
chaturpost.com | पॉलिसी और बिजनेस न्यूज डेस्क
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कंसल्टेंसी सेवाओं (Consultancy Services) की खरीद को लेकर वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यदि आपकी कंपनी या फर्म सरकारी टेंडर्स (Government Tenders) में भाग लेती है, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की साबित होने वाली है।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के तहत आने वाले खरीद नीति प्रभाग (Procurement Policy Division – PPD) ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर जारी होने वाले टेंडर्स को लेकर एक आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया है।
इस एडवाइजरी (Official Advisory) का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों द्वारा कंसल्टेंसी खरीद की प्रक्रिया में लगाई जाने वाली अनुचित और अत्यधिक कठोर शर्तों को समाप्त करना है, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा (Fair Competition) को बढ़ावा मिल सके।
सैंपल स्टडी में सामने आई बड़ी कमियां (Key Findings)
वित्त मंत्रालय द्वारा पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान GeM Portal पर केंद्रीय सरकारी संस्थाओं द्वारा निकाले गए कंसल्टेंसी टेंडर्स का एक विस्तृत अध्ययन (Sample Study) कराया गया था। इस अध्ययन में पात्रता और योग्यता मापदंडों (Eligibility and Qualification Criteria) को लेकर कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं।
सरकारी समीक्षा में पाई गई 3 मुख्य गड़बड़ियां:
- अत्यधिक टर्नओवर की शर्त: टेंडर पाने के लिए कंपनियों से बहुत अधिक टर्नओवर (High Turnover Requirements) की मांग की जा रही थी।
- गलत वेटेज प्रणाली: प्रस्तावित मुख्य विशेषज्ञों (Key Personnel) की योग्यता और अनुभव के बजाय केवल कंसल्टिंग फर्म के समग्र अनुभव (Firm’s Experience) को ज्यादा वेटेज दिया जा रहा था।
- कर्मचारियों की बेतुकी अनिवार्यता: परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए आवश्यक जनशक्ति की तुलना में पेरोल पर अत्यधिक कर्मचारियों (Excessive Staff Strength) की न्यूनतम संख्या निर्धारित कर दी गई थी।
प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नए निर्देश (New Directives)
वित्त मंत्रालय के उप सचिव (Under Secretary) प्रवीन कुजूर द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस तरह की अनुचित शर्तें कंसल्टेंसी सेवाओं की खरीद में प्रतिस्पर्धा (Market Competition) को अनावश्यक रूप से सीमित करती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों (Secretaries of All Central Ministries) को कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए खरीद नियमावली 2025 (Manual for Procurement of Consultancy Services, Second Edition 2025) के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
बदलाव से क्या-क्या असर पड़ेगा? (Impact Analysis)
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस नई एडवाइजरी से सरकारी खरीद प्रक्रिया (Government Procurement Process) में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आइए समझते हैं कि इससे हितधारकों (Stakeholders) को क्या लाभ होंगे:
- छोटे और नए प्लेयर्स को मौका: अत्यधिक टर्नओवर की शर्त हटने से उभरती हुई स्टार्टअप्स (Startups) और मध्यम आकार की कंसल्टेंसी फर्म्स भी सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सकेंगी।
- विशेषज्ञता को प्राथमिकता: अब प्रोजेक्ट्स का आवंटन केवल कंपनी के नाम या आकार पर नहीं, बल्कि उसमें काम करने वाले एक्सपर्ट्स की योग्यता (Expertise and Experience) के आधार पर होगा।
- पारदर्शिता और बचत: प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सरकार को बेहतर गुणवत्ता वाली सेवाएं कम लागत (Cost-Effective Services) पर मिल सकेंगी।
📈 पुराने नियम बनाम नए दिशानिर्देश (Comparison Table)
| विषय (Parameters) | पुरानी व्यवस्था (Previous Practice) | नया निर्देश (New Guidelines) |
| टर्नओवर नियम | गैर-जरूरी रूप से अत्यधिक उच्च सीमा | प्रोजेक्ट के बजट के अनुकूल तार्किक सीमा |
| मूल्यांकन का आधार | केवल फर्म के पुराने अनुभव पर जोर | मुख्य विशेषज्ञों (Key Personnel) की योग्यता पर जोर |
| स्टाफ संख्या | पेरोल पर अत्यधिक मैनपावर की बाध्यता | प्रोजेक्ट निष्पादन के लिए आवश्यक वास्तविक क्षमता |
विभागों के लिए सख्त चेतावनी (Strict Warning for Compliance)
व्यय विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई मंत्रालय या विभाग टेंडर प्रक्रिया में बिना किसी उचित औचित्य (Without Adequate Justification) के पेरोल पर भारी-भरकम स्टाफ स्ट्रेंथ जैसी शर्तें जोड़ता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
आदेश के अनुसार, कंसल्टेंसी असाइनमेंट (Consultancy Assignment) को संतोषजनक ढंग से पूरा करने के लिए जितनी जनशक्ति वास्तव में आवश्यक है, केवल उतनी ही शर्त रखी जानी चाहिए। बिना वजह कठिन मानदंड तय करके योग्य बोलीदाताओं (Eligible Bidders) को बाहर करने की प्रवृत्ति पर अब पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा।
निष्कर्ष (Editorial Summary)
वित्त मंत्रालय का यह कदम E-E-A-T (Expertise, Authoritativeness, Trust) के सिद्धांतों को सरकारी खरीद प्रणाली में लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे GeM Portal पर पारदर्शिता आएगी, योग्य विशेषज्ञों को उनका हक मिलेगा और सरकारी धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।








