
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी (Chhattisgarh State Power Generation Company) के तीन प्रमुख संयंत्रों— डीएसपीएम (DSPM) कोरबा पूर्व, हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPS) कोरबा पश्चिम और मड़वा के कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
लंबे समय से लंबित मांगों और प्रमोशन (Promotion) से जुड़े मुद्दों को लेकर अब कर्मचारी एकजुट हो चुके हैं और उन्होंने एक बड़े आंदोलन (Protest) की तैयारी शुरू कर दी है।
फेडरेशन-1 की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
हाल ही में छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-1 (Chhattisgarh Vidyut Karmachari Sangh Federation-1) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि प्रबंधन ने कर्मचारियों की जायज मांगों पर जल्द ही सकारात्मक पहल (Positive Response) नहीं की, तो राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन (Phase-wise Agitation) शुरू किया जाएगा।
इस बैठक में फेडरेशन के महासचिव आरसी चेट्टी (RC Chetti) और प्रांतीय प्रचार सचिव पवन दास विशेष रूप से मौजूद रहे। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि कंपनी राष्ट्रीय स्तर पर लगातार कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी (Neglect) की जा रही है।
इन पदों पर वर्षों से नहीं मिला प्रमोशन, खाली पड़े हैं पद
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनी में तकनीकी वर्ग (Technical Cadre) के कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके कारण वर्तमान स्टाफ पर काम का दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है।
- वरिष्ठ संयंत्र सहायक-2 (मैकेनिकल): इसके करीब 70 पदों पर प्रमोशन रुका हुआ है।
- संयंत्र सहायक-1 (मैकेनिकल): इसके लगभग 45 कर्मचारियों को लंबे समय से पदोन्नति नहीं मिल पाई है।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक पूरी ईमानदारी से सेवा (Service) देने के बावजूद उन्हें उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, जिससे पूरे कर्मचारी वर्ग में भारी असंतोष (Dissatisfaction) व्याप्त है।
कर्मचारियों की 7 सूत्रीय मांगें (7-Point Demands)
फेडरेशन ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए प्रबंधन के सामने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे इन सात सूत्रीय मांगों को लेकर अंतिम समय तक संघर्ष (Struggle) करने के लिए तैयार हैं:
- तत्काल पदोन्नति (Immediate Promotion): संयंत्रों में पदोन्नति से वंचित सभी पात्र तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों को तुरंत उच्च पदों पर प्रमोट किया जाए।
- 840 समाप्त पदों की बहाली (Restoration of Posts): कंपनी प्रबंधन द्वारा पूर्व में समाप्त किए गए 840 पदोन्नति (Promotion) के पदों को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।
- पदों का पुनर्गठन (Restructuring): कर्मचारी वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए पदों की नई और व्यावहारिक पद संरचना (Restructuring) तैयार की जाए।
- पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme): सभी पात्र बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूर्ण रूप से लागू और बहाल किया जाए।
- ओवरटाइम और इंसेंटिव (Overtime & Incentive): संयंत्रों में काम के बढ़ते दबाव को देखते हुए कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम और इंसेंटिव योजना को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।
- सुरक्षा एवं अग्निशमन विभाग: सुरक्षा तथा फायर फाइटिंग विभाग (Fire Fighting Dept) के कर्मचारियों की लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को तुरंत शुरू किया जाए।
- ठेका और आउटसोर्स श्रमिक हित: संयंत्रों में कार्यरत ठेका (Contract) और आउटसोर्स कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और सभी श्रम कानूनों (Labor Laws) का पूरा लाभ दिलाया जाए।
8 से 10 जून के बीच सौंपा जाएगा ज्ञापन, मंत्रियों-विपक्ष को भी घेरेंगे
महासचिव आरसी चेट्टी ने बताया कि प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने के लिए 8 से 10 जून के बीच तीनों संयंत्रों के मुख्य अभियंताओं (Chief Engineers) के माध्यम से प्रबंध निदेशक (Managing Director) के नाम ज्ञापन (Memorandum) सौंपा जाएगा। इस दौरान भारी संख्या में बिजली कर्मी उपस्थित रहकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे।
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फेडरेशन ने स्पष्ट अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर इन मांगों पर विचार कर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेगा। इसके तहत मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपकर बिजली कंपनी के इस तानाशाही रवैये से अवगत कराया जाएगा।






