
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ (Federation of State Pensioners), छत्तीसगढ़ प्रदेश के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में मंत्रालय (Mahanadi Bhawan), नया रायपुर में वित्त सचिव रोहित यादव (Finance Secretary Rohit Yadav) से एक बेहद महत्वपूर्ण और सौजन्य भेंट की।
यह हाई-प्रोफाइल बैठक (High-profile meeting) खुद वित्त सचिव के विशेष आमंत्रण पर आयोजित की गई थी। इस बैठक में महासंघ द्वारा पूर्व में सौंपे गए विभिन्न ज्ञापनों और मांगों पर बिंदुवार (Point-by-point) और बेहद सकारात्मक चर्चा हुई है। लंबे समय से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह मुलाकात एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।
MP से सहमति लेने की बाध्यता होगी खत्म!
इस महत्वपूर्ण बैठक में जो सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला निकलकर सामने आया, वह है मध्य प्रदेश सरकार से सहमति लेने की अनिवार्यता को समाप्त करना।
वित्त सचिव रोहित यादव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि “मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49″ (State Reorganisation Act) के तहत पेंशनरों को महंगाई राहत यानी डीआर (Dearness Relief – DR) देने के लिए पड़ोसी राज्य (Madhya Pradesh) से आपसी सहमति लेने की जो कानूनी बाध्यता है, उसे सरकार अब पूरी तरह समाप्त करने पर विचार कर रही है। वित्त सचिव ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस गंभीर विषय पर बेहद जल्द और सकारात्मक निर्णय (Quick Decision) लेने जा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को समय पर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।
पेंशनर्स महासंघ की मुख्य मांगें और चिंताएं
बैठक के दौरान महासंघ ने राज्य के बुजुर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारियों (Retired Employees) की उन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया, जो पिछले कई वर्षों से लंबित (Pending) हैं।
महासंघ के नेताओं ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज भी कई बुजुर्ग पेंशनभोगी अपने जायज और वैधानिक अधिकारों (Legal Rights) के लिए सरकारी दफ्तरों और विभिन्न विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। महासंघ ने वित्त सचिव के सामने अपनी मांगों की पूरी सूची रखी, जिसमें निम्नलिखित मुद्दे सबसे प्रमुख थे:

- 88 माह का लंबित डीआर एरियर: पेंशनर्स के पिछले 88 महीनों का महंगाई राहत (DR Arrear) का भुगतान तुरंत किया जाए।
- पेंशन प्रकरणों में देरी: सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से जुड़े मामलों में होने वाले अनावश्यक विलंब (Unnecessary Delay) को तुरंत रोका जाए।
- रिटायरमेंट के दिन ही पूरा भुगतान: जिस दिन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो, उसी दिन उसे ग्रेच्युटी, पीपीओ और अन्य सभी देयकों का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित हो।
- हाईकोर्ट के आदेशों का पालन: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) द्वारा पेंशनर्स के पक्ष में दिए गए निर्णयों को बिना किसी देरी के लागू किया जाए।
2000 करोड़ की अंतरिम राहत और करोड़ों की देनदारी का मुद्दा
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) पर बात करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। महासंघ ने बताया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को प्राप्त हुई लगभग ₹2000 करोड़ की राशि को अंतरिम राहत (Interim Relief) के रूप में तुरंत बुजुर्ग पेंशनरों के बीच वितरित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, महासंघ ने ₹10,536 करोड़ की शेष देनदारी और डीआर एरियर के भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी पर गहरी चिंता (Deep Concern) व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि इस लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों (Accountable Officers) के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
GPF खातों में गड़बड़ी और रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण
बैठक में भविष्य निधि यानी जीपीएफ (General Provident Fund – GPF) खातों में आ रही तकनीकी और लिपिकीय त्रुटियों का मामला भी बेहद गंभीरता से गूंजा। महासंघ ने बताया कि कई कर्मचारियों के खातों में बिना किसी ठोस कारण के “नेगेटिव बैलेंस” (Negative Balance) दर्शाया जा रहा है, जो रिकॉर्ड संधारण में घोर लापरवाही का नतीजा है।
पेंशनर्स महासंघ की बड़ी मांग: जीपीएफ के सभी रिकॉर्ड्स का पूरी तरह से डिजिटलीकरण (Full Digitalization) किया जाए। विभाग की गलतियों या तकनीकी खामियों के कारण किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी पर कोई भी आर्थिक भार (Financial Burden) न डाला जाए।
कृषि विश्वविद्यालय के पेंशनर्स के साथ सौतेला व्यवहार?
बैठक में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (Indira Gandhi Agricultural University), रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और स्टाफ की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। महासंघ ने विश्वविद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यहां पेंशनर्स को समय पर महंगाई राहत (DR) नहीं दी जा रही है।
एक हैरान करने वाला तथ्य यह सामने आया कि 46% के बाद मिलने वाले 4% अतिरिक्त डीआर का आदेश जारी करना ही प्रबंधन भूल गया! बार-बार याद दिलाने के बाद भी अधिकारी एक-दूसरे पर दोषारोपण (Blame Game) कर रहे हैं और आदेश जारी करने में लगातार टालमटोल कर रहे हैं। इसके कारण कई प्राध्यापकों का पेंशन निर्धारण (Pension Fixation) लंबे समय से अटका हुआ है।
दैनिक वेतन भोगियों और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर नाराजगी
महासंघ ने बिलासपुर उच्च न्यायालय (Bilaspur High Court) द्वारा पारित किए गए विभिन्न आदेशों के पालन में हो रही देरी पर भी कड़ा रुख अपनाया। नियमों के मुताबिक, नियमितीकरण से पहले की सेवा अवधि को भी पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service) में जोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस फाइल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही है। इसके अलावा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों (Daily Wage Earners) के उपादान भुगतान (Gratuity Payment) में भी विभाग द्वारा अनावश्यक आपत्तियां (Unnecessary Objections) लगाई जा रही हैं, जिससे बुजुर्गों को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
वित्त सचिव रोहित यादव का मिला ठोस आश्वासन
बैठक की समाप्ति के बाद महासंघ के नेताओं ने इस चर्चा को अत्यंत सकारात्मक, सार्थक और उत्साहवर्धक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार जल्द ही छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग पेंशनर्स के हित में कुछ ऐतिहासिक और बड़े फैसले लेगी।
बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद
इस अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के प्रतिनिधिमंडल के रूप में ये प्रमुख चेहरे शामिल थे:
- वीरेन्द्र नामदेव (प्रांताध्यक्ष)
- अनिल गोल्हानी (प्रदेश महामंत्री)
- प्रवीण कुमार त्रिवेदी (प्रदेश महामंत्री)
- एन. के. चौबे (प्रदेश संयोजक, विश्वविद्यालय पेंशनर कल्याण प्रकोष्ठ)
- अनिल पाठक (प्रदेश संयोजक, दैनिक वेतन भोगी पेंशनर कल्याण प्रकोष्ठ)
- तथा महासंघ के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी।
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