
Digital Avatar रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने के लिए राज्य सरकार ने ‘ज्ञानभारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान को युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत अब तक प्रदेश की 4,191 पांडुलिपियों का डिजिटल सर्वे संपन्न हो चुका है, जिससे सदियों पुराने ज्ञान को नई तकनीक के जरिए सुरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
26 जिलों में समितियों का गठन, जमीनी स्तर पर काम शुरू
मार्च 2026 से शुरू हुए इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य के कुल 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन कर नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। शेष 7 जिलों में भी जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
संस्कृति विभाग इस पूरी परियोजना का नोडल विभाग है, जो क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर सर्वेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।
डिजिटल संरक्षण से सुरक्षित होगा इतिहास
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य निजी संग्रहालयों, संस्थाओं और व्यक्तियों के पास मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान करना और उन्हें ‘ज्ञानभारतम ऐप’ के माध्यम से सूचीबद्ध करना है।
- शुरुआती लक्ष्य: केंद्र सरकार ने शुरुआत में 148 पांडुलिपियों का डेटा साझा किया था।
- वर्तमान उपलब्धि: वर्तमान में 6 जिलों में सघन सर्वे जारी है और 4 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीकरण हो चुका है।
- प्रक्रिया: ग्राम और क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की गई है ताकि कोई भी ऐतिहासिक दस्तावेज छूट न जाए।
यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ की प्राचीन लिपियों और ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि शोधकर्ताओं और भावी पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य भंडार को डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित कर देगी।







