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CG High Court Big Decision: छत्तीसगढ़ में आपराधिक फैसलों का बदल गया नियम, अब कोर्ट को देनी होगी गवाहों और सबूतों की पूरी ‘कुंडली’; राजपत्र में प्रकाशन

बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में कानूनी व्‍यवस्‍था में बड़ा बदलाव किया गया है। कानूनी कार्यवाही और अदालती फैसलों को लेकर राज्‍य में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार (Administrative Reform) किया गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court of Chhattisgarh) ने आपराधिक नियमों में संशोधन करते हुए अब सभी निचली अदालतों के लिए फैसलों के अंत में ‘सारणीबद्ध चार्ट’ (Tabulated Charts) जोड़ना अनिवार्य कर दिया है ।

यह नया नियम नियम 240-क (Rule 240A) के तहत लागू किया गया है । इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी फैसलों को अधिक स्पष्ट, व्यवस्थित (Structured) और आसानी से समझने योग्य बनाना है । इस संबंध में सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? (Reason for Change)

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया है । अक्सर आपराधिक मामलों के फैसलों में गवाहों और दस्तावेजों की सूची इतनी लंबी होती है कि मुख्य बिंदुओं को समझना चुनौतीपूर्ण (Challenging) हो जाता है। अब चार्ट के माध्यम से हर जानकारी एक नज़र में उपलब्ध होगी ।

फैसलों में शामिल होंगे ये 3 प्रमुख चार्ट (Key Highlights)

नए नियमों के अनुसार, अब आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाले सभी ट्रायल कोर्ट (Trial Courts) को फैसले के अंत में निम्नलिखित सारांश देना होगा:

  • साक्षियों का चार्ट (Witness Chart): इसमें परीक्षित गवाहों के नाम और उनकी भूमिका (जैसे चक्षुदर्शी, डॉक्टर या जांच अधिकारी) का स्पष्ट विवरण होगा ।
  • प्रदर्शित दस्तावेजों का चार्ट (Exhibited Documents): ट्रायल के दौरान पेश किए गए सभी दस्तावेज़, जैसे FIR, पंचनामा और मेडिकल रिपोर्ट की सूची ।
  • भौतिक वस्तुओं का चार्ट (Material Objects Chart): अपराध में प्रयुक्त हथियार, कपड़े या अन्य बरामद सामान (मुद्ममाल) का पूरा ब्यौरा ।

जटिल मामलों के लिए विशेष प्रावधान (Special Provision)

ऐसे मामले जिनमें साक्षियों या दस्तावेजों की संख्या बहुत अधिक है (जैसे आर्थिक अपराध या षड्यंत्र), वहां न्यायालय केवल उन महत्वपूर्ण साक्ष्यों का चार्ट तैयार कर सकता है जिनका उपयोग फैसले का आधार बनाने के लिए किया गया है ।

यह नया नियम अभियोजन (Prosecution) के साथ-साथ बचाव पक्ष (Defense) के साक्ष्यों पर भी समान रूप से लागू होगा । छत्तीसगढ़ के विधि और विधायी कार्य विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है ।

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E-E-A-T के लिए एडिटर नोट:

यह खबर छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) के क्रमांक 221, दिनांक 7 मई 2026 में प्रकाशित अधिसूचना पर आधारित है । हाई कोर्ट बिलासपुर द्वारा जारी यह निर्देश (Instructions) राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों के लिए बाध्यकारी हैं ।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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