
रायपुर (Chaturpost): छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय सेवकों (Government Servants) के लिए जारी एक विवादित आदेश को महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा कल जारी किए गए उस निर्देश को फिलहाल स्थगित (Suspended) कर दिया गया है, जिसमें कर्मचारियों के किसी भी राजनीतिक दल या संगठन में पद धारण करने पर रोक लगाई गई थी।
क्या था पूरा मामला? (The Controversy)
बीते कल, सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव अंशिका ऋषि पाण्डेय के हस्ताक्षर से एक आदेश जारी हुआ था। इसमें ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम’ का हवाला देते हुए कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल (Political Party) का सक्रिय सदस्य (Active Member) नहीं बन सकता। साथ ही, बिना अनुमति किसी अन्य पद पर आसीन होने पर भी प्रतिबंध (Restriction) लगा दिया गया था।
फेडरेशन का कड़ा विरोध (Protest by Federation)
आदेश जारी होते ही छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मोर्चा खोल दिया। फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने इस आदेश को कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताया।
- कमल वर्मा ने तत्काल WhatsApp के माध्यम से सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग और उप सचिव अंशिका पाण्डेय को अपना विरोध दर्ज कराया।
- उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी (Warning) दी थी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो भविष्य में हर स्तर पर उग्र विरोध प्रदर्शन (Protest) किया जाएगा।
सरकार ने क्यों बदला फैसला? (The U-Turn)
फेडरेशन के तीखे तेवर और भारी दबाव और विरोध को देखते हुए शासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। आज जारी नए आदेश (क्रमांक: GENS-2101/2602/2026-GAD-5) में स्पष्ट किया गया है कि:
“विषयांतर्गत संदर्भित परिपत्र द्वारा जारी किए गए निर्देश आगामी आदेश पर्यंत तक के लिए स्थगित (Postponed) किए जाते हैं।”
नए आदेश की खास बातें
- त्वरित कार्रवाई: विरोध के बाद 24 घंटे के भीतर आदेश पर रोक लगी।
- पुरानी व्यवस्था बहाल: आगामी आदेश (Next Order) तक पुराना सर्कुलर प्रभावी नहीं होगा।
- डिजिटल हस्ताक्षर: ताजा आदेश भी उप सचिव अंशिका ऋषि पाण्डेय द्वारा डिजिटल साइन किया गया है।








