कर्मचारी हलचल

बड़ी निराशा: साय कैबिनेट की बैठक से ‘Chhattisgarh Pensioners’ को लगा बड़ा झटका, भड़के पेंशनर्स महासंघ ने उठाई यह गंभीर मांग!

रायपुर न्‍यूज डेस्‍क] छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 9 जून 2026 को आयोजित की गई महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद की बैठक (Cabinet Meeting) संपन्न हो गई है। इस बैठक से जहां राज्य के विकास को लेकर कई अहम फैसलों की उम्मीद थी, वहीं प्रदेश के लाखों पेंशनरों और परिवार पेंशनरों (Family Pensioners) को इससे बड़ी निराशा (Disappointment) हाथ लगी है।

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कैबिनेट के फैसलों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद की इस बैठक से राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगी समाज को जो उम्मीदें थीं, वे पूरी तरह से टूट गई हैं। सरकार ने उनकी जायज मांगों पर इस बैठक में कोई ध्यान नहीं दिया है।

डीए (DA) और डीआर (DR) की मांग पर सरकार ने साधी चुप्पी

पेंशनर्स महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के अनुसार, संगठन ने साय कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले राज्य सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी थीं। महासंघ ने पुरजोर मांग की थी कि राज्य के शासकीय कर्मचारियों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) स्वीकृत करने का फैसला लिया जाए।

इसके साथ ही, लंबे समय से बकाया एरियर्स भुगतान (Arrears Payment) के संबंध में भी कैबिनेट में निर्णय लेने की मांग की गई थी। लेकिन, इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर सरकार की तरफ से कोई घोषणा (Official Announcement) नहीं की गई, जिससे पेंशनर समुदाय में भारी असंतोष और मायूसी का माहौल है।

केंद्र सरकार दे रही लाभ, तो छत्तीसगढ़ के बुजुर्ग क्यों हैं वंचित?

पेंशनर्स महासंघ ने राज्य सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए वित्तीय असमानता (Financial Disparity) का मुद्दा उठाया है। वीरेन्द्र नामदेव ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से ही अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 2 प्रतिशत डीए-डीआर की वृद्धि (Increase) की जा चुकी है।

इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ के पेंशनर और परिवार पेंशनर अभी तक इस न्यायसंगत लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। इसके कारण राज्य के लाखों वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इस लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation) के दौर में पेंशनरों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) घटती जा रही है, जिससे उन्हें अपनी दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों (Daily Needs) को पूरा करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कैशलेस चिकित्सा सुविधा (Cashless Medical Facility) लागू करने की बड़ी मांग

महंगाई राहत के अलावा, महासंघ ने बुजुर्गों के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा (Social Security) को लेकर भी सरकार को घेरा है। संगठन ने राज्य सरकार से सभी पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के लिए अविलंब कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग की थी।

महासंघ ने याद दिलाई सरकार की नैतिक जिम्मेदारी (Moral Responsibility)

पेंशनर्स महासंघ का साफ तौर पर मानना है कि सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त हो चुके बुजुर्ग पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत प्रदान करना किसी भी कल्याणकारी सरकार की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी (Administrative Responsibility) होती है। संगठन को यह पूरी उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट इस विषय पर कोई सकारात्मक निर्णय (Positive Decision) लेकर राज्य के बुजुर्गों को राहत देगी, परंतु ऐसा नहीं हुआ।

पेंशनरों की समस्याओं को लेकर महासंघ के तमाम शीर्ष पदाधिकारी अब लामबंद होने लगे हैं। राज्य सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग करने वाले प्रमुख पदाधिकारियों में ये नाम शामिल हैं:

  • जे.पी. मिश्रा (कार्यकारी प्रांताध्यक्ष)
  • अनिल गोल्हानी एवं प्रवीण कुमार त्रिवेदी (प्रदेश महामंत्री)
  • आलोक त्रिवेदी, एन.आर. साहू, लोचन पांडेय, उर्मिला शुक्ला (प्रदेश उपाध्यक्ष)
  • टी.पी. सिंह (राष्ट्रीय संगठन मंत्री)
  • अरुण तिवारी, शैलेन्द्र सिन्हा, आर.जी. बोहरे, ओ.डी. शर्मा (वरिष्ठ पदाधिकारी)

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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