कर्मचारी हलचल

संविदा बिजली कर्मियों की छंटनी पर फूटा गुस्सा, समर्थन में उतरा छत्तीसगढ़ महासंघ; सीएम से दखल की मांग

रायपुर। बिजली कंपनियों में संविदा और आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी (Arbitrary Retrenchment) के खिलाफ श्रमिक संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

इस दमनकारी नीति के विरोध में अब छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी संघ (महासंघ) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ के इस बड़े महासंघ ने सीधे मुख्यमंत्री (Chief Minister) को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप (Immediate Intervention) करने की मांग की है। महासंघ के इस रुख से पूरे बिजली महकमे में हड़कंप मच गया है।

आखिर कहां और क्यों हो रही है 10,000 कर्मियों की छंटनी?

दरअसल, यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा का है, जहां बिजली क्षेत्र में निजीकरण (Privatization) के बाद से संविदा कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। टाटा पावर (Tata Power) के प्रबंधन के तहत आने वाली चारों विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs)—TPCODL, TPSODL, TPWODL और TPNODL में कार्यरत 10,000 से अधिक अनुभवी संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को नौकरी से बाहर निकालने की तैयारी कर ली गई है।

निजी कंपनियां इसे प्रशासनिक पुनर्गठन (Administrative Restructuring) और खर्च में कटौती (Cost Cutting) का नाम दे रही हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय स्तर के महासंघों ने इसे पूरी तरह से अमानवीय और गैर-कानूनी व्यवहार (Inhuman and Illegal Behavior) करार दिया है।

ओडिशा के आंदोलन को छत्तीसगढ़ से मिली संजीवनी

ओडिशा के स्थानीय संगठन निखिल ओडिशा विद्युत मजदूर महासंघ द्वारा किए जा रहे राज्यव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन (Democratic Protest) को अब छत्तीसगढ़ के बिजली कर्मचारी नेताओं ने अपना खुला समर्थन (Full Support) दे दिया है।

अखिल भारतीय विद्युत सेवानिवृत्त कर्मचारी महासंघ के महामंत्री अरुण कुमार देवांगन और छत्तीसगढ़ महासंघ के प्रदेश महामंत्री पुनारद राम साहू रायपुर से संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि देश और राज्यों की लाइफलाइन (Lifeline) कहे जाने वाले विद्युत उद्योग में काम करने वाले गरीब संविदा कर्मियों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पड़ोसी राज्य का बड़ा संगठन होने के नाते छत्तीसगढ़ का महासंघ इस लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

छंटनी से पूरे क्षेत्र में ब्लैकआउटऔर हादसों का खतरा

बिजली विशेषज्ञों और श्रमिक संघों का मानना है कि तकनीकी रूप से कुशल और अनुभवी वर्कफोर्स (Experienced Technical Workforce) को अचानक नौकरी से निकालने का खामियाजा सिर्फ उन 10,000 परिवारों को ही नहीं, बल्कि राज्य के 95 लाख से अधिक विद्युत उपभोक्ताओं (Electricity Consumers) को भुगतना पड़ेगा। इससे व्यवस्था में कई गंभीर तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियाँ (Technical & Safety Challenges) पैदा हो सकती हैं:

राष्ट्रवादी सरकार और पीएम मोदी के भरोसे का दिया हवाला

मुख्यमंत्री को भेजे गए कड़े विरोध पत्र (Memorandum) में महासंघ ने एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक रुख अपनाया है। पत्र में याद दिलाया गया है कि वर्तमान में राज्य में एक राष्ट्रवादी विचारधारा की सरकार (Nationalist Government) सत्तासीन है। देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अटूट विश्वास के साथ मुख्यमंत्री का चुनाव किया है, वह ठीक वैसा ही है जैसे एक जौहरी ही असली हीरे की पहचान (True Identification) कर सकता है।

विगत दशकों में पूर्ववर्ती सरकारों की गलत नीतियों के कारण आज राज्य की करीब 5 करोड़ जनता और लगभग 30 हजार नियमित व संविदा कर्मचारी निजी प्रबंधन (Private Management) की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में वर्तमान संवेदनशील सरकार से न्याय की पूरी उम्मीद है।”

महासंघ की ओर से रखी गई 6 सूत्रीय मुख्य मांगें (Key Demands)

इस गंभीर औद्योगिक विवाद को सुलझाने और बिजली क्षेत्र में औद्योगिक शांति (Industrial Peace) बहाल करने के लिए महासंघ ने सरकार के सामने 6 सूत्रीय एजेंडा रखा है:

त्रिपक्षीय वार्ता ही एकमात्र रास्ता

छत्तीसगढ़ महासंघ और राष्ट्रीय संगठनों ने साफ कर दिया है कि इस बेहद संवेदनशील उद्योग (Sensitive Industry) में विवाद को बढ़ाने के बजाय सरकार को तुरंत त्रिपक्षीय वार्ता (Tripartite Talks) की पहल करनी चाहिए। इसमें सरकार के प्रतिनिधि, आंदोलनरत यूनियन के नेता और टाटा पावर का निजी प्रबंधन एक टेबल पर बैठकर समाधान निकालें।

इस ज्ञापन की आधिकारिक प्रतिलिपि (Official Copy) ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव (श्रम एवं ऊर्जा), श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) और विद्युत विनियामक आयोग (OERC) के अध्यक्ष को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। अब देखना यह है कि छत्तीसगढ़ महासंघ की इस हुंकार के बाद क्या संविदा कर्मचारियों को उनका हक मिल पाता है या यह आंदोलन और उग्र रूप अख्तियार करेगा।

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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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