
रायपुर (Chaturpost Exclusive): छत्तीसगढ़ ने डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास की दिशा में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत श्रमिकों के डिजिटल सत्यापन यानी ई-केवाईसी (e-KYC) करने में छत्तीसगढ़ पूरे भारत में पहले पायदान पर पहुँच गया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि छत्तीसगढ़ ने साक्षरता और तकनीकी रूप से उन्नत माने जाने वाले केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।
डिजिटल सशक्तिकरण की नई मिसाल
छत्तीसगढ़ में मनरेगा (MGNREGA) के तहत काम करने वाले मजदूरों के लिए यह एक क्रांतिकारी बदलाव है। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 58.16 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-केवाईसी (e-KYC) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक लाभार्थियों (Genuine Beneficiaries) को ही मिले।
इस डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया (Digital Verification Process) के माध्यम से अब मजदूरों की मजदूरी सीधे उनके बैंक खातों में बिना किसी देरी या भ्रष्टाचार के पहुँच सकेगी। यह कदम “आधार आधारित भुगतान प्रणाली” (Aadhaar Based Payment System) को और अधिक मज़बूत बनाता है।
मुख्यमंत्री साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा की रणनीति
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का प्रभावी नेतृत्व है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने राज्य के कोने-कोने में विशेष अभियान (Special Campaign) चलाकर श्रमिकों को इस प्रक्रिया से जोड़ा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा:
“हमारी सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए संकल्पित है। ई-केवाईसी के माध्यम से अब मस्टर रोल (Muster Roll) में फर्जी उपस्थिति जैसी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और सरकारी धन का सही उपयोग होगा।”
बड़े राज्यों को दी मात (Comparison with other States)
छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। जहाँ केरल, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्य और कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे संसाधन संपन्न बड़े राज्य अभी संघर्ष कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ ने 97.11% का आंकड़ा छूकर सबको चौंका दिया है। यह प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency) और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती तकनीकी जागरूकता का प्रमाण है।
भ्रष्टाचार पर ‘डिजिटल’ प्रहार
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के अनुसार, इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ पारदर्शिता (Transparency) के रूप में सामने आया है। ई-केवाईसी होने से:
- फर्जी लाभार्थियों की छंटनी: जो लोग वास्तव में श्रमिक नहीं हैं लेकिन कागजों पर लाभ ले रहे थे, उन्हें सिस्टम से बाहर कर दिया गया है।
- समय पर भुगतान: अब श्रमिकों को अपनी मजदूरी (Wages) के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
- रियल-टाइम ट्रैकिंग: सरकार अब हर एक श्रमिक की उपस्थिति और उसके भुगतान की वास्तविक समय में निगरानी कर सकती है।
चुनौतियां और आगामी लक्ष्य
हालाँकि छत्तीसगढ़ ने 97 प्रतिशत से अधिक का लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन सरकार का लक्ष्य अब 100 प्रतिशत ई-केवाईसी (100% saturation) प्राप्त करना है। विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शेष बचे हुए श्रमिकों का सत्यापन भी युद्धस्तर पर पूरा किया जाए ताकि छत्तीसगढ़ डिजिटल ग्रामीण विकास के मामले में एक ‘आदर्श राज्य’ (Model State) बना रहे।
ई-केवाईसी में नंबर-1
छत्तीसगढ़ का मनरेगा ई-केवाईसी में नंबर-1 बनना केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राज्य के अंतिम व्यक्ति तक तकनीक और ईमानदारी से लाभ पहुँचाने की प्रतिबद्धता है। सुशासन (Good Governance) और तकनीक के मेल से छत्तीसगढ़ ने देश के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।
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MNREGA e-KYC, Chhattisgarh Governance, CM Vishnu Deo Sai, Digital India Rural, Panchayat and Rural Development Department.







