
Education रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती और पदोन्नति नियम जारी किया है। इसका प्रकाशन 13 फरवरी को किया गया है। नोटिफिकेशन के अनुसार यह नियम प्रकाशन की तारीख से लागू होगा।
व्याख्यात (पंचायत) / व्याख्याता (नगरीय निकाय), शिक्षक (पचायत) / शिक्षक (नगरीय निकाय) एवं सहायक शिक्षक (पंचायत) / सहायक शिक्षक (नगरीय निकाय) से अभिप्रेत है, विभाग की शालाओं में अध्यापन के लिए नियुक्त और जिला पंचायत, जनपद पंचायत, नगर निगम, नगरपालिका या नगर पंचायत के प्रशासकीय नियंत्रणाधीन व्यक्ति,
सेवा का गठन
(क) वे व्यक्ति, जो इन नियमों के प्रारम्भ होने के समय, अनुसूची-एक में विनिर्दिष्ट पदों को मूल रूप से या स्थानापन्न हैसियत से धारण कर रहे हों;
(ख) वे व्यक्ति, जो इन नियमों के प्रारंभ होने के पूर्व सेवा में भर्ती किए गए हों;
(ग) वे व्यक्ति, जो इन नियमों के उपबन्धों के अनुसार सेवा में भर्ती किए गए हों;
(घ) वे व्यक्ति, जो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अधिसूचना दिनांक 17 अगस्त, 2012 के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ शिक्षक (पंचायत) संवर्ग (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2012 के उपबंधों द्वारा भर्ती किए गए हों और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की अधिसूचना दिनांक 08 मार्च 2013 के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ शिक्षक (नगरीय निकाय) संवर्ग (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2013 के द्वारा भर्ती किए गए हैं एवं आठ वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हों एवं जिनके द्वारा, नियोक्ता विभाग में रहने का विकल्प नहीं दिया गया है एवं संविलियन के माध्यम से सेवा में शामिल किए गए हों (उपरोक्त खण्ड संविलियन के लिए पात्र पाए गए व्यक्तियों को छोड़कर संविलियन के पश्चात् शून्य समझा जाएगा)।
5. वर्गीकरण, वेतनमान इत्यादि सेवा का वर्गीकरण, सेवा में सम्मिलित पदों की संख्या और उससे संलग्न वेतनमान, अनुसूची-एक में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार होंगेः
लेकिन शासन, सेवा में सम्मिलित पदों की संख्या एवं वेतनमान में, समय-समय पर, या तो स्थायी या अस्थायी आधार पर, वृद्धि या कमी कर सकेगा।
6. भर्ती का तरीका (1) इन नियमों के प्रारंभ होने के पश्चात्, सेवा में भर्ती, निम्नलिखित तरीकों से की जाएगी, अर्थात्ः-
(क) चयन (प्रतियोगी परीक्षा/साक्षात्कार) और सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से सीधी भर्ती द्वारा;
(ख) सेवा के सदस्यों की पदोन्नति द्वारा;
(ग) ऐसे व्यक्तियों के स्थानांतरण/प्रतिनियुक्ति द्वारा, जो ऐसी सेवाओं में ऐसे पदों को मूल हैसियत में धारण करते हों, जैसा कि इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए।
(घ) ऐसे व्यक्ति/व्यक्तियों के संविलयन द्वारा, जो ऐसी सेवाओं में ऐसे पदों को धारण करते हों एवं किसी शासकीय सेवा में समकक्ष वेतनमान पद पर सेवारत हो।
(2) उप-नियम (1) के खण्ड (क), (ख), (ग) और (घ) के अधीन भर्ती किए व्यक्तियों की संख्या, अनुसूची-एक में यथा विनिर्दिष्ट कर्तव्य पदों की संख्या के, अनुसूची-दो में दर्शाये गए प्रतिशत से किसी भी समय अधिक नहीं होगी।
(3) इन नियमों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, भर्ती की किसी विशिष्ट कालावधि के दौरान भरे जाने के लिए अपेक्षित सेवा में किसी विशिष्ट रिक्ति या रिक्तियों को भरे जाने के प्रयोजन के लिए अपनायी जाने वाली भर्ती का तरीका या तरीके और ऐसे तरीके द्वारा भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, प्रत्येक अवसर पर नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा, आयोग/शासन के परामर्श से अवधारित की जाएगी।
(4) सेवा मे भर्ती के समय, छत्तीगसढ़ लोक लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्र. 21 सन् 1994) के प्रावधान और इस अधिनियम के अधीन, शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश लागू होंगे।
