
रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन (Chhattisgarh Karmachari Adhikari Federation) ने वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित की गई Cashless Medical Scheme के तत्काल क्रियान्वयन (Implementation) की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि सरकार इस ऐतिहासिक फैसले को धरातल पर उतारने के लिए तुरंत आवश्यक गाइडलाइन (Official Guidelines) जारी करे, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
विदित हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की तरफ से बजट में इस स्वास्थ्य सुविधा (Healthcare Benefits) को शामिल करना एक अभूतपूर्व कदम माना गया था। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मांग को लेकर अलग-अलग स्तरों पर अपनी आवाज उठा रहे थे। शासन के इस फैसले का स्वागत तो हुआ, लेकिन बजट घोषणा के तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक इसकी प्रक्रिया (Operational Process) शुरू नहीं हो पाई है।
लाखों कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी न होने के कारण शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारों के बीच गहरा असमंजस (Confusion) बना हुआ है। कर्मचारी लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि इस योजना के अंतर्गत कौन-कौन से अस्पताल आएंगे और इलाज की पात्रता (Eligibility Criteria) क्या होगी।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करनी थी, जो कि अब तक लंबित है। इस देरी के कारण गंभीर बीमारियों से जूझ रहे सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपनी जेब से मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है, जो कि बजट घोषणा की मूल भावना के विपरीत है।
मुख्य मांगें और सुझाव (Key Demands & Policy Framework)
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने माननीय स्वास्थ्य सचिव (Health Secretary) को पत्र लिखकर प्रतिनिधिमंडल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक (High-Level Meeting) आयोजित करने का आग्रह किया है। फेडरेशन का स्पष्ट मत है कि योजना को लागू करने से पहले जमीनी स्तर की व्यावहारिक समस्याओं (Practical Issues) पर विचार करना बेहद जरूरी है।
कर्मचारी संगठन द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- ■ तत्काल बैठक का आयोजन: योजना के नियम और शर्तें तय करने से पूर्व कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श (Stakeholder Consultation) किया जाए।
- ■ पारदर्शी नेटवर्क: प्रदेश के सभी प्रतिष्ठित निजी और शासकीय अस्पतालों (Private & Government Hospitals) का एक मजबूत और सुलभ नेटवर्क तैयार किया जाए।
- ■ शून्य भेदभाव नीति: चतुर्थ श्रेणी से लेकर प्रथम श्रेणी तक के सभी शासकीय सेवकों को बिना किसी भेदभाव के समान और व्यापक चिकित्सा कवर (Comprehensive Health Cover) प्रदान किया जाए।
- ■ कैशलेस और समयबद्ध प्रक्रिया: अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध (Time-bound Delivery) बनाया जाए।
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