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मध्‍य क्षेत्रीय परिषद की बैठक: चार राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों की मौजूदी में शाह ने तय किया 2029 का बड़ा लक्ष्य

जगदलपुर (छत्तीसगढ़)। आज 19 मई 2026 है, भारत के आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश के केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में Central Regional Council (मध्य क्षेत्रीय परिषद) की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बताया कि यह बैठक बस्तर में आयोजित होने से पहले ही पूरा बस्तर और संपूर्ण देश अब पूरी तरह से नक्सलमुक्त (Naxal-Free India) हो चुका है।

इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बैठक (Crucial Meeting) में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित केंद्र और राज्यों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक की मेज़बानी केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा की गई।

मुख्यमंत्रियों को कड़े निर्देश: कुपोषण और कानून व्यवस्था पर एक्शन

गृह मंत्री ने बैठक में मौजूद चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के सामने भविष्य का एक कड़ा रोडमैप (Future Roadmap) भी रखा। उन्होंने विशेष रूप से सामाजिक कल्याण (Social Welfare) और कानून व्यवस्था को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए:

  • कुपोषण के खिलाफ जंग: सभी राज्य सरकारें कुपोषण और मिलावटखोरी (Adulteration) के खिलाफ भारत सरकार के अभियान में कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। मिलावटखोरों पर लगने वाली पेनाल्टी की पब्लिसिटी की जाए ताकि जनता में जागरूकता आए।
  • स्कूल ड्रॉपआउट पर लगाम: शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाए और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर (Dropout Rate) को शून्य पर लाने का प्रयास हो।
  • POCSO और दुष्कर्म मामलों में त्वरित न्याय: अमित शाह ने निर्देश दिया कि POCSO और बलात्कार के मामलों में समय पर DNA जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों को शत-प्रतिशत सजा (100% Conviction Rate) मिल सके। 5 साल से पुराने मामलों के लिए उच्च न्यायालयों (High Courts) को विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए।

साइबर सुरक्षा और 2029 का बड़ा कानूनी लक्ष्य

बदलते दौर में अपराधों के डिजिटलाइजेशन को देखते हुए गृह मंत्री ने चारों राज्यों से अपील की कि वे केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्टैंडर्ड फॉर्मेट के अनुसार 1930 साइबर सुरक्षा हेल्पलाइन (Cyber Security Helpline) के कॉल सेंटरों को तुरंत अपडेट करें।

इसके साथ ही उन्होंने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) की तीन नई न्याय संहिताओं के सफल क्रियान्वयन की तारीफ की। उन्होंने एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि, “जिस प्रकार हमने देश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त किया है, उसी तरह हमारा अगला लक्ष्य है कि साल 2029 से पहले देश के हर आपराधिक मुकदमे को महज 3 साल के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक अंजाम तक पहुंचाया जा सके।”

प्रधानमंत्री मोदी का आभार और सुरक्षाबलों का शौर्य

बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने संपूर्ण देश के नक्सलमुक्त होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार प्रकट किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय हमारे जांबाज सुरक्षाबलों के जवानों के कठिन परिश्रम और अद्वितीय बलिदान को जाता है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि हमारी खुफिया एजेंसियों ने बहुत ही सटीकता (Precision) के साथ इनपुट एकत्र किए। इसके बाद राज्य पुलिस बलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने मिलकर हर इनपुट पर त्वरित और समयबद्ध कार्रवाई (Time-bound Action) की, जिससे नक्सलियों के पैर पूरी तरह उखड़ गए।

‘Whole of the Government Approach’ से बदला बस्तर का चेहरा

अमित शाह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल बंदूकों के दम पर ही नहीं, बल्कि Whole of the Government Approach (सरकार के समग्र दृष्टिकोण) के माध्यम से यह ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है।

  • केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों ने मिलकर नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों, बिजली और अस्पतालों जैसी बुनियादी ढांचागत विकास (Infrastructure Development) योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाया है।
  • गृह मंत्री ने संकल्प दोहराते हुए कहा, हमारी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। लगभग पांच दशकों से विकास की दौड़ में पिछड़े इन क्षेत्रों को जब तक हम देश के बाकी हिस्सों के समकक्ष (At Par) नहीं ले आते, तब तक हमारा यह अभियान जारी रहेगा।”

संवाद से समाधान का सशक्त मंच: क्षेत्रीय परिषदें

प्रधानमंत्री मोदी के विजनरी नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद की बैठकें अब महज औपचारिकता नहीं, बल्कि संवाद से समाधान (Dialogue to Resolution) का एक सशक्त माध्यम बन चुकी हैं। गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात को पुख्ता किया:

  • बैठकों में भारी उछाल: साल 2004 से 2014 के बीच जहां क्षेत्रीय परिषद की केवल 11 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 से 2026 के बीच यह संख्या लगभग तिगुनी बढ़कर 32 हो चुकी है।
  • मुद्दों का समाधान: पिछले दशक में स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें ढाई गुना बढ़कर 35 हुई हैं। पहले जहां सिर्फ 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, वहीं अब 1729 मुद्दों पर विमर्श हुआ है, जिनमें से 80% से अधिक समस्याओं का सफल समाधान (Successful Resolution) किया जा चुका है।

देश की प्रगति का मुख्य इंजन है मध्य क्षेत्र

मध्य क्षेत्रीय परिषद (Central Regional Council) के महत्व को रेखांकित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में उत्तर के हिमालय से लेकर गंगा-यमुना के मैदान और मध्य भारत के खनिज-समृद्ध वन क्षेत्र शामिल हैं। यह पूरा बेल्ट देश के विकास (National Development) के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह है:

  1. अन्न का भंडार: यह क्षेत्र देश के अन्न भंडारों को भरने में सबसे अग्रणी भूमिका निभाता है।
  2. खनिज और संस्कृति: यहाँ के समृद्ध खनिज भंडार (Mineral Reserves) उद्योगों को गति देते हैं, और यहाँ की सांस्कृतिक विरासत व आस्था के केंद्र देश को एक सूत्र में पिरोते हैं।
  3. कनेक्टिविटी: छत्तीसगढ़ अकेले सात राज्यों को जोड़ता है, जिससे इसकी भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति बेहद खास हो जाती है।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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