
रायपुर/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी मल्हार का गौरव बढ़ाया है। पीएम मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए मल्हार में मिले तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाओं (Copper Plates) का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद इस दुर्लभ ताम्रपत्र के पीछे की वो दिलचस्प कहानी भी सामने आ गई है, जिसे छत्तीसगढ़ के एक प्रतिष्ठित परिवार ने 100 साल से अपने घर में एक अनमोल अमानत की तरह सहेज कर रखा था।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी छेदीलाल पांडेय के परिवार ने पीढ़ियों से सहेजा
इस ऐतिहासिक खोज की कड़ियां मल्हार के एक गौरवशाली इतिहास से जुड़ी हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम अभियान’ की विशेषज्ञ टीम को जब मल्हार में इस ताम्रपत्र के होने की भनक लगी, तो टीम ने स्थानीय निवासी संजीव पांडेय के घर जाकर इसकी पड़ताल की।
संजीव पांडेय ने एक बेहद दिलचस्प खुलासा करते हुए बताया कि लगभग 100 साल पहले मल्हार के ही एक किसान को अपने खेत में खुदाई के दौरान यह ताम्रपत्र मिला था। उस किसान ने इसके महत्व को समझते हुए इसे संजीव पांडेय के दादाजी और क्षेत्र के प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय छेदीलाल पांडेय को सौंप दिया था। तब से लेकर आज तक इस परिवार ने इस पुरातात्विक धरोहर को बेहद सुरक्षित रखा।
साढ़े तीन किलो है वजन, ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में है अंकित
संजीव पांडेय के मुताबिक, इस ताम्रपत्र का कुल वजन साढ़े तीन किलोग्राम है। वर्ष 1975 में देश के प्रख्यात पुरातत्ववेत्ता और पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने भी इस ताम्रपत्र का परीक्षण किया था। उनके मुताबिक, यह ताम्रपत्र ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा गया है। यह लगभग 1500 साल पुराना है, जो दक्षिण कोसल के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन (शासनकाल 595-655 ईस्वी) के काल का है, जिनकी राजधानी सिरपुर हुआ करती थी। ताम्रपत्र में राजा बालार्जुन द्वारा एक गांव को दान में दिए जाने के राजकीय आदेश का उल्लेख है।
दिल्ली भेजा जाएगा ताम्रपत्र, जिला प्रशासन करेगा दस्तावेजीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताम्रपत्र 5वीं से 7वीं शताब्दी के मध्य छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना, राजस्व व्यवस्था और राजवंशों के आपसी संबंधों को समझने के लिए एक जीवंत दस्तावेज है। ‘ज्ञान भारतम अभियान’ की विशेषज्ञ टीम अब इसे और अधिक वैज्ञानिक परीक्षण व कार्बन डेटिंग के लिए दिल्ली भेजने की तैयारी कर रही है। इधर, प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद बिलासपुर जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है और इस पूरी बौद्धिक विरासत के दस्तावेजीकरण (Documentation) की योजना बनाई जा रही है।
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