Chhattisgarhप्रमुख खबरें

CM साय का नया ‘कवच’: टोयोटा छोड़ अब स्कॉर्पियो की सवारी, जानें क्यों एक ही नंबर की होती हैं काफिले की सभी गाड़ियां

New Convoy रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के काफिले में बड़ा बदलाव नजर आया है। अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल की पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे सीएम साय अब नई नवेली Scorpio की सवारी करेंगे। शनिवार को जब सीएम का काफिला कुशाभाऊ ठाकरे परिसर (भाजपा कार्यालय) पहुंचा, तो वहां मौजूद कार्यकर्ता नई गाड़ियों को देख दंग रह गए।

क्यों बदली गईं गाड़ियां?

काफिले में एक-दो नहीं बल्कि 6 नई स्कॉर्पियो शामिल की गई हैं, जो पूरी तरह से बुलेटप्रूफ हैं। जब मीडिया ने इस बदलाव पर सवाल किया तो सीएम साय ने बड़ी सादगी से जवाब दिया— “गाड़ियां पुरानी हो गई थीं, कभी-कभी बीच रास्ते में बंद हो जाती थीं, इसलिए इन्हें बदलना जरूरी था।”

नंबर का खेल: 3026 में छिपा है संदेश?

सीएम साय की नई गाड़ी का नंबर CG 03 A 3026 है। चर्चा है कि यह नंबर न केवल प्रशासनिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है, बल्कि 3026 तक के विकास लक्ष्यों और भविष्य की रणनीति की ओर भी संकेत करता है।


तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल की गाड़ी

इतिहास: जब रमन सिंह और भूपेश बघेल की गाड़ियों ने बटोरी थीं सुर्खियां

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की गाड़ियों और उनके नंबरों का हमेशा से अपना एक ‘क्रेज’ रहा है:

  • भूपेश बघेल और ‘BB 0023’: फरवरी 2023 में तत्कालीन सीएम बघेल ने पजेरो छोड़कर टोयोटा फॉर्च्यूनर अपनाई थी। गाड़ियों का नंबर था 0023। इसके दो मायने थे— पहला, उनका जन्म दिनांक 23 है, और दूसरा, सीरीज ‘BB’ का अर्थ ‘भूपेश बघेल’ निकाला गया।
  • डॉ. रमन सिंह और ‘0004’: 2017 में डॉ. रमन ने सफारी छोड़कर 16 बुलेटप्रूफ पजेरो काफिले में शामिल की थीं। उनकी गाड़ियों का नंबर 0004 था। तब राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि डॉ. रमन अपने चौथे कार्यकाल की तैयारी का संकेत दे रहे हैं।

सुरक्षा का राज: क्यों एक ही नंबर की होती हैं कई गाड़ियां?

अक्सर लोग हैरान होते हैं कि वीवीआईपी काफिले में सभी गाड़ियों के नंबर एक जैसे क्यों होते हैं? इसके पीछे कोई शौक नहीं, बल्कि हाई-लेवल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल है:

  1. दुश्मन को चकमा (Decoy): हमलावर को भ्रमित करने के लिए काफिले में कई ‘डमी’ गाड़ियां होती हैं। एक जैसा नंबर होने से यह पहचानना नामुमकिन हो जाता है कि सीएम असल में किस गाड़ी में बैठे हैं।
  2. गोपनीयता और कवर: इमरजेंसी की स्थिति में सभी गाड़ियां एक समान दिखने और एक ही नंबर होने के कारण सुरक्षा घेरा (Security Cover) बनाने में मदद मिलती है।
  3. स्पेशल प्रोटोकॉल: यह एसपीजी (SPG) और पुलिस का एक मानक तरीका है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।

यह भी पढ़ें- मिटने से बच गया छत्तीसगढ़ का इतिहास! 4191 दुर्लभ पांडुलिपियों का ‘Digital Avatar’, 26 जिलों में ज्ञानभारतम का मेगा सर्वे

S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
Back to top button