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Chhattisgarh Fire Safety: CG कोचिंग और अस्पतालों को 7 दिन का ‘अल्टीमेटम’, नियमों में लापरवाही तो अब खैर नहीं, मांगी रिपोर्ट

रायपुर। लखनऊ, दिल्ली और ग्रेटर नोएडा जैसे महानगरों में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांडों (Fire Incidents) ने पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं में हुई व्यापक जन-धन की हानि को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी संस्थागत और वाणिज्यिक भवनों के लिए Fire Safety Guidelines जारी कर दी हैं। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा मानकों (Safety Standards) के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

7 दिन का अल्टीमेटमऔर निरीक्षण अभियान

शासन ने राज्य के सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले कोचिंग संस्थान, शैक्षणिक भवन, लाइब्रेरी, हॉस्टल, होटल और नर्सिंग होम्स का तत्काल व्यापक Inspection करें। इस निरीक्षण प्रक्रिया को आगामी 7 दिनों के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है। यदि किसी संस्थान में खामियां पाई जाती हैं, तो उन्हें दुरुस्त करने के लिए कहा जाएगा। यदि संस्थान इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेता है, तो जनहित में ऐसे भवनों/संस्थानों को तुरंत बंद (Seal) करने की कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल‘ (Detailed Safety Measures)

सरकार ने आगजनी के खतरों को न्यूनतम करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका अनुपालन ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984’ के तहत अनिवार्य है:

  • विद्युत् सुरक्षा (Electrical Safety & Auditing): भवनों में लगे सभी उपकरणों की जाँच किसी सक्षम एजेंसी से करवाना अनिवार्य है। वायरिंग की स्थिति दुरुस्त होनी चाहिए और ढीले तारों से होने वाली शार्ट सर्किट की संभावना को खत्म करना होगा। इसके अलावा, ELCB, MCB और अर्थिंग सिस्टम की कार्यक्षमता की नियमित जाँच करें।
  • एसी (Air Conditioner) रखरखाव: वातानुकूलित उपकरणों की वायरिंग और उनके सिस्टम की समय-समय पर अनिवार्य सर्विसिंग सुनिश्चित करें, ताकि ओवरहीटिंग न हो।
  • अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher Protocol): सभी भवनों में ABC प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर आसानी से पहुँच वाली ऊंचाई पर होने चाहिए। इनका मासिक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रेशर गेज हरे निशान पर हो। एक्सपायर हो चुके यंत्रों को तत्काल बदला जाए।
  • अग्नि शमन प्रणालियाँ (Advanced Systems): स्प्रिंकलर, अलार्म सिस्टम और स्मोक डिटेक्टर का निरंतर परीक्षण करें। आपातकालीन पावर सिस्टम और वाटर पंप का पर्याप्त दबाव (Pressure) के साथ काम करना सुनिश्चित करें।
  • निकास और गलियारे (Exit & Egress): बिल्डिंग के निकास द्वार पर्याप्त बड़े होने चाहिए। गलियारे, सीढ़ियाँ और निकास मार्ग पूरी तरह खाली रखें। हर निकास द्वार पर चमकने वाले ‘EXIT’ बोर्ड लगाएं। पैनिक बार युक्त दरवाजे इस्तेमाल करें ताकि भीड़भाड़ (Stampede) की स्थिति न बने।

बेसमेंट और वेंटिलेशन: नियमों का दायरा

नगरीय प्रशासन विभाग ने विशेष रूप से बेसमेंट के उपयोग को लेकर चिंता जताई है। ‘छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984’ के नियम-73 के अनुसार, बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग, स्ट्रॉन्ग रूम, रेडिएशन कक्ष या मशीनरी के लिए ही किया जा सकता है। इन कार्यों के अतिरिक्त, वहां किसी भी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री का भंडारण करना अवैध है। साथ ही, नियम-79 के तहत भवनों में वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था अनिवार्य है, ताकि आपातकालीन स्थिति में दम घुटने (Suffocation) जैसी स्थिति पैदा न हो।

लिफ्ट के उपयोग में सावधानी

बहुमंजिला भवनों में लिफ्ट का उपयोग करना अक्सर जानलेवा साबित होता है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी लिफ्टों के आने-जाने वाले द्वारों पर स्पष्ट हिंदी में सूचना चस्पा करें कि आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का उपयोग न करें

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यह सरकारी आदेश संस्थानों को एक ‘चेतावनी’ की तरह है। अब सभी जिम्मेदारों को स्वयं आगे बढ़कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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