(5) उप-नियम (1) के खण्ड (क), (ख), (ग) या (घ) के अधीन भर्ती किए व्यक्तियों की पदक्रम सूची छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें नियम), 1961 के नियम 10 के प्रावधान के अधीन संधारित होगी।
(6) उप-नियम (1) के खण्ड (क), (ख), (ग) या (घ) के अंतर्गत भर्ती के संबंध में अनिवार्य योग्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाएगी।
7. सेवा में नियुक्ति. इन नियमों के प्रारंभ होने के पश्चात्, सेवा में समस्त नियुक्तियाँ, नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा की जायेंगी और ऐसी कोई भी नियुक्ति, नियम 6 में विनिर्दिष्ट भर्ती के किसी एक तरीके द्वारा चयन करने के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नहीं।
8. सीधी भर्ती के लिए पात्रता की शर्तें. सीधी भर्ती/चयन/सीमित विभागीय परीक्षा के लिए पात्र होने के लिए अभ्यर्थी को, निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी, अर्थात;-
(एक) आयु- (क) वर्ष, जिसमें पद के लिए विज्ञापन प्रकाशित होता है, की जनवरी के प्रथम दिन पर अभ्यर्थी ने अनुसूची-तीन के कॉलम (3) में यथा विनिर्दिष्ट आयु पूरी कर ली हो और उक्त अनुसूची के कॉलम (4) में यथा विनिर्दिष्ट आयु पूरी न की हो;
(ख) यदि अभ्यर्थी अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) का हो, तो उच्चतर आयु सीमा अधिकतम 5 वर्ष तक शिथिलनीय होगी;
ग) छत्तीसगढ़ सिविल सेवा महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 के उपबंधों के अनुसार, महिला अभ्यर्थियों के लिए, उच्चतर आयु सीमा अधिकतम 10 वर्ष तक शिथिलनीय होगी;
(घ) दिव्यांगजन व्यक्तियों को सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी;
(ङ) ऐसे अभ्यर्थियों के संबंध में भी, जो छत्तीसगढ़ शासन के कर्मचारी हों या रह चुके हों, नीचे विनिर्दिष्ट की गई सीमा और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, उच्चतर आयु सीमा शिथिलनीय होगीः-
(एक) ऐसा अभ्यर्थी, जो स्थायी या अस्थायी शासकीय सेवक हो, 38 वर्ष से अधिक आयु का नहीं होना चाहिये;
(दो) ऐसा अभ्यर्थी, जो अस्थायी रूप से पद धारण कर रहा हो और किसी अन्य पद के लिए आवेदन कर रहा हो, 38 वर्ष से अधिक आयु का नहीं होना चाहिए। यह रियायत, आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों, कार्यभारित कर्मचारियों और परियोजना कार्यान्वयन समिती में कार्यरत कर्मचारियों को भी अनुज्ञेय होगी;
(तीन) ऐसा अभ्यर्थी, जो “छंटनी किया गया शासकीय सेवक” हो, उसे अपनी आयु में से उसके द्वारा पूर्व में की गई संपूर्ण अस्थायी सेवा की अधिकतम 7 वर्ष तक की कालावधि, भले ही वह कालावधि एक से अधिक बार की गई सेवाओं का योग हो, कम करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा
परन्तु इसके परिणामस्वरूप जो आयु निकले, वह उच्चतर आयु सीमा से 3 वर्ष से अधिक न हो।
स्पष्टीकरणः- शब्द “छंटनी किए गए शासकीय सेवक” से अभिप्रेत है, ऐसा व्यक्ति, जो इस राज्य की अथवा किन्हीं भी संघटक इकाईयों की अस्थाई शासकीय सेवा में कम से कम 6 माह की कालावधि तक निरंतर रहा हो और जिसे किसी रोजगार कार्यालय में अपना पंजीयन कराने या शासकीय सेवा में नियोजन के लिए अन्यथा आवेदन करने की तारीख से अधिक से अधिक 3 वर्ष पूर्व स्थापना में कमी किए जाने के कारण सेवोन्मुक्त किया गया हो।
(च) ऐसा अभ्यर्थी, जो “भूतपूर्व सैनिक” हो, उसे अपनी आयु में से उसके द्वारा पूर्व में की गई संपूर्ण प्रतिरक्षा सेवा की कालावधि कम करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगाः
परन्तु इसके परिणामस्वरूप जो आयु निकले, वह उच्चतर आयु सीमा से 3 वर्ष से अधिक न हो।
स्पष्टीकरणः- शब्द “भूतपूर्व सैनिक” से अभिप्रेत है, ऐसा व्यक्ति, जो निम्नलिखित प्रवर्गो में से किसी एक प्रवर्ग का हो और जो भारत सरकार के अधीन कम से कम 6 माह की कालावधि तक निरंतर नियोजित रहा हो और जिसे किसी रोजगार कार्यालय में अपना पंजीयन कराने या शासकीय सेवा में नियोजन के लिए अन्यथा आवेदन करने की तारीख से अधिक से अधिक 3 वर्ष पूर्व मितव्ययिता इकाई की सिफरिशों के फलस्वरूप या स्थापना में सामान्य रूप से कमी किए जाने के कारण छंटनी किया गया हो अथवा जिसे अतिशेष (सरप्लस) घोषित किया गया हो:-
