
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार बिजजली कंपनियों में डाटा एंट्री और कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों के लिए निकाली गई हालिया वैकेंसी अब विवादों के घेरे में आ गई है। नियमित रिक्तियों (Regular Vacancies) के खिलाफ संविदा और वह भी आउटसोर्सिंग एजेंसी (Outsourcing Agency) के माध्यम से किए जाने वाले इस रिक्रूटमेंट ड्राइव का राज्य में तीखा विरोध शुरू हो गया है।
प्रखर कर्मचारी नेता सुधीर नायक (Employee Leader Sudhir Nayak) ने इस पूरी प्रक्रिया को शिक्षित युवाओं और श्रमिकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सीधे तौर पर ‘शोषणकारी नीति’ करार दिया है।
नियमित पदों के विरुद्ध ‘ठेका प्रथा’ पर गंभीर आरोप
कर्मचारी नेता सुधीर नायक ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि बिजली कंपनी में जो पद पूर्ण रूप से परमानेंट और रेगुलर नेचर (Regular Nature Jobs) के हैं, उन पर महज 2 साल के कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स के आधार पर कर्मचारियों को रखना पूरी तरह से गलत और अमानवीय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति और कुछ नहीं बल्कि सक्षम अधिकारियों (Competent Authority) और निजी ठेकेदारों के गठजोड़ का नतीजा है, जो अपना कमीशन चमकाने और अपनी जेबें भरने के लिए इस प्रकार की ‘शॉर्ट-टर्म’ भर्तियां निकाल रहे हैं। इससे योग्य अभ्यर्थियों की उम्र का वो महत्वपूर्ण पड़ाव बर्बाद हो रहा है, जिसमें वे स्थायी रोजगार पा सकते थे।

पंजाब मॉडल का हवाला, निजीकरण की ओर बढ़ते कदम!
विपक्ष और कर्मचारी यूनियनों द्वारा देश के अन्य राज्यों की तुलनात्मक नीतियों का हवाला दिया जा रहा है। नायक ने कहा, “एक तरफ पंजाब जैसे राज्य आउटसोर्सिंग कल्चर (Outsourcing Culture) को पूरी तरह खत्म कर संविदा और दैनिक वेतन भोगी मजदूरों का नियमितीकरण (Regularization of Workers) कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल अपनी मनमानी पर उतारू है।”
जानकारों का मानना है कि इस तरह के शॉर्ट-टर्म रिक्रूटमेंट से अंततः सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) कमजोर होता है और यह अप्रत्यक्ष रूप से विभाग को पूरी तरह निजीकरण (Privatization Route) की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
पढ़े-लिखे युवाओं में पनप रहा है भारी आक्रोश
भर्ती के नियमों (Recruitment Rules) को लेकर प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों में भी सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है। कंप्यूटर डिग्रीधारी युवाओं का कहना है कि जब वे सालों तक कड़ी मेहनत करके डिग्रियां लेते हैं, तो उनसे क्लैरिकल और टेक्निकल काम बेहद कम मानदेय पर और बिना किसी जॉब सिक्योरिटी (Job Security) के क्यों लिया जा रहा है?
भर्ती रद्द करने और नियमित बहाली की उठी मांग
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार के आउटसोर्सिंग फैसलों (Outsourcing Decisions) का राज्यव्यापी स्तर पर कड़ा विरोध किया जाएगा। सुधीर नायक ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि युवाओं और श्रमिकों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस भ्रामक और नुकसानदेह भर्ती विज्ञापन को तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel the Recruitment) किया जाना चाहिए, और इसके स्थान पर पारदर्शी तरीके से नियमित भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जानी चाहिए।







