
High Court बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी सामने आई है। कोर्ट ने यह टिप्पणी शिक्षा विभाग के एक दिवंगत मंडल संयोजक के पुत्र की अनुकंपा नियुक्ति की मांग वाली याचिका पर फैसला सुनाने के दौरान की है।
हाईकोर्ट ने बताया अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह व्यवस्था इस वजह से है ताकि मृतक शासकीय सेवक के परिवार तो तत्काल राहत और सहायता दी जा सके।
कोर्ट ने कहा- अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं
कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति किसी दिवंगत शासकीय सेवक के परिजन का अधिकार नहीं है और न ही यह विरासत में मिलने वाला पद है। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति परिवार पर अचानक आए आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सहायता है।
रायगढ़ जिला का मामला
यह मामला घरघोड़ा (रायगढ़) का है। घरघोड़ा के रहने वाले निजेश चौहान ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। निजेश चौहान के पिता शिक्षा विभाग में मंडल संयोजक के पद पर काम करत थे। 2005 में 19 फरवरी को उनका निधन हो गया था।
दो पत्नियों के चक्कर में फंसा मामला
निजेश चौहान ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया कि उसके पिता की दो पत्नियां हैं। पिता के निधन के वक्त पर नाबालिग था। ऐसे में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर दोनों पत्नियों के बीच विवाद हो गया। बाद में दोनों पक्षों ने सिविल कोर्ट में समझौता कर लिया।
विलंब के कारण विभाग ने अस्वीकार किया आवेदन
निजेश चौहान ने पिता के निधन के 14 साल बाद 2019 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने इतना विलंब से आवेदन किए जाने की वजह से नौकरी देने से मना कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर विभाग पूर्व में उसके आवेदन पर विचार किया, लेकिन 2023 में आवेदन अस्वीकार कर दिया गया।




