
रायपुर। छत्तीसगढ़ में महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) बढ़ने का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों के बीच इसको लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार ने बिजली कंपनी (CSEB) के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए तो 2 प्रतिशत डीए वृद्धि का आदेश जारी कर दिया है, लेकिन बाकी विभागों के कर्मचारी अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
भेदभाव (Discrimination) का लगा आरोप
छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने इस पर ऐतराज जताया है। संघ के प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और प्रवक्ता पंकज पाण्डेय ने कहा कि बिजली विभाग के कर्मियों को 1 जनवरी 2026 से बढ़ी हुई दर पर लाभ मिल रहा है।
दूसरी ओर, राज्य के लाखों अन्य अधिकारी और पेंशनभोगी इस लाभ से वंचित (Deprived) हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह एक ही राज्य के दो अलग-अलग विभागों के बीच स्पष्ट भेदभाव है।
प्रमुख मांगें और नाराजगी के कारण
कर्मचारी संगठन ने सरकार को ‘मोदी की गारंटी’ (Modi’s Guarantee) की याद दिलाई है। उनके अनुसार, चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि राज्य कर्मियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता और एरियर्स (Arrears) दिया जाएगा।
सरकार से सीधी अपील
संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि बिजली कर्मियों की तर्ज पर अन्य सभी विभागों के लिए भी तत्काल 2% डीए और डीआर (Dearness Relief) के आदेश जारी किए जाएं। इससे न केवल कर्मचारियों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि उनके भीतर पनप रहा आक्रोश (Resentment) भी शांत होगा।
इन नेताओं ने उठाई आवाज
डीए की मांग को लेकर आवाज उठाने वालों में प्रमुख नाम शामिल हैं:
- चंद्रशेखर तिवारी (प्रांताध्यक्ष)
- पंकज पाण्डेय (प्रांतीय प्रवक्ता)
- मुकतेश्वर देवांगन और तिलक यादव
- फारुख कादरी और चंदू चंद्राकर
- अर्जुन क्षत्री, एम आर खान और दिलीप तिवारी
निष्कर्ष: क्या ‘मोदी की गारंटी’ होगी पूरी?
छत्तीसगढ़ में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर उपजा यह विवाद अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा प्रशासनिक संवाद (Administrative Communication) बन चुका है। एक ओर जहां बिजली कर्मियों के चेहरों पर मुस्कान है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के लाखों शासकीय सेवक सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
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कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि जब तक ‘समान कार्य-समान भत्ता’ का सिद्धांत लागू नहीं होता, तब तक उनका यह विरोध (Resentment) जारी रहेगा। अब गेंद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पाले में है— क्या सरकार जल्द ही सभी विभागों के लिए खुशियों का ‘पिटारा’ खोलेगी या फिर यह आक्रोश सड़क पर आंदोलन का रूप लेगा?