(1) ऐसे भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें समय पूर्व सेवानिवृत्ति रियायतों के अधीन निर्मुक्त कर दिया हो,
( 2) ऐसे भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें दुबारा नामांकित किया गया हो, और जिन्हें-
(क) अल्पकालीन वचनबंध अवधि पूर्ण हो जाने पर;
(ख) नामांकन की शर्तें पूर्ण हो जाने पर, सेवोन्मुक्त कर दिया गया हो।
(3) ऐसे भूतपूर्व सैनिक (सैनिक और असैनिक), जिन्हें उनकी संविदा पूरी हो जाने पर सेवोन्मुक्त किया गया हो (जिनमें अल्पावधि सेवा के नियमित कमीशन प्राप्त अधिकारी भी शामिल है);
(4) ऐसे भूतपूर्व सैनिक/अधिकारी, जिन्हें अवकाश रिक्तियों पर 6 माह से अधिक समय तक निरंतर कार्य करने के पश्चात् सेवोन्मुक्त किया गया हो;
(5) ऐसे भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें अशक्त होने के कारण सेवा से अलग कर दिया गया हो;
(6) ऐसे भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें इस आधार पर सेवोन्मुक्त किया गया हो कि अब वे दक्ष सैनिक बनने योग्य नहीं है;
(7) ऐसे भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें गोली लग जाने, घाव आदि हो जाने के कारण चिकित्सीय आधार पर सेवा से अलग कर दिया गया हो।
(छः) अस्पृश्यता निवारण नियम, 1984 के अधीन अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पुरस्कृत दम्पत्तियों के सवर्ण पति/पत्नी के संबंध में उच्चतर आयु सीमा 5 वर्ष तक शिथिलनीय होगी।
(ज) शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार, गुण्डाधुर सम्मान, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान और राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त अभ्यर्थियों के संबंध में भी, उच्चतर आयु सीमा 5 वर्ष तक शिथिलनीय होगी।
(झ) ऐसे अभ्यर्थी, जो छत्तीसगढ़ राज्य निगम/मण्डल के कर्मचारी हैं, के संबंध में उच्चतर आयु सीमा 38 वर्ष की आयु तक शिथिलनीय होगी।
(ञ) स्वयंसेवी नगर सैनिकों एवं नगर सेना के नान कमीशण्ड अधिकारियों के संबंध में उनके द्वारा पूर्व में इस प्रकार की गई नगर सेना सेवा की कालावधि के लिए उच्चतर आयु सीमा में 8 वर्ष की सीमा के अध्यधीन रहते हुए छूट दी जाएगी, किन्तु किसी भी दशा में उनकी आयु 38 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये।
टीपः- (1) ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हें उपरोक्त नियम ४ के खण्ड (एक) के उप-खण्ड (ङ) के पैरा (एक) और (दो) में उल्लिखित आयु संबंधी रियायतों के अधीन परीक्षा/चयन में प्रवेश दिया गया हो, यदि वे आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के पश्चात् या तो परीक्षा/चयन के पूर्व या उसके पश्चात्, सेवा से त्यागपत्र दे देते हैं, तो वे नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। औरपि, यदि आवेदन पत्र भेजने के पश्चात् सेवा या पद से उनकी छंटनी कर दी जाती हो, तो वे पात्र बने रहेंगे।
(2) किसी भी अन्य मामले में ये आयु सीमा शिथिल नहीं की जायेंगी। विभागीय अभ्यर्थियों को चयन के लिए उपस्थित होने के लिए, नियुक्ति प्राधिकारी की पूर्व अनुमति अभिप्राप्त करनी होगी।
(ट) उपरोक्त संवर्गों के किसी एक या एक से अधिक आधार पर छूट प्राप्त करने के उपरान्त, शासकीय सेवा में प्रवेश के लिए, अधिकतम आयु 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी;
(ठ) उपरोक्त के अतिरिक्त, आयु सीमा के संबंध में, शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश भी लागू होंगे।
(दो) शैक्षणिक अर्हतायें एवं अनुभव अभ्यर्थी के पास सेवा के लिए यथा विहित ऐसी शैक्षणिक अर्हतायें एवं अनुभव होनी चाहिए, जैसा कि अनुसूची-तीन के कॉलम (5) में दर्शित है। प्रारंभिक शिक्षा के लिए, निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (2009 का सं. 35) के प्रावधानों के अनुसार विहित अर्हतायें लागू होंगी।
(तीन) शुल्क (क) अभ्यर्थी को आयोग/संचालक द्वारा विहित फीस का भुगतान करना होगा।
(ख) ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हें चिकित्सा मण्डल के समक्ष चिकित्सा परीक्षा के पूर्व उपस्थित होने के लिए अपेक्षित किया गया हो, चिकित्सा मण्डल के अध्यक्ष को शासन द्वारा यथा विहित शुल्क का भुगतान करना होगा।
