
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी (CSPDCL) के खिलाफ कंपनी के हजारों संविदा कर्मचारियों ने अब “आर-पार की लड़ाई” का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेश भर के संविदा कर्मी अपने नियमितीकरण (Regularization) की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने बताया कि लगातार पत्राचार (Official Correspondence) और शांतिपूर्ण अपीलों के बाद भी जब पावर कंपनी प्रबंधन (Management) ने उनकी सुध नहीं ली, तो हताश और आक्रोशित कर्मचारियों ने विवश होकर यह बड़ा फैसला लिया है। संघ की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, 25 मई 2026, सोमवार को दोपहर 3:00 बजे से बिजली कंपनी मुख्यालय, डंगनिया (रायपुर) के सामने एक विशाल प्रदर्शन और गेट मीटिंग (Protest & Gate Meeting) आयोजित की जाएगी। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो पूरे छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था ठप करने की तैयारी है।
दशकों से शोषण: 8-10 साल से संविदा के भरोसे चल रही व्यवस्था
इस आंदोलन (CSPDCL Protest) के पीछे कर्मचारियों का दर्द बेहद गहरा है। ट्रांसमिशन (Transmission) और डिस्ट्रीब्यूशन के मैदानी अमले में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- कठिन परीक्षा पास, फिर भी संविदा: वर्ष 2016 और 2018 में बाकायदा मेरिट लिस्ट, कड़े शारीरिक परीक्षण (Physical Test) और सरकारी आरक्षण नियमों (Reservation Rules) के तहत भर्ती हुए 2500 लाइन परिचारक (Line Attendants) आज भी संविदा की मामूली सैलरी पर काम करने को मजबूर हैं।
- पुराना नियम बदला: कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि इससे पहले वर्ष 2007, 2010 और 2011 बैच के संविदा कर्मचारियों को प्रबंधन ने महज 2 साल की सेवा के भीतर ही नियमित (Regular) कर दिया था, लेकिन वर्तमान बैच के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
- उम्र का पड़ाव: संविदा कर्मियों का कहना है, “हम पिछले 10 वर्षों से अपनी जान हथेली पर रखकर छत्तीसगढ़ को रोशन कर रहे हैं, लेकिन आज हमारे खुद के घरों में अंधेरा है। हमारी उम्र अब ऐसी दहलीज पर पहुंच चुकी है कि हम किसी दूसरी सरकारी या निजी नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते।”
मौत के कुएं में काम: बिना सुरक्षा उपकरण और हेल्पर्स के जानलेवा काम
बिजली विभाग में लाइनमैन और लाइन परिचारक का काम तकनीकी रूप से सबसे ज्यादा जोखिम भरा (High-Risk Job) माना जाता है। इसके बावजूद इन संविदा कर्मियों से बिना किसी बुनियादी सुरक्षा नेटवर्क के काम कराया जा रहा है:
4500 से अधिक पद खाली, वृद्ध कर्मचारियों पर सिस्टम का भार
एक तरफ जहां संविदा कर्मचारी नियमित होने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के भीतर का ढांचा पूरी तरह चरमरा रहा है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग के भीतर 4500 से अधिक नियमित लाइन परिचारक के पद रिक्त (Vacant Posts) पड़े हुए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2011 के बाद से विभाग में कोई भी नई नियमित भर्ती (Regular Recruitment) नहीं की गई है। इसके परिणामस्वरूप, जो पुराने नियमित कर्मचारी बचे हैं, वे अब वृद्ध (Aging Staff) हो चुके हैं और उनके लिए पोल पर चढ़ना या भारी फील्ड वर्क करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो चुका है।
इस बीच, पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं (Consumers) की संख्या में लाखों की वृद्धि हो चुकी है। इस बढ़े हुए वर्कलोड (Increased Workload) का पूरा बोझ इन 2500 संविदा कर्मचारियों के कंधों पर टिका हुआ है।
प्रबंधन की वादाखिलाफ़ी: अपने ही ‘बोर्ड के फैसले‘ से पलटी कंपनी
यह आंदोलन कोई अचानक भड़का गुस्सा नहीं है, बल्कि यह प्रबंधन की लगातार वादाखिलाफी (Breach of Trust) का नतीजा है। 1 जुलाई 2015 को बकायदा बिजली कंपनी के संचालक मंडल (Board of Directors) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था।
बोर्ड का आधिकारिक निर्णय था कि जो भी संविदा कर्मचारी 6 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर लेगा, उसे विभाग के भीतर खाली पड़े नियमित पदों पर स्वतः समाहित (Regularize) कर दिया जाएगा। आज इस फैसले को गुजरे कई साल हो गए और कर्मचारियों को काम करते हुए 8-10 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस नीति (Policy) को फाइलों से बाहर नहीं निकाला गया।
