
रायपुर, न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ में विधि और विधायी कार्य विभाग ने राज्य के प्रतिष्ठित बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार (Barrister Thakur Chhedilal Award) से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है । यह पुरस्कार राज्य में विधि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है । इस बदलाव का सीधा असर उन सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो इस पुरस्कार के लिए आवेदन करने के इच्छुक हैं ।
नियमों में संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी? (Why the Change?)
राज्य सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि कुछ मामलों में शासकीय कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी सीधे तौर पर इस पुरस्कार के लिए अपने आवेदन प्रस्तुत कर रहे थे । सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जारी पूर्व निर्देशों के आलोक में, पारदर्शिता बनाए रखने और प्रशासनिक अनुशासन (Administrative Discipline) सुनिश्चित करने के लिए ‘बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार नियम, 2007’ के नियम 6 में बदलाव किया गया है ।
क्या हैं नए नियम? (The New Guidelines)
सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए संशोधनों के अनुसार:
- नियम 6 (4अ): यदि कोई शासकीय कर्मचारी या अधिकारी पुरस्कार के लिए आवेदन करना चाहता है, तो उसे सीधे आवेदन देने के बजाय अपने संबंधित प्रशासनिक विभाग (Administrative Department) के माध्यम से ही आवेदन प्रस्तुत करना होगा । यह प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग के 7 दिसंबर 2009 के ज्ञापन के अनुरूप होगी ।
- नियम 6 (4ब): यदि चयन समिति या जूरी स्वतः संज्ञान लेते हुए किसी अधिकारी को पुरस्कार के लिए चुनती है, तो उस स्थिति में प्रशासनिक विभाग को मुख्य सचिव के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी का अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा ।
क्यों है यह पुरस्कार महत्वपूर्ण? (Significance)
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार छत्तीसगढ़ में एक प्रतिष्ठित सम्मान है । यह पुरस्कार उन लोगों को प्रोत्साहित करता है जिन्होंने कानून के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल की है । नियम में यह संशोधन यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी तंत्र के भीतर पुरस्कार के नामांकन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित (Streamlined) और निष्पक्ष बनी रहे।
संक्षेप में मुख्य बिंदु (Key Highlights)
यहाँ नए संशोधन के प्रमुख पहलुओं को समझना आवश्यक है:
- आवेदन प्रक्रिया: अब सरकारी कर्मचारी सीधे आवेदन नहीं भेज पाएंगे, बल्कि विभागीय रूट अपनाना अनिवार्य होगा ।
- अनुमोदन: यदि किसी अधिकारी का चयन स्वतः होता है, तो मुख्यमंत्री की सहमति अनिवार्य है ।
- उद्देश्य: विधि के क्षेत्र में किए गए कार्यों को उचित मान्यता और प्रोत्साहन देना ।
- अधिसूचना: यह नया नियम नवा रायपुर के मंत्रालय से विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी किया गया है ।
आगे की प्रक्रिया (Next Steps)
राज्य के सभी संबंधित कार्यालयों और इच्छुक आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे नए नियमों का कड़ाई से पालन करें। इस संशोधन से पुरस्कार चयन प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता (Clarity) आएगी और प्रशासनिक पदानुक्रम (Administrative Hierarchy) का उचित सम्मान सुनिश्चित होगा। छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल को भविष्य में होने वाले पुरस्कार वितरण समारोहों के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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