9. निरर्हता.- (1) अभ्यर्थी की ओर से अपनी अभ्यर्थिता के लिए किन्हीं भी साधनों से, समर्थन अभिप्राप्त करने के किसी भी प्रयास को, आयोग/संचालक द्वारा चयन के लिए निरर्हित माना जा सकेगा।
(2) कोई भी पुरूष अभ्यर्थी, जिसकी एक से अधिक पत्नियां जीवित हों और कोई भी महिला अभ्यर्थी, जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो, जिसकी पहले ही एक पत्नी जीवित हो, किसी सेवा या पद में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा/होगीः
परन्तु यदि शासन का यह समाधान हो जाए कि ऐसा करने के विशेष कारण हैं, तो शासन, ऐसे अभ्यर्थियों को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगा।
(3) कोई भी अभ्यर्थी, किसी सेवा या पद पर तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसे ऐसी स्वास्थ्य परीक्षा में, जो कि विहित की जाए, मानसिक या शारीरिक रूप से स्वस्थ्य, और किसी मानसिक या शारीरिक दोष जो किसी सेवा या पद के कर्तव्य को पूरा करने में बाधा डाल सकता हो से मुक्त, घोषित न कर दिया जायेः
परन्तु आपवादिक मामलों में अभ्यर्थी को उसकी स्वास्थ्य परीक्षा के पूर्व किसी सेवा या पद पर इस शर्त के अधीन अस्थायी नियुक्ति दी जा सकगी कि यदि वह चिकित्सीय रूप से अस्वस्थ्य पाया जाता है, तो उसकी सेवाएं तत्काल समाप्त की जा सकेगी ।
(4) कोई भी अभ्यर्थी, किसी सेवा या पद के लिए उस स्थिति में पात्र नहीं होगा, यदि नियुक्ति प्राधिकारी का, ऐसी सम्यक् जांच, जैसा कि आवश्यक समझे, के पश्चात् यह समाधान हो जाए कि वह अभ्यर्थी ऐसी सेवा या पद के लिए उपयुक्त नहीं है।
(5) कोई भी अभ्यर्थी, जिसे महिलाओं के विरूद्ध किसी अपराध का सिद्ध दोष ठहराया गया हो, किसी सेवा या पद के लिए पात्र नहीं होगाः
परन्तु यदि किसी अभ्यर्थी के विरूद्ध न्यायालय में ऐसे मामले लंबित हों, तो उसकी नियुक्ति का मामला तब तक लंबित रखा जाएगा जब तक कि उस अपराधिक मामले का न्यायालय द्वारा अंतिम विनिश्चय न कर दिया जाए।
(6) कोई भी अभ्यर्थी, जिसने विवाह के लिए नियत की गई न्यूनतम आयु से पूर्व विवाह कर लिया हो, किसी सेवा या पद लिए पात्र नहीं होगा।
(7) छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते नियम, 1961 में दिये गए प्रावधान एवं शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के अनुसार निरर्हतायें, अभ्यर्थियों के लिए लागू होंगी।
(8) चयनित अभ्यार्थी का चरित्रसत्यापन अर्थात् पुलिस प्रमाणीकरण की विधिवत कार्यवाही के अध्यधीन होगा।
10. अभ्यर्थी की पात्रता के संबंध में आयोग/संचालक का विनिश्चय अंतिम होगा (1) चयन
के लिए अभ्यर्थी की पात्रता अथवा अन्यथा के संबंध में आयोग/संचालक का विनिश्चय अंतिम होगा और ऐसे किसी भी अभ्यर्थी को, जिसे परीक्षा/साक्षात्कार के लिए आयोग/चयन समिति द्वारा प्रवेश प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया हो, परीक्षा या साक्षात्कार में उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
(2) चयन प्रक्रिया के किसी समय पर अथवा शासन/संचालक को चयन सूची भेजने के बाद भी, यदि आयोग/चयन समिति के संज्ञान में यह तथ्य आता है कि अभ्यर्थी ने असत्य जानकारी दी है अथवा उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में कोई विसंगति पायी गई है, तो वह निरर्हित हो जाएगा एवं उसका चयन/नियुक्ति, आयोग/संचालक द्वारा समाप्त कर दी जाएगी।
11. चयन (प्रतियोगिता परीक्षा/साक्षात्कार) और सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से सीधी भर्ती. (1) सेवा में भर्ती के लिए चयन, ऐसे अन्तरालों से किया जाएगा, जैसा कि शासन/संचालक, आयोग/शासन के परामर्श से, समय-समय पर, अवधारित करे।
(2) उप संचालक, प्राचार्य एवं सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद के लिए परीक्षा, लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाएगी और अन्य पदों के लिए परीक्षा, संचालक लोक शिक्षण द्वारा ऐसे पाठ्यक्रम, परीक्षा योजना और जारी निर्देशों के अनुसार आयोजित की जाएगी, जैसा कि शासन/आयोग/संचालक द्वारा क्रमशः आयोग/शासन के परामर्श से, समय-समय पर जारी करे।
