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एक्‍सप्‍लेनर: क्‍या स्‍मार्ट मीटर की ‘लाल लाइट’ बढ़ा रही है आपका बिजली बिल? जानिए क्‍या कहता है विज्ञान और क्‍या है सच्‍चाई

Smart Meter Billing Light Myths न्‍यूज डेस्‍क। देशभर में बिजली के पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। नई तकनीक के साथ कुछ नए डर भी पैदा हुए हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर यह चर्चा होती है कि स्मार्ट मीटर में 24 घंटे जलने वाली लाइट और डिस्प्ले भी बिजली की खपत करते हैं, जिसका बोझ जनता की जेब पर पड़ता है।

चतुरपोस्‍ट (Chaturpost) ने इस विषय पर तकनीकी शोध और सरकारी मानकों का विश्लेषण किया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा सच।

इंडिकेटर लाइट: कितनी बिजली खाता है छोटा बल्ब?

स्मार्ट मीटर में जो LED लाइट ( जिसे Pulse LED कहते हैं) ब्लिंक करती है, वह बहुत ही सूक्ष्म बिजली पर काम करती है।

  • खपत का गणित: एक LED लाइट मात्र 0.01 से 0.05 वॉट बिजली लेती है।
  • तुलना: यदि यह लाइट पूरे महीने (30 दिन) लगातार जलती रहे, तो कुल खपत लगभग 0.036 यूनिट होगी।
  • रुपयों में हिसाब: 7 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर से, यह महीने में मात्र 25 पैसे का खर्च है।

क्‍या यह खर्च आपके बिल में जुड़ता है? (तकनीकी नियम)

यह सबसे बड़ा भ्रम है। बिजली मीटरिंग के अंतरराष्ट्रीय मानक (IEC) और भारतीय मानक (IS 16444) बहुत स्पष्ट हैं:

  • इंटरनल पावर सप्लाई: मीटर के अंदर के पार्ट्स (डिस्प्ले, सिम कार्ड, लाइट) को चलाने वाली बिजली इनपुट साइड से ली जाती है।
  • आउटपुट मीटरिंग: मीटर केवल उस करंट को मापता है जो उपभोक्ता के घर की ओर (आउटपुट टर्मिनल) जाता है।

साधारण शब्दों में: मीटर खुद को चलाने के लिए जो बिजली लेता है, उसे वह आपके लोड में नहीं जोड़ता। यह खर्च बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के खाते में जाता है।

स्मार्ट मीटर में जो लाल/हरी LED लगातार ब्लिंक करती है, उसे सामान्यतः “Pulse LED” या “Energy Pulse Indicator” कहा जाता है। इसका काम यह दिखाना होता है कि कितनी बिजली उपयोग हो रही है। उदाहरण के लिए कई मीटरों में 1000 pulses = 1 kWh सेट किया जाता है। यानी जितनी तेज LED ब्लिंक करेगी, उतनी अधिक बिजली खपत हो रही है।

तकनीकी दृष्टि से देखें तो:

  • एक सामान्य indicator LED लगभग 0.02W से 0.1W तक बिजली लेती है।
  • यदि LED लगातार जल भी रही हो, तो उसकी वार्षिक खपत लगभग 0.2 से 0.8 यूनिट (kWh) प्रति वर्ष के आसपास बैठती है।
  • जबकि अधिकांश स्मार्ट मीटरों में LED लगातार जलती नहीं, बल्कि केवल pulse/blink करती है, इसलिए वास्तविक खपत इससे भी कम होती है।

यानी केवल “बिलिंग LED” की बिजली खपत इतनी कम होती है कि सामान्य घरेलू बिल में उसका असर लगभग नगण्य माना जाता है।

हालांकि पूरा स्मार्ट मीटर (display, communication module, processor, SIM/GPRS आदि सहित) खुद कुछ बिजली जरूर उपयोग करता है। विभिन्न तकनीकी स्पेसिफिकेशन के अनुसार:

