
न्यूज डेस्क: केंद्रीय कर्मचारियों और विशेषकर भारतीय रेलवे (Indian Railways) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है । देश में 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर हलचल बेहद तेज हो गई है । इसी कड़ी में इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने हैदराबाद में 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और प्रमोशन (Salary, Allowances, and Promotion) से जुड़ी मांगों का एक बेहद मजबूत और विस्तृत प्रजेंटेशन (Comprehensive Presentation) पेश किया है ।
रेलवे यूनियनों की तरफ से इस बार जो मांगें रखी गई हैं, अगर उन्हें वेतन आयोग मंजूरी दे देता है, तो रेलवे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और भत्तों में बंपर उछाल (Bumper Salary Hike) देखने को मिलेगा । एसोसिएशन ने साफ तौर पर कहा है कि रेलवे के टेक्निकल सुपरवाइजर्स (Technical Supervisors) इस समय भारी करियर गतिरोध या स्टैग्नेशन (Career Stagnation) का सामना कर रहे हैं, जिसे तुरंत दूर किया जाना बेहद जरूरी है ।
हैदराबाद में हुई 8th CPC के साथ अहम बैठक (Crucial Meeting)
भारतीय रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) के पदाधिकारियों ने 19 मई 2026 को हैदराबाद में 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के मेंबर सेक्रेटरी (Member Secretary) के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की । इस बैठक में एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी (General Secretary) के.वी. रमेश ने एक पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन (Power Point Presentation) के जरिए रेलवे के जूनियर इंजीनियरों (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSE) की समस्याओं को आयोग के सामने प्रमुखता से रखा ।
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एसोसिएशन ने आयोग को बताया कि रेलवे के ये तकनीकी कर्मचारी दिन-रात बेहद जोखिम भरे माहौल (Hazards Nature of Work) में काम करते हैं । ट्रेनों के सुरक्षित संचालन (Safe Train Operations) में इनकी भूमिका सबसे बड़ी होती है, लेकिन इसके बावजूद उनके वेतन स्तर (Pay Levels) और पदोन्नति के अवसरों में भारी विसंगतियां (Pay Anomalies) हैं ।
न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹52,600 करने की पुरजोर मांग (Minimum Pay Revision)
इसके साथ ही, एसोसिएशन ने अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल्स के लिए अलग-अलग फिक्सेशन फैक्टर्स (Fixation Factors) लागू करने का भी प्रस्ताव दिया है, ताकि उच्च पदों पर बैठे तकनीकी विशेषज्ञों को उनके काम के अनुरूप सही पारिश्रमिक मिल सके ।
फिटमेंट फैक्टर को लेकर फॉर्मूला पेश: जानिए कितनी बढ़ेगी सैलरी (New Fitment Factor Formula)
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने सबसे महत्वपूर्ण चर्चा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर हुई, क्योंकि इसी फैक्टर के आधार पर सभी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय की जाती है। IRTSA ने इसके लिए एक बेहद तार्किक और नया फॉर्मूला (New Formula) सुझाया है:
- लेवल-1 के पदों के लिए (Level-1 Posts): शुरुआती स्तर के कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर को 2.92 तय करने की बात कही गई है ।
- लेवल-6, 7 और 8 के पदों के लिए (Level-6 to 8): रेलवे के सुरक्षा श्रेणी (Safety Category) के पदों और टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए फिटमेंट फैक्टर $2.92 \times 1.2 = 3.50$ करने की मांग की गई है ।
- लेवल-9 से 12 के पदों के लिए (Level-9 to 12): मध्य स्तर के प्रशासनिक और तकनीकी पदों (Mid-position Posts) के लिए फिटमेंट फैक्टर $2.92 \times 1.3 = 3.80$ अपनाने का पुरजोर समर्थन किया गया है ।
