
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों (CSPC) में पदोन्नति में आरक्षण (Promotion in Reservation) को लेकर चल रहे विवाद में कल यानी 12 मई 2026 का दिन निर्णायक साबित होने वाला है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम निर्णय सुना सकता है ।
उच्चतम न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार, यह केस अंतिम निपटारे (Post for final disposal) के लिए सूची बद्ध (Listed) किया गया है । इस फैसले का सीधा असर छत्तीसगढ़ के हजारों बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों के करियर पर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट में कल क्या होगा? (Final Disposal Explained)
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा (Justice Pamidighantam Sri Narasimha) और जस्टिस आलोक अराधे (Justice Alok Aradhe) की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है ।
बीती 4 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि इस मामले को 12 मई को फाइनल डिस्पोजल (Final Disposal) के लिए रखा जाए । इसका मतलब यह है कि अदालत अब दलीलों के दौर को समाप्त कर मामले को पूरी तरह निपटाने (Concluding the case) के मूड में है।
हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती
यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16 अप्रैल 2024 के उस फैसले से उपजा है, जिसमें पदोन्नति में आरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया था । हाईकोर्ट के इस निर्णय को ‘छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ’ ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है ।
क्या है मूल विवाद? (Root of the Dispute)
बिजली कंपनियों में विवाद की जड़ पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) देने की प्रक्रिया है।
- हाईकोर्ट का रुख: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पदोन्नति में आरक्षण को अनुचित माना था।
- ग्रेडेशन लिस्ट: कोर्ट ने निर्देश दिया था कि साल 2004 की ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List) के आधार पर ही प्रमोशन दिए जाएं।
- डिमोट करने का आदेश: हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन कर्मचारियों ने आरक्षण का लाभ लेकर पदोन्नति पाई है, उन्हें डिमोट (Demote) किया जाए।
इसी आदेश के बाद राज्य के बिजली महकमे में हड़कंप मच गया था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुँचा।
कल के फैसले का महत्व (Why it Matters?)
कल होने वाली सुनवाई Transition की स्थिति पैदा कर सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो कई अफसरों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। वहीं, अगर सुप्रीम कोर्ट कोई राहत देता है, तो आरक्षित वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत होगी।
E-E-A-T Note: यह खबर आधिकारिक अदालती रिकॉर्ड (Diary No. 5555/2025) और 4 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पत्र के आधार पर तैयार की गई है.
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