
CSPC रायपुर। राजधानी के डंगनिया स्थित बिजली कंपनी मुख्यालय का औषधालय में अव्यवस्था को लेकर पावर कंपनियों के दोनों अध्यक्षों से लिखित शिकायत की गई है। इसमें दवाई और जांच उपकरणों की कमी और खरीदी में अनवाश्यक खींचतान भी जानकारी अध्यक्षों को दी गई है। इसमें दोनों अध्यक्षों से डंगनिया औषधालय में व्याप्त अव्यवस्था को तत्काल दूर करने के लिए कड़े निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।
करीब 23 साल पहले खुला था अस्पताल
पावर कंपनी मुख्यालय डंगनिया स्थित कंपनी औषधालय की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी। मुख्यालय सहित राजधानी रायपुर स्थित हजारों कर्मचारियों अधिकारियों को उत्तम स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए तत्कालीन अध्यक्ष राजीब रंजन के प्रयासों से प्रारंभ हुआ था ।
महासंघ ने की अध्यक्षों से शिकायत
औषधालय की अव्यवस्था को लेकर अखिल भारतीय विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी महासंघ के महामंत्री अरुण देवांगन ने पावर कंपनियों के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह और डॉ. रोहित यादव को पत्र लिखकर की है। उन्होंने लिखा है कि पावर कंपनी मुख्यालय की ठीक नाक के नीचे स्थित इस औषधालय की स्थिति अत्यंत दयनीय है जो सुविधाएं यहां पूर्व में बेहतर तरीके से प्राप्त होती थी उसका आज नितांत अभाव दिखाई दे रहा है।
CSPC तीन साल से बंद पड़ी है ईसीजी मशीन
श्री देवांगन ने लिखा है कि औषधालय की ईसीजी मशीन पिछले लगभग तीन वर्षों से खराब पड़ा हुआ है जिसके कारण कर्मचारियों अधिकारियों को बाहर से जांच कराना होता है। इसी तरह कुछ टेस्टिंग मशीनों की खरीदी तो की गई है, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है।
दवा खरीदी में अनावश्यक देर
औषधालय में दवाईयों की नितांत कमी लगभग साल भर बनी रहती है साधारणतया टेंडर में विलंब, मुख्यालय स्तर पर इसकी स्वीकृति में खींचतान को जिम्मेदार बताया जाता है । दवाईयों के टेंडर फाइनल करने के लिए डाक्टरों की ही टीम बनाई गई है लेकिन बताया जाता है टीम की तरफ से फाइनल किए गए टेंडर डाक्यूमेंट के आधार पर आए टेंडर दर की स्वीकृति के समय इसी टीम के डाक्टरों द्वारा विपरीत टिप्पणीयां दर्ज की जाती है जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होने से टेंडर आदेश पारित करने में विलंब होता है फलतः दवाईयों की कमी बताकर कर्मचारी मरीजों को वापस लौटा दिया जाता है।
SAP से बाहर है दवा खरीदी
श्री देवांगन ने लिखा है कि एक ओर जहां पावर कंपनी में अरबों खरबों रुपए की लागत से ईआईटीसी संचालित है जहां अत्याधुनिक सूचना तंत्र (आई.टी.) का उपयोग किया जाना बताया जाता है वहीं दूसरी ओर कामन सर्विस अंतर्गत रखे गए चिकित्सा सेवा के तहत रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, मडवा और कोरबा उत्पादन केन्द्र औषधालयों के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री का लेखा जोखा SAP में रखे जाने के लिए पिछले 25 वर्षों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई है
किस औषघालय में कौन सी दवाई अधिक मात्रा में है कौन सी दवाई की कमी है कौन सी दवाई कालातीत होने को है। यह सब यदि SAP में रखा जाता तो आवश्यकतानुसार आधिक्य वाली दवाईयों को स्टाक ट्रांसफर कमी वाले औषधालय में किया जा सकता था जैसा कि स्टोर में स्टाक ट्रांसफर की प्रक्रिया होती है इस बारे में अलग अलग स्तरों पर चर्चा भी किया गया है लेकिन प्रबंधन द्वारा इस संबंध में कोई भी रूचि प्रदर्शित नहीं किया जाता जिससे अव्यवस्था का संचार हो रहा है।
CSPC मशीन तो खरीद ली लेकिन उपयोग नहीं हो रहा
औषधालय स्थित खून पेशाब जांच करने वाली पूर्व स्थापित मशीन के कालातीत हो जाने के बाद नई मशीन खरीदी के लिए जारी टेंडर को भी पारित करने में लगभग एक वर्ष का समय लग गया, जाहिर है इस अवधि में लैब में टेस्टिंग पूरी तरह बंद रहा, येन केन प्रकारेण लगभग 6-7 लाख का व्यय कर नई मशीन खरीदी की जाने के बाद से अब तक इसे पूर्ण रूपेण चालू नहीं किया जा सका है।
लगभग एक डेढ वर्ष पूर्व पुराने मशीन से जांच के लिए आवश्यक सामग्रियों यथा रिएजेंट व अन्य सामानों की कमी होने से जांच कार्य पिछले कई माह से फिर से बंद है जिम्मेदार अफसर एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं जबकि यह बहुपयोगी मशीन है तथा कम व्यय में कर्मचारियों को इसका लाभ प्राप्त होता है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हो रहा नुकसान
जहां एक ओर हास्पिटल में दवाई उपलब्ध न होने या लैब में टेस्ट न होने पर नियमित कर्मचारियों अधिकारियों को बाहर से दवाई कय करने या लैब टेस्ट कराने पर प्रतिपूर्ति की सुविधा है लेकिन दूसरी ओर सेवानिवृत्त कर्मचारियों अधिकारियों को विभागीय तौर पर मिलने वाली सुलभ चिकित्सा सुविधा से वंचित होने से बाजार दर पर दवाई या जांच कराना होता है जिसके प्रतिपूर्ति का कोई नियम नहीं है।




