
CSERC Tariff Order 2026 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का डिटेल टैरिफ आर्डर जारी कर दिया है। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशन ने अपनी वित्तीय सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के समक्ष रखे गए इन मुद्दों पर बिजली कंपनी और आयोग ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
1. पेंशन फंड की सुरक्षा पर उठे सवाल, कंपनी ने दिया जवाब
सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठनों ने सबसे बड़ा मुद्दा ‘पेंशन एंड ग्रेच्युटी ट्रस्ट’ की सुरक्षा का उठाया। संगठनों की ओर से चिंता जताई गई थी कि पेंशन फंड में नियमित रूप से अंशदान (Contribution) जमा नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
इस पर बिजली कंपनी (CSPDCL) ने स्पष्ट किया कि यह आरोप पूरी तरह सही नहीं है। कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि पेंशन फंड की सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगामी वर्षों के टैरिफ प्रस्ताव में पहले ही पर्याप्त वित्तीय प्रावधान कर लिए गए हैं।
2. ₹826 करोड़ के खर्च को मिली मंजूरी
नियामक आयोग ने कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों (Terminal Benefits) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आयोग ने कहा कि वह इन मुद्दों पर हमेशा से सक्रिय रहा है और ट्रस्ट के लिए उचित फंडिंग की अनुमति दी गई है।
बता दें कि बिजली कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वास्तविक भुगतान (Actual Payout) के आधार पर ₹826 करोड़ के पेंशन और ग्रेच्युटी खर्च का दावा पेश किया था। आयोग ने कंपनी के ऑडिटेड खातों की बारीकी से जांच (Prudence Check) की और इसके बाद ही नियमानुसार इस भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी।
3. बिजली रियायत और सोलर पैनल पर मिला यह जवाब
पेंशनर्स एसोसिएशन ने दो प्रमुख मांगें रखी थीं:
- बिजली कर्मचारियों को पहले मिलने वाली 50% और 25% की बिजली बिल छूट को दोबारा बहाल किया जाए।
- पेंशनभोगियों के लिए रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
इस पर बिजली कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाली बिजली रियायत बहाल करना और रूफटॉप सोलर पैनल लगाने जैसे मामले पूरी तरह से प्रशासनिक निर्णय हैं। कंपनी ने साफ किया कि ये विषय टैरिफ याचिका (Tariff Petition) के वैधानिक दायरे से बाहर आते हैं, इसलिए वर्तमान टैरिफ प्रक्रिया में इन मांगों पर कोई अलग से टिप्पणी या बदलाव नहीं किया जा रहा है।
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नियामक आयोग और बिजली कंपनी के इस रुख से यह स्पष्ट है कि जहां एक ओर पेंशन फंड की सुरक्षा और ₹826 करोड़ की फंडिंग पर मुहर लगाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर बिजली बिल में छूट और सोलर पैनल जैसे प्रशासनिक मामलों पर कर्मचारी संगठनों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।







