
रायपुर, न्यूज डेस्क। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए गठित आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के कामकाज को शुरू हुए छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस बीच, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग एक बार फिर देशव्यापी चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। Moreover (इसके अलावा), वेतन आयोग की बैठकों और विभिन्न विभागों के ज्ञापनों में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है।
However (हालांकि), इस पूरी बहस के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मोड़ आ गया है। सरकारी कर्मचारी यूनियनों (Government Employee Unions) ने भी अब आंतरिक रूप से यह स्वीकार करना शुरू कर दिया है कि वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों में एनपीएस (NPS) को पूरी तरह से रोलबैक (Complete Rollback) करना और शत-प्रतिशत ओपीएस (OPS) पर लौटना सरकार के लिए तकनीकी और प्रशासनिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है।
आखिर क्यों OPS के दीवाने हैं कर्मचारी? समझिए पूरा गणित
कर्मचारी संगठनों का झुकाव पुरानी पेंशन योजना की तरफ क्यों है, इसे समझने के लिए दोनों व्यवस्थाओं के अंतर को जानना जरूरी है। पुरानी पेंशन योजना यानी OPS (Old Pension Scheme) भारत सरकार द्वारा पूरी तरह से फंडेड एक सेवानिवृत्ति योजना (Retirement Plan) है, जो कर्मचारियों को जीवनभर के लिए एक निश्चित मासिक पेंशन की गारंटी (Guaranteed Pension) देती है।
इसके तहत, रिटायर होने वाले कर्मचारी को उसके अंतिम मूल वेतन (Last Drawn Salary) का सीधा 50 प्रतिशत और उसके साथ महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) जोड़कर पेंशन के रूप में दिया जाता है। Consequently (इसके परिणामस्वरूप), यह योजना रिटायर्ड कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच (Inflation Protection) और सामाजिक सुरक्षा (Social Security) प्रदान करती है।
NPS की कड़वी सच्चाई
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने सरकार को सौंपे गए अपने ताजा ज्ञापन (Memorandum) में एक बेहद डरावना दावा किया है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान एनपीएस (National Pension System) पूरी तरह से मार्केट-लिंक्ड (Market-Linked) है, जिसमें किसी भी प्रकार की निश्चित न्यूनतम पेंशन की गारंटी नहीं होती।
क्यों नामुमकिन लग रहा है OPS में पूरी तरह लौटना? तकनीकी पेंच समझिए
लगभग दो दशकों (20 साल) से पूरे देश में एनपीएस व्यवस्था लागू है। इस लंबी अवधि के दौरान कर्मचारियों और सरकार दोनों के योगदान को मिलाकर सिस्टम में 16.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का भारी-भरकम फंड जमा हो चुका है। Therefore (इसलिए), अब इस व्यवस्था को अचानक पूरी तरह से बंद (Scrap) करना और ओपीएस पर लौटना सरकार के लिए भारी वित्तीय लागत (Significant Financial Costs) और जटिल प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी कर रहा है।
यह विशालकाय एनपीएस कॉपर्स (NPS Corpus) देश की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं जैसे एलआईसी (LIC), एसबीआई (SBI), यूटीआई (UTI) और अन्य सरकारी वित्तीय निकायों के माध्यम से बाजार में निवेश किया गया है।
एक्सपर्ट टॉक (Expertise & Trust): ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन और ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल ने इस तकनीकी समस्या को समझाते हुए मीडिया से कहा, “अगर इस 16.5 लाख करोड़ रुपए की विशाल धनराशि को अचानक बाजार से वापस निकाला जाता है, तो सबसे पहले तो यह प्रशासनिक रूप से बेहद कठिन है क्योंकि यह पैसा अलग-अलग लंबी अवधि के निवेशों में फंसा है। दूसरी बात, इस अचानक निकासी से उस पैसे की वास्तविक वैल्यू (Value of Money) भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।”
डॉ. पटेल ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एनपीएस को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है, तो वित्तीय बाजारों में निवेश का यह निरंतर प्रवाह (Investment Flow) रुक जाएगा। As a result (इसके कारण), बाजार की लिक्विडिटी (Liquidity) और देश के बड़े वित्तीय संस्थानों की साख पर इसका बेहद नकारात्मक असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यूनियनें भी अब बीच का कोई सुरक्षित रास्ता निकालने की वकालत कर रही हैं।
6 महीने पूरे कर चुका 8th CPC: 1.15 करोड़ लोगों पर होगा सीधा असर
पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश (Former Supreme Court Justice) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित आठवें वेतन आयोग (8th CPC) ने नवंबर 2025 में अपनी प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब छह महीने का सफर पूरा कर लिया है। इस उच्च स्तरीय आयोग में पूर्व आईएएस पंकज जैन बतौर सदस्य-सचिव (Member-Secretary) और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष वित्तीय विशेषज्ञ के रूप में शामिल हैं, जो इस आयोग को अत्यधिक प्रामाणिकता (Authoritativeness) प्रदान करते हैं।
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In conclusion (निष्कर्ष के तौर पर), आठवें वेतन आयोग के निर्णय से देश के कुल 1.15 करोड़ से अधिक परिवार सीधे प्रभावित होने वाले हैं। अब जबकि पूर्ण ओपीएस बहाली की राह में आर्थिक रोड़े साफ नजर आ रहे हैं, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि आयोग एनपीएस के भीतर ही न्यूनतम 50% गारंटीकृत पेंशन का एक नया हाइब्रिड मॉडल (Unified Pension Scheme जैसी व्यवस्था) सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।







