
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC – Chhattisgarh State Electricity Regulatory Commission) ने राज्य की बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) को एक करारा झटका (Big Blow) दिया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि बिजली कंपनी की अपनी लापरवाही, आगजनी (Fire Incidents), चोरी और संसाधनों के दुरुपयोग से हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की भरपाई आम जनता की जेब से नहीं की जाएगी।
नियामक आयोग ने दूरदर्शिता दिखाते हुए जनहित (Public Interest) में बिजली दरों में बढ़ोतरी (Electricity Tariff Hike) के उस विवादित प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज (Rejected) कर दिया है, जिसके तहत कंपनी अपने ₹66.57 करोड़ के घाटे का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना चाहती थी। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और आयोग ने अपने फैसले में क्या सख्त टिप्पणियां की हैं।
क्या है पूरा मामला? (The Core Issue of CSPDCL Loss)
दरसअल, 15 जून 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ आदेश (Tarif Order) जारी किया गया था। इस दौरान छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने नियामक आयोग के सामने एक अजीबोगरीब अनुरोध (Request) रखा। बिजली कंपनी ने कुल ₹658.32 करोड़ की भारी-भरकम राशि को ‘असाधारण खर्च’ (Extraordinary Expenses) के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।
कंपनी का तर्क था कि यह नुकसान विभिन्न अप्रत्याशित हादसों और अन्य कारणों से हुआ है, इसलिए इसे टैरिफ (बिजली दरों) में शामिल करके इसकी वसूली ग्राहकों से करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, जब नियामक आयोग ने इन आंकड़ों की गहराई से समीक्षा (Review) की, तो कंपनी के दावों की हवा निकल गई।
फैक्ट फाइल: कहाँ कितना हुआ नुकसान? (Loss Breakdown)
पॉवर कंपनी ने जिन नुकसानों का हवाला देकर Electricity Tariff Hike की मांग की थी, उनका लेखा-जोखा कुछ इस प्रकार है:
- रायपुर के गुढ़ियारी स्थित क्षेत्रीय भंडार (Regional Store): अप्रैल 2024 में यहाँ शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लगी थी। इस अग्निकांड में सैकड़ों ट्रांसफार्मर, केबल और कीमती उपकरण जलकर खाक हो गए थे। इससे कंपनी को ₹50.22 करोड़ का नुकसान हुआ।
- भिलाई स्टोर (Bhilai Store Fire): भिलाई, रायगढ़ और कोरबा में हुई आगजनी की घटनाओं में कंपनी को ₹13.40 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा।
- अन्य प्राकृतिक घटनाएँ (Natural Calamities): अन्य विभिन्न वजहों से ₹2.95 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया।
- रेलवे से जुड़ा विवादित मामला (Railway Dispute): इसके अलावा रेलवे से जुड़ा ₹591.75 करोड़ का एक बड़ा क्लेम भी शामिल था।
इस प्रकार आग, चोरी और कुप्रबंधन से जुड़ा कुल नुकसान ₹66.57 करोड़ था, जिसे सीधे तौर पर जनता के बिल में जोड़ने की तैयारी थी।
लापरवाही बिजली कंपनी की, तो उपभोक्ता क्यों दें पैसा?
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने कंपनी प्रशासन से एक सीधा और तीखा सवाल पूछा कि:
“जिन सामग्रियों और पावर ट्रांसफार्मरों का नुकसान हुआ है, क्या उनका बीमा (Insurance Policy) कराया गया था या नहीं?”
दस्तावेजों के बारीक परीक्षण (Document Verification) के बाद यह कड़वा सच सामने आया कि कंपनी यह साबित ही नहीं कर सकी कि संबंधित संपत्तियों का उचित बीमा कराया गया था। आयोग ने अपने आदेश में बेहद सख्त शब्दों में कहा कि संपत्तियों का बीमा कराना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना विशुद्ध रूप से बिजली वितरण कंपनी (Distribution Company) की जिम्मेदारी है।
प्रशासनिक लापरवाही (Administrative Negligence) या जोखिम प्रबंधन (Risk Management) की कमी के कारण होने वाले नुकसान की सीधी भरपाई आम उपभोक्ताओं (Common Consumers) से करना पूरी तरह से अनुचित और नियम विरुद्ध है।
रेलवे के ₹591.75 करोड़ के दावे पर भी तत्काल राहत से इंकार
इस मामले का एक और बड़ा पहलू रेलवे से जुड़ा हुआ था। CSPDCL ने रेलवे से जुड़े ₹591.75 करोड़ के विवादित दावे को भी इस टैरिफ में शामिल करने की गुहार लगाई थी। इस पर भी नियामक आयोग ने कंपनी को कोई राहत (No Relief) नहीं दी।
आयोग ने साफ कहा कि यह मामला अभी मध्यस्थता (Arbitration Process) के अधीन है। जब तक इस मामले की अंतिम देनदारी (Final Liability) कानूनी रूप से स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इतनी बड़ी रकम को फिलहाल बिजली टैरिफ में शामिल नहीं किया जा सकता। इसके परिणामस्वरूप, पॉवर कंपनी का यह दांव भी पूरी तरह विफल रहा।
आयोग के सचिव का बड़ा बयान: ‘जनहित सर्वोपरि‘
इस फैसले की पुष्टि करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला ने मीडिया से चर्चा में कहा:
“अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा चूक की वजह से कंपनी को भारी नुकसान होना पाया गया है। ऐसे में बिजली टैरिफ (Electricity Tariff) का अतिरिक्त भार आम उपभोक्ताओं पर कतई नहीं थोपा जा सकता। इसलिए, इन सभी प्रस्तावों को जनहित (Public Interest) को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह से रद्द (Cancelled) कर दिया गया है।”
उपभोक्ताओं के लिए इसके मायने
यह फैसला छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी जीत है। अगर आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट भारी कीमत चुकानी पड़ती, जिससे हर घर का बजट बिगड़ जाता। इस आदेश के बाद अब यह साफ हो गया है कि:
- बिजली बिल में स्थिरता: निकट भविष्य में लापरवाही के नाम पर बिजली बिलों में कोई अप्रत्याशित बढ़ोतरी नहीं होगी।
- कंपनियों की जवाबदेही: अब बिजली कंपनियों को अपने स्टोर्स और सब-स्टेशनों की सुरक्षा को लेकर अधिक गंभीर होना पड़ेगा।
- पारदर्शिता (Transparency): यह आदेश कॉर्पोरेट कुप्रबंधन के खिलाफ उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है।







