
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के लिए न्याय की एक नई किरण जगी है। Jabalpur High Court (जबलपुर उच्च न्यायालय) ने क्लास-III श्रेणी के कर्मचारियों को अन्य श्रेणियों के समान ‘तदर्थ वृद्धि’ (Ad-hoc increase) का लाभ देने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
न्यायमूर्ति मानिंदर एस. भट्टी की एकल पीठ ने Sanjay Pol and Others (संजय पोल एवं अन्य) की याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन को स्पष्ट Guidelines (दिशानिर्देश) दिए हैं।
समान लाभ की मांग (Demand for Equality)
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि बिजली विभाग के क्लास-I, क्लास-II और क्लास-IV कर्मचारियों को जिस तारीख से वेतन वृद्धि और भत्तों का लाभ दिया गया है, उसी तारीख से क्लास-III कर्मचारियों को भी यह लाभ मिलना चाहिए 。 उन्होंने कोर्ट से मांग की कि उनके Salary (वेतन) और Retiral Benefits (रिटायरमेंट के बाद के लाभ) को ब्याज सहित संशोधित किया जाए।
हाई कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें (Key Highlights):
- Representation (अभ्यावेदन): याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारियों के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
- Time Limit (समय सीमा): कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस आवेदन पर 60 Days (60 दिनों) के भीतर तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए।
- Arrears (एरियर): यदि कर्मचारी लाभ के पात्र पाए जाते हैं, तो अगले 30 दिनों के भीतर उन्हें बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
- No Further Litigation: कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कर्मचारी पात्र हैं, तो उन्हें दोबारा अदालत आने के लिए मजबूर न किया जाए।
इंदौर बेंच के फैसले का आधार (Precedent Case)
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील राजा भैया तिवारी ने तर्क दिया कि यह मामला पहले ही इंदौर बेंच द्वारा Sanjay Chourey v. MP Power Management Company केस में सुलझाया जा चुका है । इसी आधार पर Neutral Citation (न्यूट्रल साइटेशन) का उपयोग करते हुए कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
प्रशासनिक जवाबदेही (Administrative Accountability)
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सक्षम अधिकारियों को कानून के अनुसार और पुराने फैसलों को ध्यान में रखते हुए Speaking Order (एक विस्तृत और स्पष्ट आदेश) जारी करना होगा। सरकारी अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ला ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश उन हजारों बिजली कर्मचारियों के लिए Significant Relief (बड़ी राहत) है, जो लंबे समय से अन्य वर्गों के समान वेतन भत्तों की प्रतीक्षा कर रहे थे।
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