
रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के करीब साढ़े चार लाख शासकीय सेवकों और पेंशनर्स में महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) को लेकर नाराजगी अब सड़कों पर आने को तैयार है। केंद्र सरकार की तुलना में राज्य के कर्मचारियों को कम डीए मिलने के कारण अब आंदोलन की चिंगारी (Spark of Protest) सुलग उठी है।
दरअसल, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जनवरी 2026 से 58% से बढ़कर 60% हो चुका है। इसके विपरीत (In Contrast), छत्तीसगढ़ के राज्य कर्मचारियों को अभी भी सिर्फ 58% डीए ही मिल रहा है। हालांकि राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में डीए 55% से बढ़ाकर 58% किया था, लेकिन इस बढ़ी हुई दर को छह महीने की देरी से लागू किया गया, जिससे कर्मचारियों को 6 महीने का एरियर्स (Arrears) भी नहीं मिल पाया है।
अफसरों को मिला लाभ, कर्मचारियों के साथ भेदभाव?
कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ जहां राज्य में पदस्थ अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के बड़े अफसरों यानी आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), और आईएफएस (IFS) अधिकारियों को 1 जनवरी 2026 से ही 2% बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता स्वीकृत कर दिया गया है। इसके अलावा बिजली कंपनी, न्यायिक अधिकारियों और उनके कर्मचारियों को भी यह लाभ मिल चुका है। लेकिन, दूसरी तरफ (On the other hand) आम शासकीय सेवकों को इसके लिए तरसाया जा रहा है।
अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है क्योंकि जुलाई 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिर से डीए बढ़ने का समय आ गया है, जिसमें 3% की और बढ़ोतरी की उम्मीद है। लेकिन छत्तीसगढ़ के कर्मचारी अभी जनवरी 2026 के ही हक के लिए तरस रहे हैं। इसके साथ ही पिछले कई वर्षों का लगभग 80 महीने का डीए एरियर्स बकाया (Pending) है। इस भेदभाव के कारण कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हाल ही में पेंशनर्स महासंघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा था, लेकिन कोई ठोस परिणाम (Concrete Result) नहीं निकला।
10 जून को दुर्ग कलेक्ट्रेट के सामने महा-आंदोलन की तैयारी
इस घोर उपेक्षा के खिलाफ छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रांतीय आह्वान पर एक बड़े आंदोलन (Massive Agitation) का बिगुल फूंक दिया है। संघ के नेताओं ने ऐलान किया है कि आगामी 10 जून 2026, दिन बुधवार को भोजनावकाश (लंच टाइम) में पूरे प्रदेश में कलेक्टर्स के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दुर्ग जिले में इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कर्मचारी नेताओं ने एक स्वर में हुंकार भरी है। दुर्ग कलेक्ट्रेट के सामने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को जुटने की अपील की गई है।
कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें (Key Demands)
संघ के प्रांतीय महामंत्री विजय लहरे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप चौहान (बाबा भाई) और जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने निम्नलिखित मांगों को रेखांकित किया है:
- केन्द्र की तिथि से भुगतान: राज्य कर्मचारियों को भी केंद्र सरकार की प्रभावी तिथि (1 जनवरी 2026) से ही 2% बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता तुरंत दिया जाए।
- बकाया एरियर्स का भुगतान: पिछले 6 महीने के एरियर्स के साथ-साथ लंबे समय से लंबित करीब 80 महीने के डीए एरियर्स का तत्काल भुगतान हो।
- भेदभाव का खात्मा: आईएएस/आईपीएस अफसरों की तरह ही तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को भी समान समय पर आर्थिक लाभ मिले।
इन विभागों के संयोजकों ने खोला मोर्चा
इस आंदोलन को हर विभाग का समर्थन मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से कार्यकारी प्रांत अध्यक्ष व्ही. एस. साहू, पशु चिकित्सा विभाग के संयोजक सुरेश कुमार साहू, भू-अभिलेख विभाग के संयोजक दीपक दुबे, और शिक्षा विभाग के संयोजक धर्मेन्द्र देशमुख व सूखेन्द्र देवांगन ने अपनी ताकत झोंक दी है।
इसके साथ ही राजस्व विभाग के संयोजक यशवंत कुमार साहू, लघु वेतन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष मोतीराम खिलाड़ी, आदिम जाति कल्याण विभाग से संजय कुमार साहू और चतुर यादव ने भी संयुक्त रूप से (Jointly) अपील जारी की है। दुर्ग जिला सचिव शिवदयाल घृतलहरे ने कहा कि यह लड़ाई हमारे हक की है और जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती, यह आक्रोश थमेगा नहीं।
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निश्चित रूप से (Consequently), अगर 10 जून के इस सांकेतिक प्रदर्शन के बाद भी साय सरकार ने कोई कड़ा फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज पूरी तरह ठप होने की नौबत आ सकती है।