(3) सेवा के लिए अभ्यर्थियों का चयन, ऐसी रीति से किया जाएगा, जैसा कि आयोग/संचालक अवधारित करे।
(4) सेवा में भर्ती के समय, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम, 1994 (क्र.21 सन् 1994) के उपबंध और उक्त अधिनियम के अधीन, शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश भी लागू होंगे।
(5) छत्तीसगढ़ सिविल सेवा महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 के उपबंध के अनुसार महिला अभ्यर्थियों के लिए 30 प्रतिशत पद आरक्षित रखे जायेंगे। यह आरक्षण, समस्तर और प्रभागवार होगा। नियम के प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुए, विधवा अथवा तलाकशुदा महिला अभ्यर्थियों को अधिमान दिया जाएगा।
(6) उपरोक्त के अतिरिक्त, दिव्यांगजन /भूतपूर्व सैनिक के लिए पदों को, शासन द्वारा समय-समय पर बनाये गए अधिनियम/नियम/जारी आदेश/निर्देश के अनुसार आरक्षित रखा जाएगा। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (2016 का सं. 49) के प्रावधानों के अन्तर्गत राज्य में लागू प्रतिशत के अनुसार, पदों का आरक्षण, 7% रहेगा।
(7) आरक्षित रिक्तियों को भरते समय, ऐसे अभ्यर्थियों, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) के सदस्य हैं, की नियुक्ति के लिए उसी क्रम में विचार किया जाएगा, जिस क्रम में उनके नाम नियम 12 में निर्दिष्ट सूची में आये हों, चाहे अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में उनका सापेक्षिक रैंक कुछ भी क्यों न हो।
(8) उपरोक्त के अतिरिक्त, ऐसे अभ्यर्थी, जो महिला/दिव्यांगजन व्यक्ति/भूतपूर्व सैनिक हैं और जो आरक्षण के परिणामस्वरूप चयनित किए गए हैं, की नियुक्ति के लिए उसी क्रम मे विचार किया जाएगा जिस क्रम में उनके नाम नियम 12 में निर्दिष्ट सूची में आये हों, चाहे अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में उनका सापेक्षिक रैंक कुछ भी क्यों न हो।
(9) अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) से संबंधित उन अभ्यर्थियों को, जिन्हें उनकी प्रशासनिक दक्षता को दृष्टिगत रखते हुए, नियुक्ति के लिए आयोग/संचालक द्वारा पात्र घोषित किया गया हो, उप-नियम (7) के अनुसार, यथास्थिति, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गो (गैर-क्रीमी लेयर) के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रिक्तियों पर नियुक्त किया जा सकेगा।
(10) ऐसे मामलों में, जहाँ सीधी भर्ती द्वारा भरे जाने वाले पदों के लिए कुछ कालावधि का अनुभव आवश्यक शर्त के रूप में विहित किया गया है और शासन की राय हो कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) से संबंधित अभ्यर्थियों की पर्याप्त संख्या में, अपेक्षित अनुभव के साथ, उपलब्ध होने की संभावना नहीं है, तो शासन, आयोग/संचालक के परामर्श से, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) के अभ्यर्थियों के लिए अनुभव की शर्त को शिथिल कर सकेगा।
12. आयोग/संचालक द्वारा अनुशंसित चयनित अभ्यर्थियों की सूची (1) आयोग/संचालक,
उन अभ्यर्थियों की योग्यता क्रम में व्यवस्थित एक सूची, जो ऐसे स्तर से अर्हित हों और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (गैर-क्रीमी लेयर) से संबंधित उन अभ्यर्थियों की सूची, जो यद्यपि उस स्तर से अर्हित नहीं हैं, किन्तु प्रशासन में दक्षता बनाये रखने का सम्यक् ध्यान रखते हुए, सेवा में नियुक्ति के लिए आयोग/संचालक द्वारा उपयुक्त घोषित किया गया है और महिला, दिव्यांगजन/भूतपूर्व सैनिक से संबंधित प्रत्येक प्रवर्ग के अभ्यर्थियों, जो आरक्षण के फलस्वरूप ऐसे स्तर से अर्हित हों, की सूची मेरिट क्रम में तैयार करेगा, जिसकी वैधता, पद में नियुक्ति के लिए शासन को सूची भेजे जाने की तारीख से छः माह की होगी। जहाँ जहाँ संचालक, लोक 5, लोक शिक्षण, नियुक्ति प्राधिकारी है, वहां चयन सूची की वैधता, इस प्रकार चयन सूची जारी किए जाने की तारीख से छः माह की होगी।
(2) उप-नियम (1) के अधीन इस प्रकार तैयार की गई सूची, सर्वसाधारण की जानकारी के लिए आयोग/संचालनालय की वेबसाइट पर अधिसूचित की जाएगी।
