Power Sector

CSPTCL ने रेलवे ट्रैक के ऊपर 220KV लाइन बिछाकर रचा इतिहास! Hot-Line तकनीक से बिना ट्रेन रोके पूरा हुआ बड़ा ऑपरेशन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने दलदल सिवनी से रायता तक 220KV Multi Circuit Transmission Line का अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य Hot-Line Technique की मदद से सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

सबसे खास बात यह रही कि यह पूरी प्रक्रिया मुंबई-हावड़ा रेलवे के व्यस्त ट्रैक के ऊपर संपन्न हुई, जहां औसतन हर 10 मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। इसके बावजूद न तो रेलवे यातायात प्रभावित हुआ और न ही बिजली व्यवस्था में कोई व्यवधान आया। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना ट्रांसमिशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

60 मीटर ऊंचे टावर, नीचे रेलवे ट्रैक और गहरा नाला… फिर भी पूरा हुआ मिशन

यह कार्य सामान्य ट्रांसमिशन लाइन परियोजना नहीं था।

दो लगभग 60 मीटर ऊंचे टावरों के बीच मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग गुजरता है। इसी स्थान के पास लगभग 12 फीट गहरा नाला भी मौजूद है। ऐसे कठिन भौगोलिक और तकनीकी हालात में भारी-भरकम हाई वोल्टेज कंडक्टर को सुरक्षित तरीके से स्थापित करना अभियंताओं के लिए बड़ी चुनौती थी।

However, ट्रांसमिशन कंपनी के इंजीनियरों ने Hot-Line Technology का उपयोग करते हुए पूरे ऑपरेशन को बिना किसी दुर्घटना और बिना रेलवे ट्रैफिक रोके सफलतापूर्वक पूरा किया।

क्या है Hot-Line Technique?

Hot-Line Technique बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें बिजली आपूर्ति या अन्य आवश्यक सेवाओं को बाधित किए बिना ट्रांसमिशन लाइन पर कार्य किया जाता है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महत्वपूर्ण परियोजनाएं बिना लंबे Shutdown के पूरी की जा सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ता।

रायपुर की बिजली व्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि दलदल सिवनी में निर्माणाधीन 220/132KV सब-स्टेशन और नई ट्रांसमिशन लाइन पर लगभग 89 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

परियोजना पूरी होने के बाद रायता स्थित 400KV सब-स्टेशन से दलदल सिवनी तक सीधे बिजली पहुंचाई जा सकेगी।

As a Result, राजधानी रायपुर के लिए उपलब्ध 220KV की चार सर्किट लाइनें बढ़कर छह सर्किट लाइनें हो जाएंगी।

इससे भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ आपूर्ति प्रणाली अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनेगी।

इस परियोजना से क्या होंगे प्रमुख लाभ?
  • ⚡ रायपुर की बिजली आपूर्ति होगी और अधिक मजबूत
  • ⚡ 220KV नेटवर्क की क्षमता में बड़ा विस्तार
  • ⚡ बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी
  • ⚡ भविष्य की बढ़ती बिजली मांग पूरी करने में मदद
  • ⚡ फॉल्ट की स्थिति में वैकल्पिक सप्लाई आसान होगी
  • ⚡ हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क और अधिक सुरक्षित बनेगा

तीन दिन चला हाईटेक ऑपरेशन

करीब 200 मीटर लंबे और भारी कंडक्टर को रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर पहुंचाना इस परियोजना का सबसे कठिन चरण था।

इसके लिए पहले Pilot Rope तैयार की गई। इसके बाद दोनों ओर 5-5 टन क्षमता वाली Winching Machines लगाई गईं।

लगभग 90 डिग्री के कोण पर कुल 6 कंडक्टर खींचे गए। पूरे ऑपरेशन में लगभग तीन दिन लगे और प्रत्येक चरण को अत्यधिक सावधानी के साथ पूरा किया गया।

विशेषज्ञों की निगरानी में 200 मीटर लंबे हिस्से को धीरे-धीरे खींचकर अंतिम स्थान तक स्थापित किया गया।

रेलवे ट्रैफिक नहीं हुआ प्रभावित

इस पूरे कार्य के दौरान मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहा।

रेलवे के डीआरएम कार्यालय के अधिकारियों ने ट्रांसमिशन कंपनी के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा। ट्रैक पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे कर्मचारियों की विशेष तैनाती की गई थी।

यही कारण रहा कि इतना बड़ा तकनीकी कार्य बिना किसी रेल सेवा बाधित किए पूरा किया जा सका।

मुख्यमंत्री ने दी अभियंताओं को बधाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह ने इस उपलब्धि पर ट्रांसमिशन कंपनी के अभियंताओं एवं पूरी तकनीकी टीम को बधाई दी।

उन्होंने इसे राज्य की ऊर्जा अवसंरचना (Energy Infrastructure) को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका

इस चुनौतीपूर्ण परियोजना में कई वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

प्रमुख योगदान देने वालों में कार्यपालक निदेशक संजय पटेल, मुख्य अभियंता (परियोजना) प्रसन्ना गोसावी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता ईश्वर कंवर, अधीक्षण अभियंता वी.ए. देशमुख, कार्यपालन अभियंता यू.के. यादव, सहायक अभियंता सुरेश वर्मा, पी.के. तिवारी, प्रबोल मिश्रा, राम ठाकुर, प्रतीक मित्रा तथा एजेंसी लक्ष्मी सिद्धार्थ ट्रांसमिशन के वेणुगोपाल रेड्डी शामिल रहे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और उद्योग, आवासीय क्षेत्रों तथा व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

Therefore, ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है। नई 220KV मल्टी सर्किट लाइन न केवल राजधानी की बिजली व्यवस्था को मजबूत करेगी बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी।

Fact Box
परियोजना: दलदल सिवनी–रायता 220KV मल्टी सर्किट लाइन
तकनीक: Hot-Line Technique
कुल लागत: लगभग 89 करोड़ रुपये
विशेष चुनौती: मुंबई-हावड़ा रेलवे ट्रैक के ऊपर लाइन बिछाना
टावर ऊंचाई: लगभग 60 मीटर
कंडक्टर लंबाई: लगभग 200 मीटर
Winching Machine: 5-5 टन क्षमता
समय: 3 दिन
मुख्य लाभ: रायपुर के लिए 220KV की 4 से बढ़कर 6 सर्किट लाइनें

विश्वसनीयता

यह जानकारी छत्तीसगढ़ शासन एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। खबर में परियोजना से जुड़े तकनीकी विवरण, लागत, अधिकारियों के बयान और निर्माण प्रक्रिया का तथ्यात्मक प्रस्तुतीकरण किया गया है।

Also Read 8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट: कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक की नई तारीख तय, आयोग ने जारी किया नोटिस

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button