
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या से जुड़े मामलों में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 20 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब नक्सली (LWE cadre) अधिकृत अधिकारियों के सामने भी आत्मसमर्पण कर सकेंगे। यह फैसला गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरेंडर प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाना है।
इस नई Naxal Surrender policy के तहत राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अधिकृत किया है कि वे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की जानकारी दर्ज कर उसे अपडेट करें। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद है।
🔵 क्या है नया नियम? (What’s New in Policy)
नई अधिसूचना के मुताबिक, अब नक्सली निम्न अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर सकते हैं:- जिला मजिस्ट्रेट (DM)
- जिला पुलिस अधीक्षक (SP)
- रेंज DIG और IG (Ops)
- स्पेशल ब्रांच के अधिकारी
- SDM और SDPO
- CAPF और सेना की इकाइयाँ (राज्य के बाहर भी)
🟣 सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? (Why This Decision)
इस बदलाव के पीछे मुख्य उद्देश्य है:
- सरेंडर प्रक्रिया को सरल बनाना
- नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास को तेज करना
- विश्वास बढ़ाना कि वे कहीं भी सुरक्षित आत्मसमर्पण कर सकते हैं
- केंद्र सरकार के 2013 और 2022 के दिशा-निर्देशों का पालन
इसके अलावा, यह कदम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
🟠 इसका असर क्या होगा? (Impact of Naxal Surrender Policy)
इस नई Naxal Surrender policy का असर कई स्तरों पर देखने को मिलेगा:
- ✅ सरेंडर की संख्या बढ़ सकती है
- ✅ नक्सलियों को ज्यादा विकल्प मिलने से डर कम होगा
- ✅ पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनेगा
- ✅ पुनर्वास योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा
🟤 प्रक्रिया कैसे काम करेगी? (How It Works)
- आत्मसमर्पण करने वाला व्यक्ति अपनी जानकारी देगा
- अधिकारी उसे निर्धारित फॉर्म में दर्ज करेंगे
- S&R अधिकारी सत्यापन कराएंगे
- इसके बाद पुनर्वास प्रक्रिया शुरू होगी
FAQs
अब नक्सली DM, SP, DIG, IG, SDM, SDPO, CAPF और सेना की इकाइयों के सामने भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
सरेंडर प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाने तथा नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए यह बदलाव किया गया है।
आत्मसमर्पण के बाद जानकारी दर्ज कर सत्यापन किया जाएगा और फिर पुनर्वास योजना लागू होगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। नई Naxal Surrender policy से न केवल आत्मसमर्पण प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। आने वाले समय में इसके परिणाम जमीन पर दिखने की उम्मीद है।
Chhattisgarh Naxal Policy, surrender rules update, LWE cadre surrender, Maoist rehabilitation, Home Ministry guidelines

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ सरकार ने बदली ‘शासकीय सेवक’ व कर्मचारी संघ की परिभाषा, देखिए अधिसूचना