(3) रिक्त रेक्त पदों की पूर्ति पूर्ति के लिए आयोग चयन समिति द्वारा प्रत्येक प्रवर्ग के लिए एक चयन सूची तैयार की जाएगी। ऐसे प्रवर्ग के लिए एक प्रतीक्षा सूची भी तैयार की जाएगी, जिसमे न्यूनतम एक नाम और अधिकतम रिक्त पदों के 25% तक नाम सम्मिलित होंगे। प्रतीक्षा सूची की वैधता, ऐसी चयन सूची के जारी होने की तारीख से नौ माह की होगी।
स्पष्टीकरणः प्रत्येक प्रवर्ग में रिक्त पदों के 25% का आंकलन करने के लिए, इसे पूर्णांक में लाने के लिए, अंक को अगले पूर्णांक तक बढ़ा दिया जाएगा।
(4) आयोग, उप-नियम (1) के अधीन तैयार की गई चयन सूची, शासन को नियुक्ति के संबंध में अग्रिम कार्यवाही के लिए अग्रेषित करेगा।
(5) इन नियमों और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम, 1961 के रिक्तियों पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए क्रम मे उनके नाम सूची में आये हों।
(6) सूची में किसी अभ्यर्थी का नाम सम्मिलित होने से ही उसे नियुक्ति के लिए कोई अधिकार तब तक प्राप्त नहीं होता, जब तक कि शासन का, ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसा कि वह आवश्यक समझे, यह समाधान न हो जाए, कि अभ्यर्थी सेवा में नियुक्ति के लिए सभी प्रकार से उपयुक्त है।
(7) यदि कोई अभ्यर्थी, जिसका नाम चयन सूची में सम्मिलित हो, की वैधता अवधि में कार्यभार ग्रहण न करने या पदत्याग करने या किन्हीं कारणों से अयोग्य पाये जाने पर या वैधता अवधि के दौरान चयनित अभ्यर्थी की मृत्यु हो जाने पर, आयोग/संचालक द्वारा प्रतीक्षा सूची से अभ्यर्थियों के नाम, नियुक्ति के लिए अनुशंसित/अनुमोदित किए जा सकेंगे।
(8) यदि प्रतीक्षा सूची से अभ्यर्थियों का नाम भेजे जाने के लिए शासन से अनुरोध प्राप्त होता है, तो आयोग, उपरोक्त प्रावधानों के अनुसार, प्रतीक्षा सूची से नाम अनुशंसित करेगा और इसे शासन को भेजेगा।
13. परिवीक्षा. (क) सेवा में सीधी भर्ती किया गया प्रत्येक व्यक्ति, तीन वर्ष की कालावधि के लिए परिवीक्षा पर नियुक्त किया जाएगा।
(ख) यदि कार्य असंतोषप्रद पाया जाता है, तो परिवीक्षा अवधि में, शासन द्वारा अधिकतम एक वर्ष तक की कालावधि की वृद्धि की जा सकेगी, जो एक वर्ष से अधिक नहीं होगी।
(ग) परिवीक्षा की कालावधि या बढ़ायी गई अवधि के दौरान या परिवीक्षा अवधि के अंत में, यदि शासन की राय हो कि कोई विशिष्ट अभ्यर्थी, अधिकारी बनने के योग्य न हो, तो ऐसे परिवीक्षाधीन की सेवायें समाप्त की जा सकेंगी।
14. पदोन्नति द्वारा नियुक्ति (1) पदोन्नति के लिए पात्र अभ्यर्थियों का प्रारंभिक चयन करने के लिए, एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें अनुसूची-चार में उल्लिखित सदस्य सम्मिलित होंगे:
परन्तु इस उप-नियम के अधीन, समिति के गठन के प्रयोजन के लिए, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्र. 21 सन् 1994) की धारा 8 के उपबंध भी लागू होंगे। (
2) समिति की बैठक ऐसे अन्तरालों में होगी, जो साधारणतः 1 वर्ष से अधिक की न हो।
(3) प्रत्येक पदोन्नति, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2003 के उपबंधों के अनुसार और मॉडल रोस्टर और शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
(4) नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा प्रमाणन नियुक्ति प्राधिकारी, अपने द्वारा जारी किए जाने वाले पदोन्नति आदेश पर, इस आशय के प्रमाणपत्र का पृष्ठांकन करेगा कि उसने छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्र. 21 सन् 1994) और छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2003 के उपबंधों और उक्त अधिनियम के उपबंधों के प्रकाश में जारी निर्देशों और राज्य शासन द्वारा बनाने गए नियमों का पालन कर लिया है और उसने उक्त अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (1) के उपबंधों का पूर्ण संज्ञान लिया है।
15. पदोन्नति के लिए पात्रता संबंधी शर्तें (1) उप-नियम (2) के प्रावधानों के अध्यधीन रहते
हुए, समिति, उन समस्त व्यक्तियों के मामलों पर विचार करेगी, जिन्होंने उस वर्ष की जनवरी के प्रथम दिन को, उन पदों में, जिनसे पदोन्नति की जानी है, (चाहे मूल रूप में या स्थानापन्न
