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Chhattisgarh Electricity Employee Protest: छत्तीसगढ़ बिजलीकर्मियों का बड़ा ऐलान! OPS और नियमितीकरण पर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, जून में चक्काजाम की चेतावनी

Chhattisgarh Electricity Employee Protest कोरबा (Chaturpost News): छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी के हजारों कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों (Pending Demands) को लेकर एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। सुशासन और विकास के दावों के बीच, बिजलीकर्मियों ने अब सीधे राजनीतिक दबाव (Political Pressure) बनाने की रणनीति अपनाई है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान शुरू किया है, जिसकी गूँज अब राजधानी तक पहुँचने वाली है।

कोरबा से शुरू हुआ ‘जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान’ (Public Representative Outreach)

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने इस बार अपनी रणनीति (Strategy) में बड़ा बदलाव किया है। कर्मचारियों ने राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने के लिए सीधे विधायकों और सांसदों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। इस अभियान की शुरुआत ऊर्जा धानी कोरबा जिले से की गई है।

रविवार को यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया के गृह ग्राम केरवाझारी पहुँचकर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। विधायक ने कर्मचारियों को आश्वस्त (Assured) किया है कि उनकी जायज मांगों को शासन स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। इससे पहले यूनियन ने कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल से भी मुलाकात की थी।

पुरानी पेंशन (OPS) का मुद्दा सबसे अहम (Old Pension Scheme)

बिजली कर्मचारियों की सबसे प्रमुख और बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली है। कर्मचारी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि OPS कोई अहसान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है।

7 मई तक जारी रहेगा अभियान, जून में हड़ताल की तैयारी (Strike Warning)

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन का यह जनसंपर्क अभियान 7 मई तक जारी रहेगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी 90 विधायकों, 11 लोकसभा सांसदों और 5 राज्यसभा सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रांतीय अध्यक्ष अनिल द्विवेदी के नेतृत्व में यह अभियान प्रदेश स्तर पर चलाया जा रहा है।

यूनियन ने साफ संकेत दिए हैं कि फिलहाल यह अभियान एक सोची-समझी रणनीति (Strategy) के तहत सरकार पर दबाव बनाने के लिए है। यदि इन मूलभूत मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो जून के महीने में व्यापक हड़ताल (Strike) की जाएगी। इससे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

महासंघ ने भी प्रबंधन के खिलाफ खोला मोर्चा (Federation Joins Protest)

इधर, भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध बिजली कर्मचारी संघ महासंघ ने भी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने एचटीपीएस (HTPS) और डीएसपीएम (DSPM) पावर प्लांट प्रबंधन को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है। महासंघ ने भी चेतावनी (Warning) दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जून में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रबंधन के वादों से उपजी निराशा (Disappointment with Management)

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पूर्व में प्रबंधन के साथ कई दौर की वार्ता (Talks) हो चुकी है। प्रबंधन ने हर बार सकारात्मक रवैया दिखाया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। आश्वासन मिलने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ने से कर्मचारियों में भारी निराशा व्याप्त है।

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छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग के कर्मचारियों का यह आक्रोश आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत बन सकता है। यदि सरकार और प्रबंधन ने समय रहते मांगों पर विचार नहीं किया, तो जून में होने वाली संभावित हड़ताल से प्रदेश में अंधेरा छा सकता है। chaturpost.com इस मुद्दे पर पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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