
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। अगर आप भी राज्य सरकार के अधीन कार्यरत हैं या पेंशनभोगी हैं, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन (Chhattisgarh Karamchari-Adhikari Federation) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को एक औपचारिक पत्र लिखकर लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) एरियर सहित प्रदान करने की मांग की है।
यह मांग न केवल कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए है, बल्कि यह उस चुनावी वादे की याद दिलाती है जो भारतीय जनता पार्टी ने अपने संकल्प पत्र (Manifesto) में किया था।
क्या है पूरा मामला? (Background of the News)
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने 27 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को संबोधित करते हुए एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) मिल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत (अर्थात 2% की वृद्धि) कर दिया है, जो कि 01 जनवरी 2026 से प्रभावी है।
फेडरेशन का कहना है कि राज्य के कर्मचारियों को केंद्र के समान लाभ मिलना चाहिए, जैसा कि सत्ताधारी दल ने अपने घोषणा पत्र (Manifesto) में वादा किया था। महंगाई के इस दौर में (Inflationary pressure), कर्मचारियों और पेंशनरों को अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
घोषणा पत्र का वादा और कर्मचारियों की उम्मीदें
छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र (Manifesto) में यह प्रमुखता से कहा था कि राज्य के शासकीय सेवकों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA) और एरियर (Arrears) प्रदान किया जाएगा। अब कर्मचारी संगठन इसी वादे को आधार बनाकर सरकार को याद दिला रहे हैं कि वादा पूरा करने का समय आ गया है।
कर्मचारियों का तर्क है कि जब केंद्र सरकार ने महंगाई की दर को देखते हुए जनवरी 2026 से ही डीए बढ़ा दिया है, तो राज्य सरकार को भी इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। देरी होने से न केवल मासिक वेतन (Monthly Salary) पर असर पड़ता है, बल्कि एरियर की राशि भी बढ़ती जाती है, जो अंततः सरकारी खजाने पर एक साथ बोझ डालती है।
महंगाई भत्ता (DA) क्यों है जरूरी?
महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) सरकारी कर्मचारियों के वेतन का वह हिस्सा है, जो बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए दिया जाता है। चूंकि जीवन यापन की लागत (Cost of Living) लगातार बढ़ रही है, इसलिए समय-समय पर इसे संशोधित करना अनिवार्य होता है।
फेडरेशन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि:
- बढ़ती महंगाई के कारण दैनिक खर्चों में वृद्धि हुई है।
- पेंशनरों को स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।
- एरियर (Arrears) सहित भुगतान होने से कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिलेगी, जिससे वे अपने वित्तीय नियोजन (Financial Planning) को बेहतर कर सकेंगे।
आगे की राह: क्या होगा सरकार का अगला कदम?
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) और वित्त विभाग पर टिकी हैं। आमतौर पर, केंद्र द्वारा डीए बढ़ाए जाने के कुछ समय बाद राज्य सरकारें भी इसकी घोषणा करती हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ में एरियर (Arrears) का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि उन्हें केवल बढ़ा हुआ डीए न मिले, बल्कि पिछला बकाया (Arrears) भी देय तिथि (Effective Date) से मिले।
यदि सरकार 2% डीए बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो इससे राज्य के लगभग 4 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनरों को सीधा लाभ होगा। यह निर्णय आने वाले समय में सरकारी कामकाज की गति और कर्मचारियों के मनोबल (Morale) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रशासन में हलचल
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की यह पहल (Initiative) प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक हलचल पैदा कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार बजट और वित्तीय स्थिति (Financial Position) को ध्यान में रखते हुए कब तक आधिकारिक आदेश जारी करती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जल्द ही इस पर “बड़ा फैसला” लेंगे और उन्हें केंद्र के समान आर्थिक लाभ प्रदान करेंगे।
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