कर्मचारी हलचल

बिजली कंपनी की धमकी पर भड़के संविदा कर्मचारी: बड़ी बैठक के बाद सामूहिक इस्तीफे की दी चेतावनी

रायगढ़: छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज (State Power Companies) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों (Contract Employees) के नियमितीकरण (Regularization) की मांग को लेकर प्रदेश में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक और राजनैतिक भूचाल आने वाला है। प्रबंधन द्वारा आंदोलन को दबाने के लिए दी जा रही सेवा समाप्ति (Termination) की धमकियों के विरोध में आज ‘छ.ग. संविदा कर्मचारी संघ-722’ (रायगढ़ सर्कल) की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन समीक्षा बैठक (Emergency Review Meeting) संपन्न हुई।

रविवार को रायगढ़ सर्कल के अंतर्गत आने वाले उल्दा स्थित विष्णु मंदिर प्रांगण में आयोजित इस महाबैठक में सैकड़ों संविदा कर्मियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कर्मचारियों के भीतर प्रबंधन की तानाशाही नीतियों को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वे अब पीछे नहीं हटेंगे और आगामी 1 जुलाई 2026 से नया रायपुर के तुता धरना स्थल पर शुरू हो रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन (Indefinite Protest) को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देंगे।

प्रबंधन के ‘शो-कॉज और सेवा समाप्ति’ लेटर पर कानूनी समीक्षा

इस आपातकालीन बैठक (Crisis Meeting) के दौरान सबसे गंभीर और लंबी चर्चा उस दमनकारी नीति पर हुई, जिसके तहत बिजली कंपनी प्रबंधन आंदोलनकारी कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause Notice) और ‘सेवा समाप्ति पत्र’ थमा रहा है। संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों (Legal Experts) ने इन सभी नोटिसों की बारीकी से समीक्षा की।

समीक्षा के बाद संघ ने एक बेहद मजबूत और तार्किक स्टैंड लिया है। संघ का स्पष्ट रुख है कि जब नियमितीकरण और कर्मचारियों से जुड़ा यह पूरा मामला श्रम विभाग (Labour Department) के समक्ष प्रक्रियाधीन (Pending) है, तब प्रबंधन द्वारा ऐसा कोई भी एकतरफा दमनकारी कदम उठाना पूरी तरह से गैर-कानूनी (Illegal) है। यह देश के औद्योगिक नियमों (Industrial Rules) का खुला उल्लंघन है। बिजली विभाग के संविदा कर्मियों ने साफ कर दिया है कि वे प्रबंधन की इन खोखली धमकियों के आगे घुटने टेकने के बजाय, इसका डटकर मुकाबला देश के मजबूत श्रम कानूनों (Labour Laws) की ताकत से करेंगे।

Contract Employees

समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए 4 ऐतिहासिक निर्णय

आंदोलन को हर हाल में मुकाम तक पहुंचाने और प्रबंधन के खिलाफ एक अभेद्य ‘कानूनी सुरक्षा कवच’ (Legal Shield) तैयार करने के लिए रायगढ़ सर्कल की इस महाबैठक में 4 बड़े और कड़े फैसले लिए गए हैं:

1. शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का अक्षरशः पालन: नियमितीकरण (Regularization) की इस अंतिम और निर्णायक लड़ाई में प्रांतीय संघ द्वारा समय-समय पर जारी होने वाले आगामी सभी निर्देशों का रायगढ़ सर्कल का एक-एक कर्मचारी पूरी निष्ठा के साथ पालन करेगा।

2. अवैध सेवा समाप्ति के खिलाफ कानूनी जंग: प्रबंधन द्वारा बदले की भावना से की जाने वाली किसी भी अवैध सेवा समाप्ति की कार्रवाई का जवाब देने के लिए संघ श्रम न्यायालय (Labour Court), औद्योगिक नियमों और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के वैधानिक तर्कों का सहारा लेगा और कानूनी सुरक्षा कवच (Legal Shield) के तहत लड़ाई लड़ेगा।

3. अटूट एकता और अनवरत संघर्ष: प्रबंधन की “फूट डालो और राज करो” की नीति (Divide and Rule Policy) को विफल करने के लिए सभी संविदा साथियों के बीच आपसी विश्वास, अभेद्य एकता और संघर्ष की भावना को हर परिस्थिति में बरकरार रखा जाएगा।

4. अंतिम विकल्प के रूप में सामूहिक इस्तीफा‘: यदि प्रबंधन ने अपनी तानाशाही नीतियां बंद नहीं कीं और किसी भी संविदा कर्मचारी के भविष्य से खिलवाड़ करने की कोशिश की, तो रायगढ़ सर्कल के समस्त तकनीकी व गैर-तकनीकी संविदा कर्मचारी एक साथ ‘सामूहिक इस्तीफा’ (Mass Resignation) सौंपकर पूरी विद्युत व्यवस्था को ठप (Power Grid Blackout) करने से पीछे नहीं हटेंगे।

“एक संघ, एक मत” के संकल्प से गूंज उठा उल्दा

इस महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बैठक का सफल नेतृत्व रायगढ़ सर्कल के अध्यक्ष श्री नंद कुमार मरकाम एवं महामंत्री श्री भागवत चंद्रा ने किया। दोनों ही नेताओं ने अपने संबोधन में कर्मचारियों में जोश भरते हुए कहा कि संविदा कर्मियों का शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार और प्रबंधन को यह समझना होगा कि बिना संविदा कर्मचारियों के बिजली कंपनियों का सुचारू रूप से चलना नामुमकिन है।

बैठक के समापन पर सर्कल के सभी प्रमुख सदस्यों और सैकड़ों संविदा साथियों ने एक सुर में एक संघ, एक मत” का गगनभेदी नारा लगाया। इस गूंज के साथ ही सभी ने आगामी 1 जुलाई से नया रायपुर के तुता मैदान में अपनी पूरी ताकत झोंकने और एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई (Do or Die Battle) लड़ने पर अपनी अटूट सहमति और प्रतिबद्धता जताई।

क्यों बैकफुट पर आ सकती है बिजली कंपनी?

छत्तीसगढ़ में संविदा कर्मचारियों (Contract Employees) का यह आंदोलन अब तक का सबसे बड़ा संकट बन सकता है। बिजली विभाग एक अत्यंत संवेदनशील और आवश्यक सेवा (Essential Service) है। यदि तकनीकी संविदा कर्मचारी सामूहिक इस्तीफे (Mass Resignation) जैसे आत्मघाती कदम की ओर बढ़ते हैं, तो पूरे छत्तीसगढ़ में बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा सकती है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

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प्रबंधन द्वारा जारी किए जा रहे सेवा समाप्ति के नोटिस अक्सर कानूनी मोर्चे पर टिक नहीं पाते हैं, विशेषकर तब जब विवाद पहले से ही श्रम विभाग (Industrial Dispute) के पास लंबित हो। संघ ने इस बार सीधे तौर पर ‘कानूनी सुरक्षा कवच’ और ‘सामूहिक इस्तीफे’ की रणनीति अपनाकर बिजली कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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