रूप में उतने वर्षों की सेवा, जैसा कि अनुसूची-चार के कॉलम (3) में विनिर्दिष्ट है, पूर्ण कर ली हो और जो उप-नियम (2) के उपबंधों के अनुसार विचारण क्षेत्र के भीतर आते हों।
(2) (एक) ऐसे मामलों में, जहाँ पदोन्नति, वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर अथवा अनुपयुक्त अभ्यर्थी को छोड़कर वरिष्ठता के आधार पर की जानी हो, वहाँ सभी वर्गों के लिए विचारण के लिए कोई आधार नहीं होगा। केवल लोक सेवकों की ऐसी संख्या के प्रस्तावों पर वरिष्ठता के अनुसार विचार किया जाएगा, जो कि प्रत्येक प्रवर्ग में विद्यमान पद और एक वर्ष के दौरान सेवानिवृत्ति/पदोन्नति के कारण होने वाली प्रत्याशित रिक्त पदों की संख्या को भरने के लिए पर्याप्त होगी।
(दो) ऐसे मामलों में, जहाँ पदोन्नति योग्यता-सह-वरिष्ठता के आधार पर की जानी हो वहाँ विचार का क्षेत्र कुल रिक्त पदों के दो गुने से चार अधिक होगा। यदि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शासकीय सेवकों की पर्याप्त संख्या पदोन्नति के लिए उपलब्ध न हो, तो विचार के क्षेत्र में कुल रिक्त पदों की संख्या के 7 गुने तक वृद्धि की जा सकेगी और आरक्षित पदों की पूर्ति, उपरोक्त उल्लिखित विचार क्षेत्र में आए आरक्षित संवर्ग के व्यक्तियों से की जा सकेगी। समिति, उक्त विचार के क्षेत्र से प्रत्येक प्रवर्ग के अधीन विद्यमान और एक वर्ष के दौरान सेवानिवृत्ति और पदोन्नति के कारण होने वाली प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिए विचार करेगी।
(3) उप-नियम (2) के अधीन प्रत्याशित रिक्तियों के अतिरिक्त उक्त अवधि के दौरान होने वाली अप्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिए, दो लोक सेवकों के या चयन सूची में सम्मिलित लोक सेवकों की संख्या के 25%, जो भी अधिक हो, उनके नाम सम्मिलित करने के उद्देश्य से प्रत्येक प्रवर्ग के लिए अपेक्षित संख्या में लोक लोक सेवकों के के नाम पर विचार किया जाएगा।
(4) शासन द्वारा विहित आरक्षण रोस्टर के अनुसार पदोन्नति की जाएगी।
(5) छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2003 के अन्य प्रावधान और शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी आदेश, पदोन्नति के लिए लागू होंगे।
16. उपयुक्त अभ्यर्थियों की सूची तैयार करना (1) समिति, ऐसे व्यक्तियों की एक चयन
सूची तैयार करेगी, जो उपरोक्त नियम 15 में विहित शर्तों को पूरी करते हों और जिन्हे समिति द्वारा सेवा में पदोन्नति के लिए उपयुक्त समझा गया हो। यह सूची, चयन सूची के तैयार किए जाने की तारीख से एक वर्ष की कालावधि के दौरान सेवानिवृत्ति और पदोन्नति के कारण होने वाली प्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिए पर्याप्त होगी। इसके अतिरिक्त, उक्त अवधि के दौरान होने वाली अप्रत्याशित रिक्तियों को भरने के लिए, एक आरक्षित सूची तैयार की जाएगी, जिसमें प्रत्येक प्रवर्ग में उपलब्ध पदों के न्यूनतम एक एवं अधिकतम 25% तक नाम सम्मिलित होंगे।
(2) चयन सूची में सम्मिलित व्यक्तियों के नाम अनुसूची-चार के कॉलम (2) में विनिर्दिष्ट अनुसार वरिष्ठता के क्रम में रखे जायेंगे। उपयुक्त अधिकारियों की सूची, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार तैयार की जाएगी।
17. आयोग से परामर्श (1) नियम 16 के अनुसार तैयार की गई सूची शासन द्वारा आयोग को एवं समिति द्वारा नियुक्ति प्राधिकारी को निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ भेजी जाएगीः-
(एक) सूची में सम्मिलित सभी व्यक्तियों के अभिलेख।
(दो) अभिलेखों के आधार पर समिति का अभिमत।
(तीन) समिति की अनुशंसाओं पर शासन की टिप्पणियां
। (2) यदि पदोन्नति समिति की बैठक में आयोग/अध्यक्ष द्वारा नामांकित कोई सदस्य, पदोन्नति समिति में उपस्थित रहे हों और बैठक के कार्यवाही विवरण पर समिति के अध्यक्ष सहित समस्त सदस्यों के हस्ताक्षर हो तो उप-नियम (1) के अधीन उपर्युक्त कार्यवाही अनिवार्य नहीं होगी और यह माना जाएगा कि संविधान के अनुच्छेद 320 के खण्ड (3) के उप-खण्ड (ख) के अधीन आयोग के साथ परामर्श करने संबंधी अपेक्षा का अनुपालन हो गया है और आयोग के साथ पृथक से परामर्श करना आवश्यक नही होगा।