कानूनी और संवैधानिक आधार पर बिजली कंपनी बैकफुट पर
संविदा कर्मचारी संघ ने इस बार आर-पार की लड़ाई के लिए पूरी कानूनी तैयारी (Legal Framework) कर ली है। संघ ने प्रबंधन के खिलाफ तीन बड़े कानूनी आधार तैयार किए हैं:
- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (Supreme Court Judgment): देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने कई फैसलों में स्पष्ट कहा है कि जो कार्य ‘बारहमासी’ (Perennial Nature of Work) प्रकृति के हैं, उनके लिए कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक संविदा पर रखना पूरी तरह से अवैध और कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में नियमितीकरण अनिवार्य है।
- औद्योगिक नियोजन स्थायी आदेश अधिनियम 1963 (Industrial Employment Standing Orders Act): खुद बिजली विभाग ने इस सख्त कानून को 1 जुलाई 2023 को आधिकारिक रूप से अपनाया था। इस कानून के नियम साफ कहते हैं कि यदि कोई कर्मचारी समान पद पर 6 महीने तक निरंतर कार्य कर लेता है, तो वह स्थायी होने का विधिक अधिकारी बन जाता है।
- संविधान के मौलिक अधिकार (Constitutional Rights): वर्तमान व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार) का सरेआम उल्लंघन करती है, क्योंकि यहाँ ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत को दबाया जा रहा है।
विवादास्पद ‘HR पॉलिसी 2026′ ने आग में डाला घी
हाल ही में विभाग द्वारा जारी की गई नई मानव संसाधन नीति यानी HR Policy 2026 ने इस पूरे विवाद (CSPDCL Protest) को और ज्यादा भड़का दिया है। इस नई नीति में विभाग ने एक बेहद विरोधाभासी नियम जोड़ दिया है।
नियम के मुताबिक, संविदा कर्मियों के लिए पोल पर चढ़ना और डेंजर जोन में ‘परमिट’ (Permit to Work) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि तकनीकी और सुरक्षा नियमों (Safety Regulations) के अनुसार, यह बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा कार्य केवल ‘सहायक लाइनमैन’ या उससे उच्च स्तर के कुशल और नियमित कर्मचारियों का होता है। यानी जिम्मेदारी नियमित कर्मचारियों वाली और वेतन व सुरक्षा संविदा वाली—यह दोहरी नीति अब कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं है।
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें
कर्मचारी संघ ने सरकार और प्रबंधन के सामने अपनी दो टूक मांगें (Core Demands) रख दी हैं:
- तत्काल नियमितीकरण: वर्ष 2015 के बोर्ड निर्णय को आधार बनाकर, विभाग में रिक्त पड़े 4500+ पदों पर सभी पात्र संविदा लाइन परिचारकों को तुरंत नियमित किया जाए।
- न्याय और मुआवजा: ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले (मृतक) और स्थायी रूप से दिव्यांग हो चुके संविदा कर्मियों के आश्रित परिवारों को तुरंत अनुकंपा नियुक्ति दी जाए और उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
अंतिम चेतावनी: 22 जून 2026 से ठप हो सकता है पूरा छत्तीसगढ़!
आम जनता पर क्या होगा असर? भीषण गर्मी में मच सकता है हाहाकार
इस आंदोलन का सबसे सीधा और घातक असर छत्तीसगढ़ की आम जनता (General Public) पर पड़ने वाला है। वर्तमान में मई-जून की भीषण गर्मी अपने चरम पर है। बढ़ते तापमान के कारण आए दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, केबल जल रहे हैं और आंधी-तूफान के कारण बिजली के तार टूट रहे हैं।
इन तमाम फॉल्ट्स को सुधारने और छत्तीसगढ़ के गांवों-शहरों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति (Interrupted Power Supply) को बनाए रखने का पूरा जमीनी काम यही संविदा कर्मचारी करते हैं। यदि ये कर्मचारी हड़ताल और आंदोलन पर चले जाते हैं, तो बिजली सुधार कार्य पूरी तरह से ठप (Maintenance Work Haltech) पड़ जाएगा। ऐसे में किसी भी बड़े फॉल्ट के बाद घंटों या दिनों तक बिजली गुल रह सकती है, जिससे आम जनता को भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
अब गेंद मुख्यमंत्री और बिजली कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के पाले में है। क्या समय रहते इस CSPDCL Protest का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाएगा, या फिर छत्तीसगढ़ की जनता को इस भीषण गर्मी में ब्लैकआउट के अंधेरे में रहना पड़ेगा? यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ के पावर सेक्टर और प्रशासनिक गलियारों की हर लाइव अपडेट के लिए पढ़ते रहिए chaturpost.com।