अगर इस 3.50 और 3.80 के फिटमेंट फैक्टर वाले फॉर्मूले को 8th CPC मान लेता है, तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी (Take-Home Salary) में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जाएगी।
वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियरों (SSE) को मिले ग्रुप-बी राजपत्रित दर्जा (Group-B Gazetted Status)
इस समस्या के समाधान के लिए IRTSA ने मांग की है कि:
- सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) के सभी पदों को तुरंत ग्रुप-बी राजपत्रित (Group-B Gazetted) का दर्जा दिया जाए ।
1. सीधे भर्ती होने वाले ग्रेजुएट इंजीनियर्स (Graduate Engineers) जो SSE के रूप में ज्वाइन करते हैं, वे सालों-साल अपने एंट्री ग्रेड (Entry Grade) में ही अटके रहते हैं, इस स्टैग्नेशन को तत्काल खत्म किया जाए ।
2. टेक्निकल सुपरवाइजर्स के लिए लेवल-7 से शुरू होने वाला एक नया ‘फाइव ग्रेड स्ट्रक्चर’ (Five Grade Structure) तैयार किया जाए ।
भत्तों में सुधार और बंद भत्तों को दोबारा शुरू करने पर जोर (Allowances and Incentives)
वेतन विसंगतियों के अलावा, कर्मचारियों के दैनिक और मासिक भत्तों (Allowances Related to Technical Supervisors) पर भी विस्तार से चर्चा की गई । IRTSA के जनरल सेक्रेटरी ने आयोग को निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा:
- नाइट ड्यूटी और ओवर टाइम (Night Duty & Over Time Allowance): रात में काम करने वाले और एक्स्ट्रा ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के नाइट ड्यूटी अलाउंस और ओवर टाइम अलाउंस की दरों में संशोधन हो ।
- PCO अलाउंस की बहाली (PCO Allowance Withdrawal Issue): लेवल-8 में काम कर रहे सीनियर सेक्शन इंजीनियरों (SSE) के रोके गए प्रोडक्शन कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (PCO) अलाउंस को फिर से बहाल करने की वकालत की गई । आयोग को समझाया गया कि यह इंसेंटिव सिस्टम पूरी तरह से रेलवे के भीतर सेल्फ-फाइनेंसिंग (Self-Financing System) है, जो वर्कशॉप और प्रोडक्शन यूनिट्स की उत्पादकता (Productivity) को बढ़ाता है ।
- जोखिम और दुर्घटना मुक्त सेवा पुरस्कार (Risk & Hardship Allowance): ओपन लाइन में काम करने वाले फील्ड इंजीनियर्स और स्टाफ के लिए ‘एक्सीडेंट-फ्री सर्विस अवार्ड’ और ‘रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस’ का विस्तार किया जाना चाहिए ।
- ग्रुप इंसेंटिव स्कीम (Group Incentive Scheme): रेलवे बोर्ड के मानकों के आधार पर ओपन लाइन में रखरखाव (Maintenance Activities) करने वाले कर्मचारियों के लिए नई ग्रुप इंसेंटिव योजना शुरू की जाए ।
MACP योजना को लेकर कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला (MACP Implementation w.e.f. 2006)
कर्मचारियों को मिलने वाले मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम (MACP Scheme) को लेकर भी एक बड़ा मुद्दा उठाया गया । IRTSA ने मांग की है कि कर्मचारियों के प्रारंभिक ट्रेनिंग पीरियड (Training Period) को भी MACPS के उद्देश्य के लिए सेवा अवधि में शामिल किया जाना चाहिए । इसके अलावा, विभिन्न अदालतों के फैसलों (Court Judgements) का हवाला देते हुए इस स्कीम को 01.01.2006 से पूर्ण रूप से लागू करने की मांग दोहराई गई है ताकि कर्मचारियों को उनका पुराना बकाया मिल सके ।
रेलवे कर्मचारियों की इन तार्किक और मजबूत मांगों पर 8वें वेतन आयोग के मेंबर सेक्रेटरी ने सकारात्मक रुख दिखाया है और इन तकनीकी विसंगतियों को दूर करने का आश्वासन दिया है । अब देखना यह होगा कि आयोग सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपते समय इन मांगों को किस हद तक शामिल करता है ।






