कर्मचारी हलचल

छत्तीसगढ़ में बिजली कंपनियों के निजीकरण की तैयारी? बिना चर्चा CSPTCL का IPO लाने पर अभियंता संघ ने CM के सामने जताई आपत्ति

रायपुर।  छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत अभियंता संघ (Chhattisgarh State Power Engineers Association) ने राज्य सरकार के सामने अपनी बेहद महत्वपूर्ण और लंबित मांगें रख दी हैं, जिससे आने वाले दिनों में बिजली कंपनी की राजनीति गरमाने के पूरे आसार हैं।

दरअसल, अभियंताओं के इस कड़े रुख के पीछे सबसे बड़ा कारण बिजली कंपनियों के निजीकरण (Privatization) की आशंका को माना जा रहा है। संघ के महासचिव (General Secretary) डॉ. मनोज वर्मा ने मीडिया को बताया कि इन ज्वलंत मुद्दों पर संघ के अध्यक्ष राजेश पाण्डेय के नेतृत्व में केंद्रीय कार्यकारिणी समिति (CEC) की एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी। इस गहन चर्चा (Detailed Discussion) के बाद प्रबंधन स्तर पर लगातार पत्राचार और संवाद की प्रक्रिया जारी है।

IPO लाने से गहराया निजीकरण का डर (The Privatization Dispute)

इसके अलावा (Furthermore), सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब प्रदेश सरकार ने एसोसिएशन से किसी भी प्रकार की चर्चा (Consultation) किए बिना ही ट्रांसमिशन कंपनी का आईपीओ (IPO) लाने का फैसला कर लिया। डॉ. मनोज वर्मा ने सीधे तौर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के इस कदम से विभाग में निजीकरण की आशंका बहुत ज्यादा गहरा गई है।

इस बीच, ऊर्जा सचिव और चेयरमैन स्तर के अधिकारियों के साथ भी संघ की महत्वपूर्ण चर्चाएं हुई हैं, जहां से कुछ सकारात्मक संकेत (Positive Signals) भी मिले हैं।

दिल्ली के छत्तीसगढ़ सदन में CM विष्णु देव साय से मुलाकात

इसी क्रम में (In continuation), अभियंताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पहले भी 21 फरवरी और 29 मई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर विभिन्न मांगों पर चर्चा कर चुका था। हालांकि (However), विषय की गंभीरता को देखते हुए बुधवार, 10 जून को नई दिल्ली स्थित ‘छत्तीसगढ़ सदन’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से डॉ. मनोज वर्मा ने पुनः भेंट की।

इस बैठक (Emergency Meeting) में ट्रांसमिशन कंपनी के आईपीओ (IPO) सहित तमाम प्रमुख विषयों पर अभियंताओं ने अपनी गंभीर चिंताएं मुख्यमंत्री के समक्ष मजबूती से रखीं। राहत की बात यह रही कि मुख्यमंत्री साय ने अभियंताओं की इन मांगों को बेहद गंभीरता से सुना और इस पर सकारात्मक विचार (Positive Approach) व्यक्त किए हैं।

इंजीनियरों की प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा संघ

संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। इन मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS): कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ओपीएस को पूर्णतः लागू रखना।
  • फैमिली पेंशन और तकनीकी भत्ता: फैमिली पेंशन के नियमों में सुधार और तकनीकी भत्ते (Technical Allowance) को बढ़ाना।
  • टीए-डीए दरों में संशोधन: महंगाई के दौर में टीए-डीए (TA-DA Rates) की पुरानी दरों में तत्काल संशोधन।
  • वेतन पुनरीक्षण समिति का गठन: वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए तत्काल समिति गठित करने की मांग।
  • निजीकरण पर पूर्ण रोक: ट्रांसमिशन कंपनी के बिना सहमति लाए गए आईपीओ (IPO) का विरोध और निजीकरण की कोशिशों को रोकना।

सुशासन तिहारके बाद होगी निर्णायक बैठक (The Final Roadmap)

अंततः (Ultimately), विभागीय स्तर पर गतिरोध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। ऊर्जा सचिव और चेयरमैन के साथ हुई प्राथमिक बातचीत के अनुसार, राज्य में आगामी ‘सुशासन तिहार’ (Sushasan Tihar) के आयोजन के तुरंत बाद इस पूरे मामले पर एक विस्तृत और निर्णायक बैठक (Detailed Meeting) आयोजित करने पर सहमति बन गई है।

अब देखना यह होगा कि दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिले आश्वासन के बाद क्या छत्तीसगढ़ का बिजली कंपनी अभियंताओं को राहत देता है, या फिर यह विवाद आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का रूप अख्तियार कर लेगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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