
रायपुर (chaturpost.com)। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग (Education Department) में अब बरसों पुराना ढर्रा और ‘साहब’ की मर्जी वाला खेल हमेशा के लिए बंद होने जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने राज्य की पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए एक ऐसा डिजिटल हंटर चलाया है, जिसने पूरे महकमे में खलबली मचा दी है। शासन द्वारा जारी कड़े और आधिकारिक निर्देश (Official Order) के मुताबिक, आगामी 16 जून 2026 से सभी शासकीय स्कूलों और कार्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति (Online Attendance) और ऑनलाइन अवकाश व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
इस नए आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि जो भी कर्मचारी इस डिजिटल चक्रव्यूह (Digital System) का पालन नहीं करेगा, उसकी जून महीने की सैलरी (Salary Hold) सीधे रोक दी जाएगी। साफ संदेश है—”अंगूठा नहीं लगा, तो इस बार जेब खाली रहेगी।”
क्यों उड़े हैं लापरवाहों के होश? (The Core Impact)
इस कड़े आदेश के बाद राज्य के उन शिक्षकों और बाबुओं में हड़कंप मच गया है, जो अब तक दूरदराज के ग्रामीण या वनांचल क्षेत्रों में सिर्फ कागजों पर ‘ऑफलाइन हाजिरी’ दिखाकर महीनों दफ्तर या स्कूल से नदारद रहते थे। सरकार ने भ्रष्टाचार और लेटलतीफी की ऐसी सभी खिड़कियों को एक साथ बंद करने के लिए दो अलग-अलग कड़े डिजिटल माध्यम (Digital Media) तय किए हैं:
1. स्कूलों के लिए ‘VSK App’ (विद्या समीक्षा केंद्र)
प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में पदस्थ प्राचार्यों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की दैनिक उपस्थिति अब विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए दर्ज की जाएगी। यह ऐप लोकेशन ट्रैकिंग पर काम करता है, जिससे कोई भी घर बैठे फर्जी हाजिरी नहीं लगा पाएगा।
2. दफ्तरों के लिए ‘AEBAS’ (आधार सक्षम बायोमेट्रिक)
कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और बाबुओं की लेटलतीफी पर लगाम कसने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के तहत आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) को अनिवार्य किया गया है। अब बिना अंगूठा लगाए दफ्तर में एंट्री मान्य नहीं होगी।
कागजी छुट्टी पर कम्प्लीट बैन: मनमर्जी करने वाले अफसर भी नपेंगे
अक्सर देखने में आता था कि कोई कर्मचारी बिना सूचना के गायब रहता था और पकड़े जाने पर बैक-डेट में पुराना कागज (Offline Application) तैयार कर अधिकारी से सांठगांठ कर लेता था। संचालनालय ने इस ‘ऑफलाइन जुगाड़’ को अब पूरी तरह से प्रतिबंधित (Completely Banned) कर दिया है।
अब आकस्मिक अवकाश (CL) हो या कोई अन्य छुट्टी, सब कुछ केवल ‘HRMIS पोर्टल’ के माध्यम से ही ऑनलाइन एप्लाई और मंजूर करनी होगी। आदेश में सख्त लहजे में कहा गया है कि यदि किसी अधिकारी ने किसी भी कर्मचारी का ऑफलाइन आवेदन स्वीकार या मंजूर किया, तो उन मनमर्जी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) की जाएगी।
🚨 नियम न मानने पर क्या होगा? (Strict Actions & Consequences)
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के इस नए डिजिटल चक्रव्यूह को तोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वालों के लिए बेहद कड़े दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं:
- शून्य उपस्थिति (Zero Attendance): यदि 16 जून 2026 से किसी भी कर्मचारी या शिक्षक की हाजिरी VSK App या बायोमेट्रिक प्रणाली (AEBAS) में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसे सीधे अनुपस्थित (Absent) मानकर उसकी उपस्थिति शून्य कर दी जाएगी।
- जून महीने का वेतन रुकेगा (Salary Hold): डिजिटल सिस्टम में उपस्थिति दर्ज न होने की स्थिति में संबंधित लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी का जून माह का वेतन (Salary) जारी नहीं किया जाएगा।
- DDOs पर होगी सीधी कार्रवाई: यदि बिना ऑनलाइन अटेंडेंस और ऑनलाइन लीव अप्रूवल के किसी आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) ने वेतन जारी किया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी होगी और उन पर वित्तीय अनियमितता के तहत सख्त गाज गिरेगी।
क्या मैदानी स्तर पर सफल होगी यह व्यवस्था? (The Real Challenge)
लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के सभी संयुक्त संचालकों (JDs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और आहरण व संवितरण अधिकारियों (DDOs) को पत्र जारी कर इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। हालांकि, इस नियम के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में एक व्यावहारिक चुनौती भी सामने आ सकती है। छत्तीसगढ़ के कई अंदरूनी इलाकों और बस्तर-सरगुजा के वनांचल में आज भी इंटरनेट नेटवर्क (Network Issues) एक बड़ी समस्या है। ऐसे में शिक्षक संगठनों की ओर से यह आवाज उठ सकती है कि जहां मोबाइल नेटवर्क ही नहीं पकड़ता, वहां ऑनलाइन हाजिरी कैसे लगेगी?
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बहरहाल, साय सरकार का यह फैसला शिक्षा विभाग की छवि सुधारने और स्कूलों में समय पर पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है। अब देखना यह है कि 16 जून को कितने शिक्षकों का वेतन बचता है और कितनों पर गाज गिरती है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों और कर्मचारियों से जुड़ी हर बारीक खबर के लिए पढ़ते रहिए chaturpost.com।







