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गज़ब का रिकॉर्ड: छत्तीसगढ़ में जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सरकार के इस बड़े फैसले से जनता गदगद, जाने क्‍या है मामला

विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक की रिपोर्ट

रायपुर (chaturpost.com) सुशासन के नए डिजिटल युग में छत्तीसगढ़ का राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने आधुनिक तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सरकारी सेवाओं का कायाकल्प कर दिया है। विभाग के सहायक संचालक विष्णु प्रसाद वर्मा के अनुसार, ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने पूरे सिस्टम को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बना दिया है।

पहले जमीन या मकान की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए लोगों को पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। भौतिक सत्यापन की इस थकाऊ प्रक्रिया से आम नागरिकों को भारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता था। सौभाग्य से (Fortunately), छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण अब यह काम बिना किसी मानवीय दखल के स्वतः ही संपन्न हो रहा है, जिसने सुशासन का एक मजबूत मॉडल देश के सामने पेश किया है।

आंकड़ों की जुबानी: छत्तीसगढ़ ने बनाया 99.95% का अभूतपूर्व रिकॉर्ड

वास्तव में (In fact), राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक डिजिटल परिवर्तन की गवाही खुद दे रहे हैं। राज्य में अब तक दर्ज किए गए कुल मामलों में विभाग ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।

राजस्व सेवाएं सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं। इसके परिणामस्वरूप (As a result), इन प्रक्रियाओं में गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को एक नई और तेज रफ्तार मिली है।

ऑटो म्यूटेशन के लिए बना सख्त ‘टेक्निकल लॉक सिस्टम’

निश्चित रूप से (Certainly), पुराने दौर में नामांतरण की अनिश्चितता के कारण जमीनी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता था। आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है क्योंकि रिकॉर्ड का रीयल-टाइम अपग्रेडेशन (Real-Time Update) हो रहा है।

इस व्यवस्था को फुलप्रूफ और जवाबदेह बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम (Technical Lock System) विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक लॉक रहेगी, जब तक कि पिछला म्यूटेशन क्लियर नहीं हो जाता। यह मजबूत कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है।

जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: कोरिया नंबर-1, धमतरी टॉप-5 में शामिल

इसके अतिरिक्त (In addition), राजस्व विभाग के सहायक संचालक विष्णु प्रसाद वर्मा के मुताबिक, ऑटो डायवर्सन (स्वतः व्यवर्तन) के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ के जिलों के बीच एक बेहद स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रशासनिक संस्कृति (Administrative Culture) देखने को मिल रही है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि राजस्व सुधार अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पूरी मजबूती से लागू हो चुके हैं।

विभागीय समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के शीर्ष 5 जिलों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से जवाबदेह प्रशासन की एक नई तस्वीर पेश की है, जिसका पूरा विवरण इस प्रकार है:

  • कोरिया जिला (पूरे राज्य में प्रथम): कोरिया जिले ने राजस्व सुधारों को लागू करने में बाजी मारी है। जिले में ऑटो डायवर्सन के लिए कुल 59 प्रकरण दर्ज किए गए थे, जिनमें से सभी 59 मामलों का शत-प्रतिशत त्वरित निराकरण किया गया। 100 प्रतिशत सफलता दर (Success Rate) के साथ कोरिया जिला पूरे छत्तीसगढ़ में पहले स्थान पर काबिज है।
  • कोरबा जिला (दूसरे स्थान पर): कोरबा जिले के प्रशासनिक अमले ने भी इस दिशा में बेहतरीन कार्यशैली का प्रदर्शन किया है। जिला कुल प्राप्त आवेदनों में से 98.46 प्रतिशत मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा कर राज्य में दूसरे नंबर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहा है।
  • मुंगेली जिला (तीसरा स्थान): राजस्व सेवाओं के सरलीकरण और समयबद्ध निस्तारण के मामले में मुंगेली जिला भी पीछे नहीं रहा। इस जिले ने प्राप्त प्रकरणों में से 94.16 प्रतिशत मामलों का वैधानिक निपटारा कर राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
  • बालोद जिला (चौथा स्थान): बालोद जिले ने अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तेज बनाते हुए कुल दर्ज प्रकरणों में से 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर (Disposal Rate) हासिल की है और शीर्ष जिलों में अपना नाम सुरक्षित रखा है।
  • धमतरी जिला (टॉप-5 में दमदार मौजूदगी): धमतरी जिले ने नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली की बदौलत अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जिले में ऑटो डायवर्सन के कुल 165 प्रकरण सामने आए थे, जिनमें से 153 मामलों का वैधानिक निराकरण कर दिया गया। धमतरी जिला 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पांचवें स्थान पर रहा है।

यही कारण है कि (That’s why), सहायक संचालक विष्णु प्रसाद वर्मा ने इन जिलों के जिला कलेक्टर्स और राजस्व अधिकारियों की पीठ थपथपाई है, क्योंकि इनका यह शानदार प्रदर्शन नियमित मॉनिटरिंग और आम जनता को राहत पहुंचाने की मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति का नतीजा है।

भविष्य का रोडमैप: आ रहे हैं 4 नए डिजिटल मॉड्यूल्स

यही कारण है कि (That’s why), विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रुकने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले समय में एक पूरी तरह से एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Ecosystem) के निर्माण में जुटा हुआ है। इसके लिए नए फीचर्स और मॉड्यूल्स लॉन्च किए जा रहे हैं:

  • NGDRS API Integration: इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे जमीन के प्रीमियम का निर्धारण बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूरी तरह स्वचालित हो गया है।
  • ‘Diverted to Diverted’ मॉड्यूल: यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से व्यावसायिक), तो इस मॉड्यूल के तहत त्वरित निस्तारण के लिए मात्र 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।
  • मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल: एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसकी समय सीमा जुलाई 2026 तय की गई है।
  • रिकवरी’ मॉड्यूल: पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड (Recovery Dashboard) की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित है।

सुशासन और पारदर्शिता की नई मिसाल

अंततः (Ultimately), यह ऐतिहासिक तकनीकी बदलाव सिर्फ कागजी आंकड़ों का नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाने का एक बेहतरीन माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएं (CG Revenue Digital Services) मिल रही हैं।

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विभागीय रोडमैप के अनुसार, दिसंबर 2026 तक राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग (Satellite and Drone Mapping), टीएनसीपी (TNCP) से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है, जो छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में पूरे देश का रोल मॉडल बना देगा।

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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