
रायपुर: छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति को लेकर सियासत और अर्थशास्त्र दोनों के गलियारों में हलचल तेज है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों ने राज्य सरकार की राजकोषीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2026 में राज्य का ‘आंतरिक ऋण’ (Internal Debt) 1,329,641 मिलियन (1.32 लाख करोड़ रुपये) के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
आंकड़ों का आईना: कर्ज का ‘बढ़ता’ ग्राफ
पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक है। 2025 में यह आंकड़ा ₹1,14,324 करोड़ था, जो एक साल के भीतर बढ़कर 1.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी मात्र 12 महीनों में सरकार पर 18,640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
यदि तुलनात्मक दृष्टि से देखें, तो 2013 में यह कर्ज महज 9,420 करोड़ रुपये था। आज यह 14 गुना अधिक है।
| अवधि (समय) | राज्य का कुल आंतरिक ऋण (लगभग) |
| 2013 | ₹9,420 करोड़ |
| 2023 (पिछली सरकार का अंत) | ₹91,000 करोड़ |
| 2026 (जून वर्तमान) | ₹1,32,964 करोड़ |
हर महीने 2,000 करोड़ का कर्ज, फिर भी पेंशन अटकी
सरकार की कर्ज लेने की गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2026 से जून 2026 के बीच ही सरकार RBI के माध्यम से बाजार से 6,000 करोड़ रुपये का ऋण ले चुकी है। हर महीने 2,000 करोड़ की यह उधारी जनता के बीच चर्चा का विषय है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अकबर का कहना है कि राज्य की विभिन्न सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली पेंशन का भुगतान महीनों से अटका हुआ है। सवाल यह है कि यदि सरकार हर महीने हजारों करोड़ का कर्ज ले रही है, तो आम जनता की पेंशन के लिए पैसा क्यों नहीं है?
पिछले तीन महीने में सरकार ने आरबीआई से कब-कब लिया कर्ज
| तारीख | राशि (करोड़ रुपए) |
| 13 अप्रैल 2026 | 1000 |
| 28 अप्रैल 2026 | 1000 |
| 12 मई 2026 | 1000 |
| 26 मई 2026 | 1000 |
| 09 जून 2026 | 1000 |
| 23 जून 2026 | 1000 |
प्रशासनिक सुस्ती और ‘तबादला नीति’ का पेच
वित्तीय तंगी की इन चर्चाओं के बीच, सरकार द्वारा अब तक तबादला नीति (Transfer Policy) जारी न करना और प्रतिबंध न हटाना प्रशासनिक बेपरवाही के रूप में देखा जा रहा है। जानकार इसे वित्तीय मितव्ययिता (Financial Austerity) से जोड़कर देख रहे हैं। चर्चा है कि सरकार प्रशासनिक फेरबदल के दौरान होने वाले खर्चों से बचने के लिए अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है।
क्या कहती है अर्थशास्त्र की दृष्टि?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज लेना विकास के लिए बुरा नहीं है, बशर्ते वह पूंजीगत व्यय (Infrastructure) में लगे। लेकिन जब कर्ज का उपयोग केवल ‘राजस्व व्यय’ (वेतन, भत्ते और पेंशन) को पूरा करने के लिए किया जाने लगे, तो यह राज्य को ‘डेट ट्रैप’ (कर्ज के जाल) की ओर धकेलता है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल:
चतुरपोस्ट यह सवाल उठाता है कि आखिर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में आए इस भारी उछाल के पीछे के कारण क्या हैं? क्या सरकार इस कर्ज के बोझ का कोई श्वेत-पत्र जारी करेगी? या फिर विकास कार्यों के नाम पर लिया जा रहा यह कर्ज केवल पुरानी देनदारियों को ढोने का जरिया बनकर रह गया है?
नोट: यह आंकड़े RBI की रिपोर्ट और CEIC के आधिकारिक डेटाबेस से लिए गए हैं।
एडिटर की सलाह: इस खबर के साथ आप RBI का वह ग्राफ (2013 से 2026 तक का) जरूर लगाएं। साथ ही, मोहम्मद अकबर के पत्र की एक फोटो और विधानसभा या मंत्रालय की एक प्रतीकात्मक (Symbolic) तस्वीर का उपयोग करें। यह आपकी रिपोर्ट की विश्वसनीयता को कई गुना बढ़ा देगा।






