
OBC Survey रायपुर। छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान बड़ी संख्या में डेटा एंट्री संबंधी त्रुटियां सामने आई हैं। इन गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UADD) ने सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि OBC Survey के लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की गई जानकारियों की समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आई हैं। ऐसे में सर्वेक्षण की विश्वसनीयता और डेटा की शुद्धता बनाए रखने के लिए सभी निकायों को रिकॉर्ड का पुनः सत्यापन करने को कहा गया है।
कोरबा का उदाहरण
विभाग की तरफ से निकायों को भेजे गए पत्र में कोरबा जिला का एक उदाहरण दिया गया है, जिसमें परिवार की महिला मुखिया की आयु 55 वर्ष दर्शाया गया। उनके तीन बच्चे हैं, लेकिन पति की उम्र केवल 21 वर्ष है। इसी तरह परिवार के सभी सदस्य को अशिक्षित और बेरोजगार दर्शाया गया है।
आय और उम्र के आंकड़ों में मिला बड़ा अंतर
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि अनेक परिवारों में मुखिया और उनके पति-पत्नी की दर्ज आयु तथा विवाह के समय की आयु के बीच काफी विरोधाभास दिखाई दे रहा है। इससे सर्वे डेटा की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Meanwhile, अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों की दोबारा जांच कर सही जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जाए।
शिक्षा संबंधी जानकारी अधूरी दर्ज
सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में परिवारों के सदस्यों को अशिक्षित दर्शाया गया है। जबकि यदि किसी व्यक्ति को शिक्षित बताया जाता है तो विद्यालय में प्रवेश वर्ष, स्कूल का प्रकार, शैक्षणिक योग्यता और पढ़ाई जारी रहने जैसी अनिवार्य जानकारियां दर्ज नहीं की गई हैं।
Furthermore, विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधूरी प्रविष्टियां स्वीकार नहीं की जाएंगी और सभी विवरण पूर्ण रूप से दर्ज किए जाने चाहिए।
रोजगार और आर्थिक स्थिति के कॉलम भी संदिग्ध
समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई परिवारों में या तो किसी भी सदस्य को कामकाजी नहीं बताया गया है या केवल एक व्यक्ति को ही रोजगारयुक्त दर्शाया गया है।
जबकि सर्वे फॉर्म में रोजगार, व्यवसाय, मजदूरी, वार्षिक आय और पारिवारिक व्यवसाय जैसी जानकारियां अनिवार्य हैं। अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में इन कॉलमों को सही ढंग से नहीं भरा गया।
आरक्षण लाभ और जाति प्रमाण पत्र की जानकारी भी अधूरी
विभाग ने पाया कि शिक्षा या नौकरी में आरक्षण से मिलने वाले लाभ तथा जाति प्रमाण पत्र संबंधी कॉलम में बड़ी संख्या में “कोई लाभ नहीं” दर्ज किया गया है।
However, कई मामलों में वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है। इसलिए रिकॉर्ड का पुनः सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
महत्वपूर्ण गड़बड़ियां एक नजर में
आयु और विवाह संबंधी आंकड़ों में विरोधाभास
शिक्षा संबंधी विवरण अधूरा
रोजगार और वार्षिक आय की गलत प्रविष्टियां
भूमि और संपत्ति का विवरण अधूरा
सरकारी योजनाओं के लाभ की जानकारी अपूर्ण
जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण लाभ का गलत रिकॉर्ड
भूमि और संपत्ति का रिकॉर्ड भी सवालों में
विभागीय जांच में यह भी पाया गया कि अनेक परिवारों ने भूमि स्वामित्व वाले कॉलम में “नहीं” दर्ज किया है, जबकि अन्य विवरणों से संपत्ति होने के संकेत मिल रहे हैं।
इसी तरह चल एवं अचल संपत्ति संबंधी जानकारी भी कई मामलों में खाली छोड़ दी गई है। इससे सर्वेक्षण के आर्थिक विश्लेषण पर असर पड़ सकता है।
सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का डेटा भी गलत
सर्वे में बड़ी संख्या में परिवारों के लिए केवल राशन कार्ड का लाभ दर्ज किया गया है। जबकि कई परिवार आवास, पेंशन, ऋण अनुदान और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।
Therefore, विभाग ने वास्तविक स्थिति के अनुसार रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
परिवारों से संपर्क कर सुधार करने के निर्देश
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया है कि वे सर्वे प्रपत्र के 54 बिंदुओं के अनुसार प्रत्येक परिवार की जानकारी का पुनः सत्यापन करें। यदि किसी परिवार की जानकारी अधूरी है तो संबंधित परिवार से संपर्क कर फॉर्म पूर्ण कराया जाए और उसके बाद ही ऑनलाइन पोर्टल पर अंतिम एंट्री की जाए।
अधिकारियों का कहना है कि सही और प्रमाणिक डेटा के आधार पर ही OBC वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक आकलन संभव हो सकेगा। इसी कारण विभाग ने त्रुटियों को तत्काल दूर करने पर जोर दिया है।
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