  • single-phase smart meter का self-consumption सामान्यतः 1W से 3W के बीच होता है।
  • 3-phase मीटर में यह कुछ अधिक हो सकता है।

यदि कोई मीटर 2W खुद उपयोग करे, तो उसकी वार्षिक खपत लगभग:

2 W×24×365÷1000≈17.5 kWh/year2\text{ W} \times 24 \times 365 \div 1000 \approx 17.5\text{ kWh/year}2 W×24×365÷1000≈17.5 kWh/year

यानि करीब 17–18 यूनिट सालाना हो सकती है।

भारत में कई राज्यों में उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल बढ़ने की शिकायतें की हैं। लेकिन बिजली कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण पुराने मीटरों की कम सटीकता या under-recording हो सकता है, न कि LED की खपत।

ध्यान देने वाली बात:

  • भारत के BIS/IEC standards में meter self-consumption की सीमा तय रहती है।
  • आमतौर पर यह self-consumption उपभोक्ता बिल में अलग से “LED खर्च” के रूप में नहीं जोड़ा जाता, बल्कि मीटर के डिजाइन का हिस्सा माना जाता है।
  • कुछ देशों में utility इस self-consumption को grid loss/accounting में शामिल करती है।

‘क्रीप टेस्ट’: चोरी और लीकेज पकड़ने की तकनीक

स्मार्ट मीटर में Anti-Creep फीचर होता है। इसका मतलब है कि अगर आपके घर में लोड 10 वॉट से कम है (जैसे सिर्फ मोबाइल चार्जर लगा है या सिर्फ मीटर की अपनी लाइट जल रही है), तो मीटर उसे रिकॉर्ड करना शुरू नहीं करता। यह सुनिश्चित करता है कि जब तक आप कोई उपकरण न चलाएं, बिल न बढ़े।

उपकरणखपत का प्रकारकौन देता है पैसा?
स्मार्ट मीटर LED/चिपइंटरनल लोडबिजली विभाग (कंपनी)
घर का जीरो वॉट बल्बएक्सटर्नल लोडउपभोक्ता (आप)
मोबाइल चार्जर (बिना फोन के)एक्सटर्नल लोडउपभोक्ता (आप)

अक्‍सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1: स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल अचानक क्यों बढ़ गया?

उत्तर: इसके दो मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला, पुराना मीटर मैकेनिकल खराबी के कारण ‘स्लो’ हो गया था। दूसरा, घर की पुरानी वायरिंग में ‘अर्थ लीकेज’ होना, जिसे स्मार्ट मीटर बड़ी सटीकता से पकड़ लेता है।

Q2: क्या स्मार्ट मीटर की डिस्प्ले लाइट रात भर जलने से यूनिट बढ़ती है?

उत्तर: जी नहीं। डिस्प्ले की लाइट मीटर के आंतरिक सर्किट से जुड़ी होती है। इसका बिल उपभोक्ता के खाते में नहीं जुड़ता।

Q3: क्या चिप (SIM) के डेटा ट्रांसफर का पैसा हमें देना होगा?

उत्तर: बिलकुल नहीं। स्मार्ट मीटर जिस तकनीक (GPRS/RF) से डेटा सर्वर पर भेजता है, उसका पूरा खर्च बिजली कंपनी उठाती है।

Q4: अगर मुझे मीटर की रीडिंग पर शक हो तो क्या करूँ?

उत्तर: आप बिजली दफ्तर में आवेदन देकर ‘Check Meter’ लगवा सकते हैं। यह आपके स्मार्ट मीटर के साथ लगकर उसकी सटीकता की जांच करेगा।


प्रस्‍तुत रिपोर्ट वैज्ञानिक मानकों और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सिद्धांतों पर आधारित है। © Chaturpost.com – निष्पक्ष और सटीक समाचार।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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