Mandatory Condition) जोड़ी गई है कि इस घोषित वनखण्ड पर स्थानीय व्यक्तियों या पारंपरिक समुदायों के जो भी वर्तमान अधिकार (Existing Rights) हैं, वे किसी भी रीति से न्यूनीकृत (Abridged) या प्रभावित नहीं होंगे।
  • रूपांतरण का विवेकाधिकार: इस क्लॉज के साथ ही सरकार ने यह शक्ति भी अपने पास सुरक्षित रखी है कि राज्य सरकार समय-समय पर इन अधिकारों में रूपांतरण या संशोधन (Modification) कर सकती है।
  • व्यावहारिक बदलाव: विधिक रूप से अधिकार सुरक्षित रहने के बावजूद, जमीन के फॉरेस्ट लैंड (Forest Land) में तब्दील हो जाने और JSW कंपनी का प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों का इस भूमि पर व्यावहारिक उपयोग और दखल पूरी तरह बदल जाएगा।
Chhattisgarh Forest Land
सरकार की अधिसूचना

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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