
न्यूज डेस्क। लोकसभा में देश की आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद (Left Wing Extremism) के मुद्दे पर गरमागरम चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि जो लोग व्यवस्था को नकार कर हथियार उठाएंगे, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का लक्ष्य
अमित शाह ने सदन को याद दिलाया कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से मिटाने की समय सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे दुर्गम इलाकों से अब ‘लाल आतंक’ का साया हट रहा है और वहां विकास की नई किरण पहुंच रही है।
शाह के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
“विकास नहीं, विदेशी विचारधारा है नक्सलवाद”
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक खास विचारधारा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनके आदर्श बिरसा मुंडा या भगत सिंह नहीं, बल्कि विदेशी ‘माओ’ हैं। शाह ने आरोप लगाया कि 1970 के दशक में राजनीतिक लाभ के लिए इस विचारधारा को पनपने दिया गया।
कांग्रेस के 60 सालों पर तीखा प्रहार
विपक्ष पर हमला बोलते हुए शाह ने सवाल किया, “आजादी के बाद 60 साल तक कांग्रेस का शासन रहा, फिर आदिवासियों तक स्कूल, बिजली और मोबाइल टावर क्यों नहीं पहुंचे?” उन्होंने कहा कि जो लोग आज हिसाब मांग रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि उनके समय में विकास आदिवासियों के द्वार तक क्यों नहीं पहुंचा।
क्रांतिकारियों से तुलना पर जताई आपत्ति
सदन में चर्चा के दौरान जब कुछ सदस्यों ने नक्सलियों की तुलना शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से की, तो शाह भड़क गए। उन्होंने कहा:
“यह कैसी हिमाकत है? भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे। उनकी तुलना उन लोगों से करना जो संविधान को नहीं मानते और निर्दोषों की हत्या करते हैं, महापुरुषों का अपमान है।”
‘लाल आतंक’ ने खुद जलाए स्कूल और बैंक
शाह ने खुलासा किया कि वामपंथी उग्रवादियों ने जानबूझकर आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नष्ट किया। उन्हें डर था कि अगर आदिवासी पढ़-लिख गए, तो वे उनके बहकावे में नहीं आएंगे। इसीलिए उन्होंने स्कूल, अस्पताल और बैंक जलाए ताकि इलाका पिछड़ा रहे।
मोदी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड
गृह मंत्री ने पिछले 12 वर्षों के कार्यों को गिनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 हटाना, राम मंदिर निर्माण, और महिला आरक्षण जैसे बड़े फैसलों के साथ-साथ ‘नक्सल मुक्त भारत’ का अभियान सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि अब बस्तर के गांवों में राशन की दुकानें, आधार कार्ड और स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) सुलभ हैं।
विकास के आंकड़े: क्यों पिछड़ गया बस्तर?
शाह ने साक्षरता और आय के आंकड़ों के जरिए समझाया कि नक्सलवाद ने कैसे प्रगति रोकी:
- साक्षरता दर: नक्सल प्रभावित इलाकों में साक्षरता दर आज भी राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे रखने की साजिश रची गई।
- प्रति व्यक्ति आय: बस्तर (190 रुपये) और नक्सलवाड़ी (500 रुपये) की तुलना में सहरसा और बलिया जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद नहीं पनपा क्योंकि वहां की भौगोलिक स्थिति (जंगल न होना) उग्रवादियों के अनुकूल नहीं थी।
राहुल गांधी और भूपेश बघेल को लेकर गंभीर टिप्पणी
नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान सदन में अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी के साथ पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी तीखी टिप्पणी की है। शाह की टिप्पणी पर संदन में हंगामा भी हुआ। अमित शाह ने राहुल गांधी और भूपेश बघेल को लेकर क्या कहा है, जानने के लिए chaturpost.com से जुड़े रहिए