18. चयन सूची (1) समिति/शासन द्वारा अनुमोदित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची, अनुसूची-चार के कॉलम (2) में उल्लिखित पदों से अनुसूची-चार के कॉलम (4) में उल्लिखित पदों पर पदोन्नति के लिए चयन सूची होगी।
जहाँ स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, नियुक्ति प्राधिकारी है, ऐसे मामले में आयोग, शासन से प्राप्त हुए दस्तावेजों के साथ-साथ समिति द्वारा तैयार की गई सूची पर विचार करेगा। यदि आयोग की राय हो कि इसमें कोई परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं है, तो वह सूची को अनुमोदित करेगा।
(2) यदि आयोग, शासन से प्राप्त सूची में कोई परिवर्तन करना आवश्यक समझे, तो आयोग, प्रस्तावित परिवर्तन से शासन को सूचित करेगा और यदि शासन, इस पर विचार करने के पश्चात् कोई मत प्रकट करे, तो ऐसे उपांतरणों सहित, यदि कोई हो, जो उसकी राय में न्यायसंगत एवं युक्तियुक्त हो, शासन, सूची को अंतिम रूप से अनुमोदित करेगा।
(3) आयोग द्वारा अंतिम रूप से अनुमोदित चयन सूची, अनुसूची-चार के कॉलम (2) में उल्लिखित पदों से अनुसूची-चार के कॉलम (4) में यथा उल्लिखित पदों पर, सेवा के सदस्यों की पदोन्नति के लिए अनुमोदित चयन सूची होगी।
(4) जहाँ स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, नियुक्ति प्राधिकारी है, ऐसे मामले में उन पदों की चयन सूची संचालक, लोक शिक्षण द्वारा अनुमोदित की जाएगी और उक्त चयन सूची पदोन्नति के लिए अंतिम सूची होगी।
(5) चयन सूची, इसके तैयार किए जाने की तारीख के कैलेण्डर वर्ष की 31 दिसम्बर तक विधिमान्य रहेगी:
परन्तु चयन सूची में सम्मिलित किसी व्यक्ति की ओर से आचरण या कर्तव्य के निर्वहन में गंभीर चूक होने की स्थिति में, शासन के अनुरोध पर चयन सूची का विशेष रूप से पुनर्विलोकन किया जा सकेगा और आयोग / संचालक, यदि उचित समझे, तो चयन सूची से ऐसे व्यक्ति का नाम हटा सकेगा।
19. चयन सूची से सेवा में नियुक्ति (1) चयन सूची में सम्मिलित अधिकारियों की सेवा-
संवर्ग के पदों पर नियुक्ति में उसी क्रम का अनुपालन किया जाएगा, जिस क्रम में ऐसे अधिकारियों के नाम चयन सूची में आये हो।
(2) साधारणतः उस अधिकारी की जिसका नाम चयन सूची में सम्मिलित हों, सेवा में नियुक्ति के पूर्व, आयोग/समिति से परामर्श करना तब तक आवश्यक नहीं होगा जब तक कि चयन सूची में उसका नाम शामिल किए जाने और प्रस्तावित नियुक्ति की
तारीख के बीच की कालावधि के दौरान उसके कार्य में ऐसे कोई गिरावट न आ जाए, जो शासन की राय में, सेवा में नियुक्ति के लिए उसे अनुपयुक्त सिद्ध करता हो।
(3) ऐसा व्यक्ति, जिसका नाम चयन सूची में सम्मिलित है, पदोन्नत नहीं किया जाएगा, यदि उसकी विभागीय जांच चल रही हो या अभियोजन संस्थित हो, जब तक की जांच या अभियोजन पूरा न किया गया हो।
20. निर्वचन. यदि इन नियमों के निर्वचन के संबंध में कोई प्रश्न उद्भूत हो, तो उसे राज्य ug शासन को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा। शैक्षणिक योग्यता के संदर्भ में नियम 6(6) लागू होगा।
21. शिथिलीकरण. इन नियमों में दी गई किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति के मामले में, जिस पर ये नियम लागू होते हैं, ऐसी रीति से कार्यवाही करने की राज्यपाल की शक्ति को, जो उसे न्यायसंगत एवं उचित प्रतीत हो, सीमित या कम करती है:
परन्तु कोई मामला, ऐसे रीति से नहीं निपटाया जाएगा, जो इन नियमों में उपबंधित रीति की अपेक्षा उसके लिए कम अनुकूल हो।
22. निरसन एवं व्यावृत्ति (1) इन नियमों के तत्स्थानी और इन नियमों के प्रारंभ होने के ठीक पूर्व प्रवृत्त समस्त नियम, इन नियमों के अंतर्गत आने वाले विषयों के संबंध में एतद्द्वारा निरसित किए जाते हैः
परन्तु इस प्रकार निरसित नियमों के अधीन दिया गया कोई भी आदेश या की गई कार्रवाई, इन नियमों के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन दिया गया आदेश या की गई कार्रवाई समझी जाएगी।
(2) इन नियमों में दी गई कोई भी बात, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए राज्य शासन द्वारा समय-समय पर इस संबंध में जारी किए गए आदेशों के अनुसार उपबंधित आरक्षण और अन्य रियायतों को प्रभावित नहीं करेगी।







